दिल्ली में भारी बारिश के बाद उत्पन्न हुए जलभराव की समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने केंद्र के सहयोग से एक व्यापक 'ड्रेनेज मास्टर प्लान' का खाका पेश किया है। सरकार का लक्ष्य 50 साल पुराने ड्रेनेज सिस्टम को आधुनिक तकनीक से बदलना है।
- दिल्ली सरकार ₹56,000 करोड़ के ड्रेनेज मास्टर प्लान पर काम कर रही है।
- शहर का मौजूदा ड्रेनेज नेटवर्क 50 साल से अधिक पुराना है।
- जलभराव वाले 169 हॉटस्पॉट की पहचान की गई है, जिनमें से 60 पर काम जारी है।
- आधुनिक तकनीक और स्मार्ट मीटरिंग के जरिए जल आपूर्ति और सीवरेज में सुधार किया जाएगा।
दिल्ली में हाल ही में हुई मूसलाधार बारिश के बाद उत्पन्न हुए जलभराव की स्थिति पर संज्ञान लेते हुए, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मंगलवार को राजधानी की बुनियादी समस्याओं के समाधान के लिए एक ठोस रणनीति साझा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार केंद्र सरकार के सहयोग से दिल्ली की पुरानी और 'विरासत' (legacy) मानी जाने वाली समस्याओं को सुलझाने के लिए प्रतिबद्ध है।
मुख्यमंत्री ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि दिल्ली का वर्तमान ड्रेनेज नेटवर्क 50 वर्ष से भी अधिक पुराना हो चुका है, जो बढ़ती आबादी और आधुनिक शहरीकरण के दबाव को झेलने में असमर्थ है। उन्होंने बताया कि पिछले डेढ़ साल से सरकार इन दीर्घकालिक समस्याओं का अध्ययन कर रही है और अब स्थायी समाधानों पर काम शुरू कर दिया गया है।
₹56,000 करोड़ का मास्टर प्लान और आधुनिक तकनीक
दिल्ली की जल निकासी व्यवस्था को पुनर्जीवित करने के लिए सरकार ने ₹56,000 करोड़ का 'ड्रेनेज मास्टर प्लान' लागू किया है। इस योजना का उद्देश्य केवल अस्थायी उपाय करना नहीं, बल्कि आधुनिक बुनियादी ढांचे, उन्नत तकनीक, स्मार्ट मीटरिंग और रियल-टाइम मॉनिटरिंग के माध्यम से जल आपूर्ति, सीवरेज और जलभराव जैसी समस्याओं का स्थायी समाधान निकालना है।
दिल्ली के पुराने इंफ्रास्ट्रक्चर को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़ना ही शहर को डूबने से बचाने का एकमात्र रास्ता है।
इस बीच, लोक निर्माण विभाग (PWD) मंत्री परवेश साहिब सिंह ने स्थिति का विश्लेषण करते हुए कहा कि पिछले वर्षों की तुलना में जलभराव की घटनाओं और हॉटस्पॉट में कमी आई है। उन्होंने बताया कि ट्रैफिक पुलिस ने 2025 में 169 जलभराव वाले स्थानों की पहचान की थी, जिनमें से 60 स्थानों पर सुधार कार्य वर्तमान में चल रहा है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि दिल्ली जैसे महानगर के लिए जलभराव केवल एक मौसम संबंधी समस्या नहीं, बल्कि एक गंभीर शहरी नियोजन (Urban Planning) की चुनौती है। यदि ड्रेनेज सिस्टम को समय रहते अपग्रेड नहीं किया गया, तो जलवायु परिवर्तन के कारण होने वाली अत्यधिक बारिश भविष्य में शहर की अर्थव्यवस्था और जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर सकती है।
मंत्री सिंह ने एक महत्वपूर्ण बिंदु स्पष्ट करते हुए कहा कि यदि जमा हुआ पानी 30 मिनट के भीतर निकल जाता है, तो उसे तकनीकी रूप से 'जलभराव' नहीं माना जाता। जलभराव की श्रेणी तब आती है जब पानी एक से दो घंटे तक जमा रहे। उन्होंने आश्वासन दिया कि बड़े नालों का निर्माण किया जा रहा है और मास्टर प्लान के तहत काम पूरा होने के बाद शहर में बड़े पैमाने पर जलभराव की समस्या नहीं दिखेगी।
Frequently Asked Questions
1. दिल्ली सरकार जलभराव रोकने के लिए कितना बजट खर्च कर रही है?
सरकार ₹56,000 करोड़ के ड्रेनेज मास्टर प्लान के माध्यम से बुनियादी ढांचे में सुधार कर रही है।
2. क्या जलभराव के हॉटस्पॉट पर काम किया जा रहा है?
हाँ, 169 पहचाने गए हॉटस्पॉट्स में से 60 पर वर्तमान में सक्रिय रूप से कार्य किया जा रहा है।