जम्मू-कश्मीर ने केंद्र के एग्रीस्टैक (AgriStack) ढांचे के साथ एकीकरण के लिए 70 लाख भूमि भूखंडों का डिजिटलीकरण पूरा कर लिया है, जिससे 13 लाख से अधिक त्रुटियों को ठीक किया गया है।
- 70 लाख भूमि भूखंडों का एग्रीस्टैक एकीकरण के लिए डिजिटलीकरण और अद्यतन किया गया।
- सार्वजनिक जांच और सत्यापन के माध्यम से 13 लाख से अधिक विसंगतियों को दूर किया गया।
- डेटा सटीकता के लिए 'मेकर-चेकर-अप्रूवर' तीन-स्तरीय तंत्र लागू।
- सब्सिडी और ऋण के सीधे वितरण के लिए e-KYC के माध्यम से फार्मर आईडी का निर्माण।
राजस्व प्रशासन के आधुनिकीकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए, जम्मू-कश्मीर ने लगभग 70 लाख भूमि भूखंडों के डिजिटलीकरण और सत्यापन की प्रक्रिया को तेज कर दिया है। यह पहल केंद्र सरकार के डिजिटल इंडिया लैंड रिकॉर्ड्स मॉडर्नाइजेशन प्रोग्राम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसका उद्देश्य एक पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित डेटाबेस बनाना है जो एग्रीस्टैक (AgriStack) ढांचे के साथ एकीकृत हो सके।
BISAG-N के सहयोग से संचालित यह अभ्यास केवल पुराने रिकॉर्ड्स की स्कैनिंग तक सीमित नहीं है। इसमें रिकॉर्ड्स का अद्यतनीकरण, सार्वजनिक जांच और प्रमाणीकरण शामिल है। इस कार्य के लिए 2,500 से अधिक राजस्व क्षेत्र कार्या员ों को भूमिका-आधारित पहुंच दी गई है, ताकि डेटा प्रविष्टि और सत्यापन में पूर्ण सटीकता सुनिश्चित की जा सके।
यह क्यों महत्वपूर्ण है?
BozokMedia के विश्लेषण के अनुसार, यह डिजिटलीकरण केवल एक लिपिकीय अपडेट नहीं बल्कि शासन में एक संरचनात्मक बदलाव है। पारंपरिक जमाबंदियों को मशीन-पठनीय प्रारूप में बदलकर, सरकार 'बिचौलिया संस्कृति' को समाप्त कर रही है। एक ही खसरा में कई सह-मालिकों के सटीक हिस्से को निर्धारित करने की क्षमता इस क्षेत्र में भूमि विवादों को काफी कम कर देगी।
डेटा की अखंडता बनाए रखने के लिए, एक सख्त तीन-स्तरीय सत्यापन प्रणाली लागू की गई है। इसमें पटवारी डेटा प्रविष्टि (मेकर) करता है, गिरदावर और नायब तहसीलदार उसका सत्यापन (चेकर) करते हैं, और अंत में तहसीलदार अंतिम मंजूरी (अप्रूवर) देते हैं। यह इलेक्ट्रॉनिक ऑडिट ट्रेल हर स्तर पर जवाबदेही तय करता है।
"भौतिक रजिस्टरों से सत्यापित डिजिटल एग्रीस्टैक की ओर संक्रमण यह सुनिश्चित करने के लिए सबसे महत्वपूर्ण कदम है कि कृषि सब्सिडी बिना किसी रिसाव के वास्तविक किसान तक पहुंचे।"
इस सफलता में जनभागीदारी की मुख्य भूमिका रही। 6,800 से अधिक ग्राम-स्तरीय शिविर आयोजित किए गए, जहाँ भू-धारकों ने अपनी जमाबंदियों की जांच की और त्रुटियों की पहचान की। इसके परिणामस्वरूप 13 लाख विसंगतियों को ठीक किया गया और 7 लाख लंबित नामांतरणों (mutations) को रिकॉर्ड ऑफ राइट्स में शामिल किया गया। अब JK ज़मीन सुधार पोर्टल के माध्यम से नागरिक अपने रिकॉर्ड ऑनलाइन देख सकते हैं।
इस मिशन का अंतिम चरण फार्मर आईडी (Farmer ID) का निर्माण है। e-KYC और स्वैच्छिक इलेक्ट्रॉनिक सहमति के माध्यम से, किसानों का सत्यापन किया जा रहा है, जो उन्हें जियो-रेफरेंस्ड विलेज मैप और क्रॉप सोन रजिस्ट्री से जोड़ेगा। इससे बीमा, ऋण और आपदा राहत जैसी सेवाओं का वितरण अधिक कुशल होगा।
| विशेषता | पारंपरिक प्रणाली | डिजिटाइज्ड एग्रीस्टैक प्रणाली |
|---|---|---|
| पहुंच | पटवारी/तहसील कार्यालय के चक्कर | JK ज़मीन सुधार पोर्टल द्वारा ऑनलाइन |
| सत्यापन | मैनुअल लेजर चेकिंग | तीन-स्तरीय इलेक्ट्रॉनिक ऑडिट ट्रेल |
| लाभ वितरण | कागजी आवेदन प्रक्रिया | फार्मर आईडी और e-KYC के माध्यम से सीधा लाभ |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. एग्रीस्टैक (AgriStack) ढांचा क्या है?
यह केंद्र सरकार द्वारा एक डिजिटल आर्किटेक्चर है जिसमें फार्मर्स रजिस्ट्री, जियो-रेफरेंस्ड मैप और फसल रजिस्ट्री शामिल है ताकि कृषि सेवाओं को सरल बनाया जा सके।
2. जम्मू-कश्मीर का किसान अपने भूमि रिकॉर्ड कैसे देख सकता है?
भू-धारक आधिकारिक 'JK ज़मीन सुधार पोर्टल' के माध्यम से अपने अद्यतन और सत्यापित भूमि रिकॉर्ड देख सकते हैं।