लद्दाख में पिछले साल हुई हिंसा की पहली बरसी से ठीक पहले, गृह मंत्रालय ने सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के लिए 12 CRPF कंपनियों को तैनात करने का आदेश दिया है। यह कदम राज्य के दर्जा और छठी अनुसूची की मांगों को लेकर बढ़ते असंतोष के बीच उठाया गया है।
- गृह मंत्रालय ने 31 अगस्त से 30 सितंबर तक लद्दाख में 12 CRPF कंपनियों की तैनाती का आदेश दिया है।
- इनमें दो कंपनियां दंगों से निपटने वाली विशेष 'रैपिड एक्शन फोर्स' (RAF) की हैं।
- यह तैनाती पिछले साल 24 सितंबर को हुई घातक हिंसा की पहली बरसी के दौरान सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए है।
- लेह एपेक्स बॉडी (LAB) ने हिंसा के पीड़ितों के लिए न्याय मांगने हेतु 'शहीद माह' मनाने की घोषणा की है।
नई दिल्ली: केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में शांति बनाए रखने के लिए केंद्र सरकार ने कड़े कदम उठाए हैं। गृह मंत्रालय (MHA) ने 31 अगस्त से एक महीने की अवधि के लिए 12 CRPF कंपनियों की तैनाती का आदेश दिया है। यह निर्णय लद्दाख में पिछले साल हुई हिंसक झड़पों की पहली वर्षगांठ के मद्देनजर लिया गया है, जिसने पूरे क्षेत्र में राजनीतिक और सामाजिक अस्थिरता पैदा कर दी थी।
सूत्रों के अनुसार, इस तैनाती में दो कंपनियां रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) की हैं, जिसे विशेष रूप से दंगों और नागरिक अशांति को नियंत्रित करने के लिए प्रशिक्षित किया गया है। प्रशासन इसे एक "एहतियाती कदम" बता रहा है, क्योंकि लद्दाख में राज्य के दर्जे और छठी अनुसूची की मांग को लेकर असंतोष अभी भी गहरा है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि लद्दाख की रणनीतिक स्थिति, जो चीन के साथ सीमा साझा करती है, वहां आंतरिक शांति को अत्यंत महत्वपूर्ण बनाती है। यदि स्थानीय आबादी और केंद्र के बीच संवाद की कमी बनी रहती है, तो यह न केवल कानून-व्यवस्था बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी चुनौती बन सकता है।
लद्दाख में CRPF की तैनाती केवल कानून-व्यवस्था का मामला नहीं है, बल्कि यह राज्य के दर्जे की मांग करने वाले स्थानीय समूहों और केंद्र के बीच बढ़ते विश्वास की कमी का संकेत है।
गौरतलब है कि पिछले साल 24 सितंबर को लेह में हुए विरोध प्रदर्शनों के दौरान हिंसा भड़क गई थी, जिसमें चार स्थानीय लोगों की मौत हो गई थी और दर्जनों घायल हुए थे। यह हिंसा तब शुरू हुई थी जब लेह एपेक्स बॉडी (LAB) के कार्यकर्ता छठी अनुसूची और पूर्ण राज्य के दर्जे की मांग को लेकर भूख हड़ताल पर बैठे थे। इस आंदोलन का नेतृत्व प्रसिद्ध जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक कर रहे थे, जिन्हें बाद में राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत हिरासत में लिया गया था।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
लद्दाख को 2019 में जम्मू-कश्मीर से अलग कर एक केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया था। तब से, स्थानीय नेता और संगठन अपनी सांस्कृतिक पहचान की रक्षा और स्वायत्तता के लिए संघर्ष कर रहे हैं। मांग की जा रही है कि लद्दाख को छठी अनुसूची के तहत सुरक्षा दी जाए ताकि वहां की भूमि और नौकरियों पर स्थानीय लोगों का नियंत्रण रहे।
Frequently Asked Questions
1. CRPF की तैनाती का मुख्य कारण क्या है?
मुख्य कारण पिछले साल हुई हिंसा की पहली बरसी के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखना और संभावित विरोध प्रदर्शनों को नियंत्रित करना है।
2. सोनम वांगचुक का मामला क्या है?
सोनम वांगचुक लद्दाख के लिए राज्य के दर्जे की मांग कर रहे थे और उन्हें हिरासत में लिया गया था, हालांकि बाद में MHA ने उनकी हिरासत समाप्त कर दी थी।