कर्नाटक सरकार मानसून की कमी को देखते हुए ₹27 करोड़ की लागत से कृत्रिम बारिश (क्लाउड सीडिंग) अभियान शुरू करने जा रही है। यह योजना अगले कुछ दिनों में शुरू होगी और इसमें 60 दिनों तक विमानों का संचालन किया जाएगा।

  • कुल बजट ₹27 करोड़ है और अभियान 60 दिनों तक चलेगा।
  • लक्ष्य 30% सफलता दर प्राप्त करना है, जो पिछले प्रयासों से अधिक है।
  • IISc और IIT जैसे संस्थानों के वैज्ञानिक तकनीकी निगरानी करेंगे।

कर्नाटक में मानसून की कमी और संभावित जल संकट को देखते हुए, राज्य सरकार ने एक महत्वाकांक्षी ₹27-करोड़ की क्लाउड सीडिंग (कृत्रिम वर्षा) पहल शुरू करने का निर्णय लिया है। सिंचाई मंत्री एन. चेल्लुरैयास्वामी के अनुसार, तकनीकी और प्रशासनिक मंजूरियां मिल जाने के बाद यह अभियान अगले तीन दिनों के भीतर शुरू हो जाएगा।

यह व्यापक अभियान 60 दिनों की अवधि में फैला होगा, जिसमें कुल 200 उड़ान घंटे शामिल हैं। योजना के अनुसार, विमानों का संचालन सुबह 8 बजे से शाम 6 बजे के बीच किया जाएगा, ताकि घने बादलों के बीच प्रभावी ढंग से सीडिंग की जा सके। सरकार ने सितंबर महीने को सबसे उपयुक्त माना है क्योंकि इस दौरान बादलों का घनत्व अधिक रहता है, जबकि अक्टूबर तक बादलों की मात्रा में भारी गिरावट आने की संभावना है।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows कि कर्नाटक जैसे कृषि प्रधान राज्य के लिए जल सुरक्षा सर्वोपरि है। मानसून की अनिश्चितता सीधे तौर पर खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को प्रभावित करती है। क्लाउड सीडिंग जैसी तकनीक का उपयोग यह दर्शाता है कि सरकार अब जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने के लिए आधुनिक विज्ञान का सहारा ले रही है।

ऐतिहासिक रूप से, कर्नाटक ने पहले तीन बार क्लाउड सीडिंग का प्रयास किया है, जिसमें सफलता दर 18% से 20% के बीच रही थी। हालांकि, इस बार सरकार ने अपनी रणनीति में सुधार किया है और 30% सफलता दर का लक्ष्य रखा है। यह अभियान राज्य के सभी चार राजस्व विभाजनों में फैला होगा, जहाँ विमानों को वास्तविक समय के मौसम के आधार पर तैनात किया जाएगा।

कृत्रिम वर्षा की सफलता पूरी तरह से बादलों के घनत्व और वायुमंडलीय स्थितियों पर निर्भर करती है।

इस मिशन की जटिलता को देखते हुए, सरकार ने तीन अलग-अलग समितियां गठित की हैं। एक निगरानी समिति नीतिगत कार्यान्वयन देखेगी, जबकि एक तकनीकी समिति जिसमें IISc, IIT और IMD के वैज्ञानिक शामिल हैं, मौसम संबंधी मापदंडों की निगरानी करेगी। इसके अलावा, एक फील्ड ऑपरेशन समिति दैनिक उड़ानों और बारिश के जमीनी प्रभाव का आकलन करेगी।

Did You Know?: क्लाउड सीडिंग में अक्सर सिल्वर आयोडाइड या शुष्क बर्फ का उपयोग किया जाता है ताकि बादलों के कणों को भारी बनाकर बारिश में बदला जा सके।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: क्लाउड सीडिंग क्या है?
उत्तर: यह एक मौसम संशोधन तकनीक है जिसमें बादलों में विशेष रसायन छिड़के जाते हैं ताकि वे बारिश कर सकें।

प्रश्न 2: कर्नाटक में यह अभियान कितने दिनों तक चलेगा?
उत्तर: यह अभियान कुल 60 दिनों तक चलेगा, जिसमें 200 घंटों की उड़ान शामिल है।