केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति सम्मेलन में भारत के लिए एक भविष्योन्मुखी सुरक्षा प्रणाली बनाने का आह्वान किया है, जो संभावित खतरों को 20 साल पहले ही पहचान सके। उन्होंने 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए मजबूत आंतरिक सुरक्षा को अनिवार्य बताया है।
- खतरों को रोकने के लिए 'रिएक्टिव' के बजाय 'प्रेडिक्टिव' सुरक्षा मॉडल की आवश्यकता।
- नारकोटिक्स के खिलाफ 'Detect, Disrupt, Destroy' (पता लगाएं, बाधित करें, नष्ट करें) की रणनीति।
- आतंकवाद के खिलाफ 'प्रहार' दृष्टिकोण को जमीनी स्तर तक लागू करने का निर्देश।
- सीमा सुरक्षा और घुसपैठ रोकने के लिए चार-स्तरीय रणनीति पर जोर।
नई दिल्ली में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति सम्मेलन (NSSC) के समापन सत्र में केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह ने भारत की सुरक्षा व्यवस्था में एक क्रांतिकारी बदलाव का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारत को ऐसी सुरक्षा प्रणाली विकसित करनी चाहिए जो उभरते खतरों को 15 से 20 साल पहले ही पहचान सके और उन्हें बड़ी चुनौती बनने से पहले ही कुचल सके।
शाह ने जोर देकर कहा कि सुरक्षा नीति केवल वर्तमान खतरों से निपटने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि इसे अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय रुझानों का अध्ययन कर भविष्य की समस्याओं का पूर्वानुमान लगाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य तभी पूरा हो सकता है जब देश में एक अत्यंत मजबूत और स्थिर आंतरिक सुरक्षा वातावरण हो।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, भारत का सुरक्षा दृष्टिकोण अब 'प्रतिक्रियात्मक' (Reactive) से बदलकर 'पूर्वानुमानित' (Predictive) होने जा रहा है। यह बदलाव वैश्विक भू-राजनीति और बदलती तकनीक के युग में भारत की संप्रभुता को बनाए रखने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि सुरक्षा एजेंसियां भविष्य के खतरों के लिए आज ही तैयारी नहीं करती हैं, तो भविष्य में निपटने की लागत और मानवीय क्षति कहीं अधिक होगी।
सुरक्षा एजेंसियों को 'पहले पहचानें, फिर कार्रवाई करें' के सिद्धांत को संस्थागत बनाना होगा ताकि भविष्य के संकटों को पनपने से रोका जा सके।
अमित शाह ने नक्सलवाद, नार्कोटिक तस्करी और पूर्वोत्तर की चुनौतियों का उदाहरण देते हुए कहा कि यदि पिछली सरकारों ने इन समस्याओं को उनके शुरुआती चरणों में ही देख लिया होता, तो दशकों तक चलने वाली चुनौतियों से बचा जा सकता था। उन्होंने केंद्र और राज्य पुलिस बलों के बीच बेहतर समन्वय का आह्वान किया ताकि सुरक्षा के नए मोर्चों पर जीत हासिल की जा सके।
आतंकवाद और नार्कोटिक्स के खिलाफ कठोर रुख
आतंकवाद के विरुद्ध उन्होंने 'प्रहार' (Prahar) अवधारणा को केवल कागजों तक सीमित न रखकर इसे दैनिक पुलिसिंग का हिस्सा बनाने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई केवल आतंकवादियों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि उनके पूरे नेटवर्क—फंडिंग, लॉजिस्टिक्स, हथियार, भर्ती और डिजिटल नेटवर्क—को ध्वस्त करना होगा।
नारकोटिक्स के मुद्दे पर, उन्होंने 'नारकोटिक्स कंट्रोल विजन डॉक्यूमेंट 2026-2029' को लागू करने पर जोर दिया। उन्होंने ड्रग्स के खिलाफ तीन 'D' का मंत्र दिया: Detect (पता लगाएं), Disrupt (बाधित करें) और Destroy (नष्ट करें)। उनका लक्ष्य न केवल अपराधियों को पकड़ना है, बल्कि देश की युवा पीढ़ी को इस घातक संकट से बचाना भी है।
Frequently Asked Questions
1. अमित शाह की नई सुरक्षा रणनीति का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इसका मुख्य उद्देश्य सुरक्षा प्रणाली को 'रिएक्टिव' से बदलकर 'प्रेडिक्टिव' बनाना है, ताकि खतरों को 15-20 साल पहले ही पहचाना जा सके।
2. नार्कोटिक्स के खिलाफ 'तीन Ds' क्या हैं?
ये तीन Ds हैं: Detect (नेटवर्क का पता लगाना), Disrupt (आपूर्ति और वित्त को रोकना) और Destroy (पूरे नेटवर्क को खत्म करना)।