राम मंदिर दान घोटाले पर रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकार अभिषेक उपाध्याय ने यूपी पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर को 'प्लांटेड' बताते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। शीर्ष अदालत ने इस मामले में कल सुनवाई करने पर सहमति जताई है।

  • सुप्रीम कोर्ट कल पत्रकार अभिषेक उपाध्याय की याचिका पर सुनवाई करेगा।
  • याचिकाकर्ता ने यूपी पुलिस द्वारा दर्ज सड़क दुर्घटना की एफआईआर को फर्जी और प्रतिशोधपूर्ण बताया है।
  • अभिषेक उपाध्याय ने राम मंदिर ट्रस्ट के डोनेशन फंड में कथित भ्रष्टाचार को उजागर किया था।

भारत के सुप्रीम कोर्ट ने कल वरिष्ठ पत्रकार और कंटेंट क्रिएटर अभिषेक उपाध्याय की उस याचिका पर सुनवाई करने का निर्णय लिया है, जिसमें उन्होंने उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा दर्ज एक प्राथमिकी (FIR) को चुनौती दी है। उपाध्याय का आरोप है कि यह कानूनी कार्रवाई उनके द्वारा किए गए खोजी पत्रकारिता के कार्यों का परिणाम है, न कि किसी वास्तविक अपराध का।

मामले की पृष्ठभूमि इस बात से जुड़ी है कि अभिषेक उपाध्याय ने राम मंदिर के निर्माण के लिए एकत्र किए गए दान के कथित दुरुपयोग और भ्रष्टाचार से जुड़ी संवेदनशील रिपोर्टिंग की थी। उनके दावों के अनुसार, इस रिपोर्टिंग के बाद से उन्हें और उनके परिवार को लगातार मानसिक और कानूनी प्रताड़ना का सामना करना पड़ रहा है।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that this case is not merely about a road rage incident, but represents a larger conflict between investigative journalism and state machinery. When a journalist is targeted with 'planted' FIRs following reports on high-profile religious or political institutions, it raises critical questions about press freedom in India.

उपाध्याय का तर्क है कि जिस सड़क दुर्घटना के मामले में उन्हें नामजद किया गया है, वह पूरी तरह से मनगढ़ंत है और इसका उद्देश्य उन्हें चुप कराना है। उन्होंने अदालत से इस एफआईआर को रद्द करने और उन्हें सुरक्षा प्रदान करने की मांग की है।

"जब खोजी पत्रकारिता को कानूनी उत्पीड़न के माध्यम से दबाने की कोशिश की जाती है, तो यह लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर सीधा हमला होता है।"

ऐतिहासिक रूप से, भारत में कई ऐसे मामले देखे गए हैं जहाँ पत्रकारों के खिलाफ 'रणनीतिक मुकदमेबाजी' (SLAPP suits) का उपयोग किया गया है। इस मामले में भी, याचिकाकर्ता का दावा है कि यूपी पुलिस का यह कदम राजनीतिक दबाव में उठाया गया है।

क्या आप जानते हैं?: भारत में 'अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता' संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत एक मौलिक अधिकार है, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने समय-समय पर संरक्षित किया है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: अभिषेक उपाध्याय ने सुप्रीम कोर्ट में क्या याचिका दायर की है?
उन्होंने यूपी पुलिस द्वारा दर्ज उस एफआईआर को रद्द करने की मांग की है, जिसे वह राम मंदिर डोनेशन रिपोर्टिंग के कारण 'प्लांटेड' मानते हैं।

प्रश्न 2: इस मामले में मुख्य विवाद क्या है?
मुख्य विवाद यह है कि क्या एफआईआर एक वास्तविक सड़क दुर्घटना के कारण दर्ज की गई या यह पत्रकार को प्रताड़ित करने के लिए एक साजिश थी।