दक्षिण कन्नड़ सांसद कैप्टन बृजेश चोवटा ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री से मंगलुरु रेलवे क्षेत्र को दक्षिण पश्चिमी रेलवे (SWR) के तहत लाने के केंद्र सरकार के फैसले का समर्थन करने का आग्रह किया है।

  • रेल मंत्रालय ने मंगलुरु को दक्षिणी रेलवे के पलक्कड़ डिवीजन से हटाकर SWR के मैसूरु डिवीजन में शामिल करने का निर्णय लिया है।
  • सांसद कैप्टन बृजेश चोवटा ने मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार से इस निर्णय का औपचारिक समर्थन करने की मांग की है।
  • इस बदलाव से मंगलुरु-हसन-मैसूरु कॉरिडोर के माध्यम से बुनियादी ढांचे और माल ढुलाई में सुधार की उम्मीद है।

दक्षिण कन्नड़ के सांसद कैप्टन बृजेश चोवटा ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को एक पत्र लिखकर रेलवे मंत्रालय के उस ऐतिहासिक निर्णय का समर्थन करने का आग्रह किया है, जिसके तहत मंगलुरु को दक्षिणी रेलवे के पलक्कड़ डिवीजन से स्थानांतरित कर दक्षिण पश्चिमी रेलवे (SWR) के मैसूरु डिवीजन के अंतर्गत लाया जा रहा है। चोवटा ने कहा कि यह निर्णय 2023 में SWR के गठन के बाद से इस क्षेत्र के लोगों की लंबे समय से चली आ रही आकांक्षाओं की पूर्ति है।

वर्तमान में, इस मुद्दे पर राजनीतिक खींचतान शुरू हो गई है। जहाँ केरल के मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता वी.डी. सतीशन इस बदलाव का कड़ा विरोध कर रहे हैं, वहीं कर्नाटक सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाए जा रहे हैं। चोवटा ने तर्क दिया कि यह पड़ोसी राज्य के खिलाफ होने वाली बात नहीं है, बल्कि मंगलुरु की विकासात्मक आवश्यकताओं और रेलवे प्रशासन के लिए कर्नाटक के हितों को केंद्र के समक्ष मजबूती से रखना है।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह प्रशासनिक बदलाव केवल कागजी नहीं है, बल्कि इसके गहरे आर्थिक और रणनीतिक निहितार्थ हैं। मंगलुरु कर्नाटक का प्रमुख समुद्री द्वार है। न्यू मंगलौर पोर्ट राज्य के औद्योगिक और वाणिज्यिक क्षेत्र के लिए जीवन रेखा है, जो माल की आवाजाही के लिए रेल कनेक्टिविटी पर अत्यधिक निर्भर है।

जब मंगलुरु को मैसूरु डिवीजन के साथ एकीकृत किया जाएगा, तो मंगलुरु-हसन-मैसूरु अक्ष को एक एकीकृत यात्री और माल ढुलाई गलियारे के रूप में विकसित किया जा सकेगा। इससे तटीय क्षेत्र और राज्य के आंतरिक हिस्सों के बीच बेहतर कनेक्टिविटी सुनिश्चित होगी।

यह निर्णय तटीय कर्नाटक और राज्य के भीतरी इलाकों के बीच एक निर्बाध आर्थिक सेतु बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है।

सांसद चोवटा ने याद दिलाया कि मैसूरु डिवीजन पहले से ही हसन-मंगलुरु खंड का प्रशासन संभाल रहा है। इस एकीकरण से घाट खंड और तटीय टर्मिनलों का नियोजन और प्रबंधन अधिक समन्वित तरीके से किया जा सकेगा, जिससे परिचालन दक्षता में वृद्धि होगी।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

दक्षिण पश्चिमी रेलवे (SWR) का गठन 2023 में किया गया था, जिसका उद्देश्य कर्नाटक के रेल नेटवर्क को अधिक सुव्यवस्थित करना था। मंगलुरु को SWR के तहत लाने की मांग दशकों पुरानी रही है, क्योंकि वर्तमान में पलक्कड़ डिवीजन (केरल स्थित) के तहत होने के कारण स्थानीय विकास कार्यों में समन्वय की कमी महसूस की जाती थी।

क्या आप जानते हैं?: मंगलुरु का न्यू मंगलौर पोर्ट भारत के सबसे महत्वपूर्ण पश्चिमी तट के बंदरगाहों में से एक है, जो भारी मात्रा में कच्चे तेल और कोयले का आयात करता है।

Frequently Asked Questions

1. मंगलुरु को किस डिवीजन से स्थानांतरित किया जा रहा है?
मंगलुरु को दक्षिणी रेलवे के पलक्कड़ डिवीजन से हटाकर दक्षिण पश्चिमी रेलवे (SWR) के मैसूरु डिवीजन में स्थानांतरित किया जा रहा है।

2. इस बदलाव का कर्नाटक को क्या लाभ होगा?
इससे मंगलुरु-हसन-मैसूरु कॉरिडोर का बेहतर विकास होगा और तटीय क्षेत्र एवं राज्य के आंतरिक भागों के बीच माल ढुलाई और यात्री कनेक्टिविटी सुधरेगी।