महाराष्ट्र सरकार ने निजी कोचिंग सेंटरों के पंजीकरण और विनियमन के लिए एक नया ड्राफ्ट बिल पेश किया है। इसका मुख्य उद्देश्य छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य की रक्षा करना और शिक्षा की गुणवत्ता सुनिश्चित करना है।

  • कोचिंग सेंटरों के लिए अनिवार्य पंजीकरण और नवीनीकरण की व्यवस्था।
  • स्कूलों और कोचिंग सेंटरों के बीच अनैतिक गठजोड़ (Nexus) पर पूर्ण प्रतिबंध।
  • छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए काउंसलर और साप्ताहिक अवकाश अनिवार्य।
  • बेसमेंट में कोचिंग चलाने और 13 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के नामांकन पर रोक।

महाराष्ट्र सरकार ने राज्य में निजी कोचिंग संस्थानों की मनमानी को रोकने के लिए 'महाराष्ट्र निजी कोचिंग केंद्र (पंजीकरण और विनियमन) विधेयक, 2026' का मसौदा जारी किया है। यह कदम विशेष रूप से NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले के बाद उठाया गया है, जिसने शिक्षा जगत में पारदर्शिता और नैतिकता पर गंभीर सवाल खड़े किए थे।

प्रस्तावित विधेयक के अनुसार, अब किसी भी कोचिंग संस्थान को संचालित करने के लिए सरकार द्वारा निर्धारित औपचारिकताओं को पूरा करना होगा। इसमें न्यूनतम 25 छात्रों की संख्या वाला कोई भी केंद्र पंजीकरण के दायरे में आएगा। विधेयक में स्पष्ट किया गया है कि कोई भी कोचिंग केंद्र ऐसे शिक्षक को नियुक्त नहीं करेगा जिसकी योग्यता स्नातक (Graduation) से कम हो। साथ ही, नामांकन के लिए भ्रामक वादे करने पर सख्त कार्रवाई का प्रावधान है।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows कि यह विधेयक केवल प्रशासनिक नियंत्रण के बारे में नहीं है, बल्कि यह 'कोचिंग संस्कृति' से उत्पन्न होने वाले मानसिक दबाव को कम करने का एक प्रयास है। कोचिंग सेंटरों द्वारा छात्रों पर डाले जाने वाले अत्यधिक दबाव और 'मेरिट-आधारित बैच' के भेदभाव को समाप्त कर सरकार एक समावेशी शैक्षिक वातावरण बनाना चाहती है।

सुरक्षा मानकों पर विशेष जोर देते हुए, बिल में प्रत्येक छात्र के लिए 1 वर्ग मीटर जगह, अग्निशमन प्रमाण पत्र, सीसीटीवी (1 महीने का फुटेज) और स्वच्छ पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं को अनिवार्य किया गया है। इसके अलावा, कोर्स के बीच में फीस बढ़ाने पर रोक लगाई गई है और छात्र के नाम वापस लेने पर 10 दिनों के भीतर रिफंड देना अनिवार्य होगा।

"कोचिंग सेंटरों का विनियमन केवल कानूनी आवश्यकता नहीं, बल्कि छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और शिक्षा के व्यवसायीकरण को रोकने के लिए एक नैतिक अनिवार्यता है।"

हालांकि, इस कदम का निजी कोचिंग संस्थानों के संघ ने कड़ा विरोध किया है। संघ का तर्क है कि यह कानून 'दमनकारी' और 'अवास्तविक' है। विशेष रूप से उन गृहणियों के लिए चिंता जताई गई है जो अपने घरों से छोटे स्तर पर ट्यूशन पढ़ाती हैं। संघ का मानना है कि मामूली गलतियों पर 1 से 5 लाख रुपये का जुर्माना भ्रष्टाचार को बढ़ावा दे सकता है।

ऐतिहासिक रूप से, महाराष्ट्र इस दिशा में कदम उठाने वाले पांचवां राज्य बन गया है। इससे पहले हरियाणा, राजस्थान, असम और झारखंड जैसे राज्यों ने कोचिंग सेंटरों के विनियमन के लिए कानून बनाए थे। केंद्र सरकार ने भी जनवरी 2024 में '100% चयन' जैसे भ्रामक दावों पर रोक लगाने के दिशा-निर्देश जारी किए थे।

क्या आप जानते हैं?: महाराष्ट्र के कोचिंग संघ से लगभग 50,000 संस्थान जुड़े हुए हैं, जिनमें करीब 5 से 6 लाख छात्र नामांकित हैं।
विशेषतापुराना सिस्टम (अनियंत्रित)नया प्रस्तावित नियम (विनियमित)
पंजीकरणअनिवार्य नहीं थाअनिवार्य (3 साल की वैधता)
फीस वृद्धिसंस्थान की मर्जीमिड-कोर्स वृद्धि प्रतिबंधित
मानसिक स्वास्थ्यकोई प्रावधान नहींकाउंसलर और साप्ताहिक अवकाश अनिवार्य
सुरक्षा मानकविविध/लापरवाहCCTV, फायर सेफ्टी और स्पेस मानक अनिवार्य

Frequently Asked Questions

1. क्या यह कानून छोटे होम-ट्यूशन पर भी लागू होगा?
विधेयक के अनुसार, 25 या उससे अधिक छात्रों वाले केंद्रों को पंजीकरण करना होगा, लेकिन संघ ने छोटे ट्यूशन चलाने वालों के लिए छूट की मांग की है।

2. यदि कोई संस्थान नियमों का उल्लंघन करता है तो क्या होगा?
नियमों के उल्लंघन पर 1 लाख से 5 लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान प्रस्तावित है।