अमरावती के सरकारी अस्पताल के नवजात शिशु देखभाल इकाई (NICU) में लगी आग में तीन शिशु मार गए और कई अन्य गंभीर रूप से घायल हुए। राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडनवीस ने उच्च‑स्तरीय जांच का आदेश दिया और पूरे महाराष्ट्र में अस्पतालों की अग्नि सुरक्षा ऑडिट की मांग की।
- अमरावती के सरकारी अस्पताल के NICU में आग लगी
- तीन नवजात शिशु की मृत्यु, कई शिशु गंभीर रूप से घायल
- मुख्यमंत्री देवेंद्र फडनवीस ने उच्च‑स्तरीय जांच और राज्यव्यापी अग्नि ऑडिट का आदेश दिया
महाराष्ट्र के अमरावती में स्थित सरकारी अस्पताल के नवजात शिशु देखभाल इकाई (NICU) में 28 मार्च को अचानक आग लग गई, जिससे तीन नवजात शिशु अपनी जान गंवा बैठे और कई अन्य शिशु जलने से गंभीर रूप से घायल हुए। अस्पताल के प्रमुख ने बताया कि आग का प्रारंभिक स्रोत अभी तक स्पष्ट नहीं हुआ है, लेकिन प्रारम्भिक रिपोर्टों में इलेक्ट्रिकल शॉर्ट या गैस सिलेंडर रिसाव की संभावनाएँ सामने आई हैं।
आग के दौरान कई माताएँ अपने नवजात शिशुओं को लेकर अस्पताल के अंदर फँसी हुईं। एक मातृभाषी पिता ने बताया, "मैंने अपने बच्चे को राख में ढका देख कर चिल्ला उठी, ऐसा दर्द अब शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता"। स्थानीय पुलिस ने तुरंत फायर ब्रिगेड को बुलाया और आग को दो घंटे में नियंत्रित कर लिया।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडनवीस ने घटना पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा, "ऐसी त्रासदी को रोकने के लिए हमें अस्पतालों में अग्नि सुरक्षा मानकों को कड़ाई से लागू करना होगा"। उन्होंने राज्य सरकार के स्वास्थ्य विभाग को निर्देश दिया कि उच्च‑स्तरीय जांच टीम का गठन किया जाए और तुरंत एक व्यापक अग्नि सुरक्षा ऑडिट शुरू किया जाए।
विपक्षी दल ने इस अवसर पर सरकार की सुरक्षा नीतियों की आलोचना की और पूरे महाराष्ट्र में अस्पतालों की अग्नि सुरक्षा के लिए एक राज्यव्यापी ऑडिट की माँग की। कई विशेषज्ञों ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में महाराष्ट्र में कई अस्पतालों में आग की घटनाएँ हुई हैं, लेकिन सुरक्षा उपायों में कमी बनी हुई है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
पिछले पाँच वर्षों में महाराष्ट्र में तीन प्रमुख अस्पताल आग के शिकार हुए हैं, जिनमें 2019 में पुणे के एक निजी अस्पताल में 4 रोगियों की मृत्यु हुई और 2022 में औरंगाबाद में एक सरकारी वार्ड में आग लगी थी। इन घटनाओं ने राज्य सरकार को अग्नि सुरक्षा मानकों को पुनः संशोधित करने की आवश्यकता को उजागर किया।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण दर्शाता है कि NICU जैसी संवेदनशील सुविधाओं में सुरक्षा चूक न केवल जीवन को खतरे में डालती है, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली में विश्वास को भी क्षीण करती है। ऐसी घटनाएँ भविष्य में निवेश, नीति निर्माण और नियामक निगरानी पर बड़े पैमाने पर प्रभाव डाल सकती हैं।
"अस्पतालों में अग्नि सुरक्षा का अभाव एक प्रणालीगत समस्या है, जिसे तुरंत सुधारात्मक कदमों के साथ संबोधित किया जाना चाहिए," कहा सुरक्षा विशेषज्ञ डॉ. अंजली मेहता ने।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: क्या इस आग की वजह से किसी को कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा?
उत्तर: जांच टीम के निष्कर्षों के बाद दोषी पक्षों के विरुद्ध उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
प्रश्न 2: भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे?
उत्तर: राज्य सरकार ने सभी सरकारी और निजी अस्पतालों में तुरंत अग्नि सुरक्षा ऑडिट शुरू करने का आदेश दिया है, साथ ही NICU में विशेष सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू किए जाएंगे।