अरुणाचलेश्वरर मंदिर के पास स्थित 18 गांवों के निवासियों ने नगर निगम में विलय के निर्णय का विरोध करते हुए टैक्स वृद्धि और सुविधाओं की कमी का मुद्दा उठाया है।

  • गिरिवलम् पथ के 18 ग्रामीण गांवों ने नगर निगम में विलय के प्रस्ताव को वापस लेने की मांग की है।
  • ग्रामीणों का आरोप है कि टैक्स बढ़ने के बावजूद उन्हें बुनियादी नागरिक सुविधाएं नहीं मिल रही हैं।
  • विलय के कारण मनरेगा (MGNREGA) जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं का लाभ भी छिन गया है।

तिरुवन्नामलई: प्रसिद्ध अरुणाचलेश्वरर मंदिर के पास स्थित गिरिवलम् पथ के आसपास रहने वाले 18 गांवों के निवासियों ने एक बड़ा विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। ग्रामीणों ने तिरुवन्नामलई नगर निगम से मांग की है कि इन कृषि प्रधान गांवों को नगर निगम के विस्तारित क्षेत्रों में शामिल करने के निर्णय को तुरंत वापस लिया जाए।

मंगलवार को, प्रभावित गांवों के प्रतिनिधियों ने नगर निगम आयुक्त के. बालसुब्रमण्यन से मुलाकात की और अपनी समस्याओं को विस्तार से रखा। ग्रामीणों का मुख्य तर्क यह है कि नगर निगम में शामिल होने के बाद से उनके संपत्ति कर, जल कर और अन्य बुनियादी सुविधाओं के शुल्क में भारी वृद्धि हुई है, लेकिन बदले में उन्हें मिलने वाली नागरिक सुविधाएं अभी भी अत्यंत निम्न स्तर पर हैं।

बढ़ता कर, घटती सुविधाएं

ग्रामीणों का कहना है कि वे शहर के मुख्य क्षेत्रों के समान उच्च करों का भुगतान कर रहे हैं, लेकिन उनके गांवों में आज भी बेहतर सड़कें, पाइप से पानी की आपूर्ति, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, भूमिगत जल निकासी और स्ट्रीटलाइट जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। प्रभावित गांवों में आदि अन्नामलाई, एंडल, नोचिमलाई, देवनांदल, नवलनपालयम, चिन्नकांगियानूर, वेगाइकल, अडयुर, सवलपुंडी और अतियंडल जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्र शामिल हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि शहरीकरण के नाम पर केवल उनकी जेब खाली की जा रही है, विकास के नाम पर कुछ नहीं मिल रहा।

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह मामला शहरी विस्तार और ग्रामीण आजीविका के बीच बढ़ते संघर्ष को दर्शाता है। कृषि प्रधान गांवों को शहरी निकाय में शामिल करने से उनकी आर्थिक संरचना पूरी तरह बदल जाती है, जो अक्सर उनके खिलाफ जाती है।

मनरेगा और आजीविका का संकट

विलय का सबसे गंभीर प्रभाव स्थानीय श्रमिकों की आजीविका पर पड़ा है। ग्रामीणों ने बताया कि नगर निगम का हिस्सा बनने के बाद, वे मनरेगा (MGNREGA) योजना के तहत मिलने वाले रोजगार से वंचित हो गए हैं। कृषि कार्यों के पूरक के रूप में कई श्रमिक तालाबों की खुदाई और जलमार्गों के निर्माण के लिए इस योजना पर निर्भर थे, लेकिन अब शहरी श्रेणी में आने के कारण वे इस सुरक्षा कवच से बाहर हो गए हैं।

नगर निगम अधिकारियों का तर्क है कि लगभग 20 गांवों को नगर निगम में इसलिए शामिल किया गया है ताकि अंतरराष्ट्रीय बैंकों से बुनियादी ढांचे के विकास के लिए अतिरिक्त धन प्राप्त किया जा सके। वर्तमान में, इस निगम की जनसंख्या लगभग 1.46 लाख है जो 39 वार्डों में फैली हुई है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

तिरुवन्नामलई एक प्रमुख तीर्थ स्थल है, जहाँ 'गिरिवलम्' (पर्वत की परिक्रमा) की परंपरा सदियों पुरानी है। इस मार्ग के आसपास के गांव पारंपरिक रूप से कृषि और मंदिर से जुड़े व्यापार पर निर्भर रहे हैं। शहरीकरण की प्रक्रिया इन ऐतिहासिक और आर्थिक पैटर्न को बाधित कर रही है।

Frequently Asked Questions

1. ग्रामीण नगर निगम में विलय का विरोध क्यों कर रहे हैं?
ग्रामीणों का कहना है कि विलय से टैक्स तो बढ़ गया है, लेकिन उन्हें सड़क, पानी और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं मिल रही हैं और वे मनरेगा का लाभ भी खो चुके हैं।

2. नगर निगम ने इन गांवों को क्यों शामिल किया?
अधिकारियों के अनुसार, निगम का विस्तार करने और अंतरराष्ट्रीय बैंकों से बुनियादी ढांचे के लिए फंड जुटाने के उद्देश्य से इन गांवों को शामिल किया गया है।