उत्तर प्रदेश सरकार ने वरिष्ठ नागरिकों के संरक्षण के लिए नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब बुजुर्ग अपने बच्चों को संपत्ति से बेदखल कर सकेंगे यदि वे उनकी देखभाल नहीं करते हैं।

  • बुजुर्गों को संपत्ति से बेदखल करने की प्रक्रिया अब समयबद्ध होगी।
  • शिकायत दर्ज करने के लिए एक समर्पित टोल-फ्री नंबर लॉन्च किया जाएगा।
  • जिला मजिस्ट्रेट को मासिक रिपोर्ट सौंपनी होगी।
  • शिकायतों का निपटारा 30 दिनों के भीतर किया जाएगा।

लखनऊ: उत्तर प्रदेश कैबिनेट ने मंगलवार को एक ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए 'उत्तर प्रदेश माता-पिता और वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण एवं कल्याण नियम, 2014' में संशोधन को मंजूरी दे दी है। इस नए संशोधन का मुख्य उद्देश्य बुजुर्गों को उनके जीवन के अंतिम पड़ाव में सम्मान और सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने मीडिया को संबोधित करते हुए बताया कि यदि बच्चे अपने माता-पिता की उचित देखभाल नहीं करते हैं या उनके साथ किसी भी प्रकार का दुर्व्यवहार करते हैं, तो अब माता-पिता के पास उन्हें अपनी संपत्ति से बेदखल करने का अधिक प्रभावी और कानूनी रूप से सशक्त अधिकार होगा।

क्यों महत्वपूर्ण है यह निर्णय?

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह कानून केवल संपत्ति के बारे में नहीं है, बल्कि यह समाज में बुजुर्गों के प्रति जवाबदेही तय करने का एक सशक्त माध्यम है। अक्सर देखा जाता है कि संपत्ति मिलने के बाद संतानें अपने माता-पिता को उपेक्षित कर देती हैं। यह संशोधन इस प्रवृत्ति पर लगाम लगाएगा।

यह कानून वरिष्ठ नागरिकों को केवल आर्थिक सुरक्षा ही नहीं, बल्कि सामाजिक गरिमा भी प्रदान करेगा।

नए नियमों के तहत, प्रक्रिया को पारदर्शी और त्वरित बनाने के लिए इसे 'टाइम-बाउंड' (समयबद्ध) बनाया गया है। वरिष्ठ नागरिक अपनी शिकायतें सीधे जिला मजिस्ट्रेट (DM) को दे सकते हैं। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि ऐसी शिकायतों पर 30 दिनों के भीतर सुनवाई और कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। इसके अतिरिक्त, तत्काल सहायता के लिए एक विशेष टोल नंबर भी शुरू किया जाएगा।

न्यायिक प्रशासन में सुधार

बुजुर्गों के कल्याण के साथ-साथ, कैबिनेट ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने के लिए 'कोर्ट मैनेजर्स सेंट्रलइज्ड सर्विस रूल्स, 2026' के मसौदे को भी मंजूरी दी है। इसके तहत राज्य के उच्च न्यायालय और जिला न्यायालयों में 81 कोर्ट मैनेजरों की नियुक्ति की जाएगी।

इन कोर्ट मैनेजरों का वेतनमान 56,100 रुपये से 1,77,500 रुपये के बीच निर्धारित किया गया है। इनका मुख्य कार्य न्यायिक अधिकारियों के प्रशासनिक बोझ को कम करना और अदालतों के प्रबंधन को अधिक प्रभावी बनाना होगा।

क्या आप जानते हैं?: उत्तर प्रदेश के इस नए नियम का उद्देश्य परिवार के भीतर बुजुर्गों के प्रति सम्मान और देखभाल की संस्कृति को पुनर्जीवित करना है।

Frequently Asked Questions

1. यदि बच्चे माता-पिता का ख्याल नहीं रखते हैं, तो क्या वे संपत्ति ले सकते हैं?
नहीं, नए नियमों के तहत माता-पिता को अधिकार है कि वे उपेक्षा या दुर्व्यवहार की स्थिति में बच्चों को संपत्ति से बेदखल कर दें।

2. शिकायत दर्ज करने के लिए क्या प्रक्रिया है?
वरिष्ठ नागरिक जिला मजिस्ट्रेट को शिकायत कर सकते हैं या सरकार द्वारा जारी किए जाने वाले हेल्पलाइन टोल नंबर का उपयोग कर सकते हैं।