मुख्यमंत्री कॉनराड के. सांगमा ने विधानसभा में बताया कि केंद्र सरकार मेघालय की विशिष्ट भौगोलिक स्थितियों को देखते हुए खनन नियमों में ढील देने पर विचार कर रही है।
- केंद्र सरकार मेघालय के लिए विशेष खनन नियमों पर विचार कर रही है।
- वैज्ञानिक खनन को बढ़ावा देने के लिए न्यूनतम 100 हेक्टेयर की सीमा कम करने का प्रस्ताव है।
- पारंपरिक भूमि स्वामित्व और कठिन भौगोलिक संरचना मुख्य चुनौतियां हैं।
- अवैध खनन को रोकने और आजीविका बचाने के बीच संतुलन बनाने पर जोर।
मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड के. सांगमा ने राज्य विधानसभा को सूचित किया है कि केंद्र सरकार राज्य के विशेष खनन नियमों के प्रस्ताव की समीक्षा कर रही है। विधानसभा के 60 सदस्यों के समक्ष जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि कोयला मंत्रालय ने मेघालय की अनूठी खनन परिस्थितियों और वहां एक अलग दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता को स्वीकार कर लिया है।
सांगमा ने स्पष्ट किया कि वैज्ञानिक खनन की राह में सबसे बड़ी बाधा राज्य की कठिन भौगोलिक स्थिति और पारंपरिक भूमि स्वामित्व प्रणाली है। मेघालय में कोयले की परतें काफी खड़ी हैं, जिससे कई स्थानों पर 'ओपन-कास्ट' (खुली खदान) खनन करना लगभग असंभव हो जाता है। इसके अलावा, अधिकांश कोयला क्षेत्र स्थानीय समुदायों के पारंपरिक स्वामित्व में हैं, जिससे बड़े पैमाने पर नियमों को लागू करना चुनौतीपूर्ण हो गया है।
क्यों यह महत्वपूर्ण है
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि मेघालय में खनन नियमों का यह संभावित बदलाव न केवल राज्य की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह हजारों परिवारों की आजीविका से भी सीधे जुड़ा हुआ है। यदि केंद्र सरकार नियमों में ढील देती है, तो यह अवैध 'रैट-होल' खनन को वैध और वैज्ञानिक प्रक्रिया में बदलने का एक बड़ा अवसर हो सकता है।
वैज्ञानिक खनन और स्थानीय आजीविका के बीच संतुलन बनाना मेघालय के भविष्य के लिए अनिवार्य है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि उन्होंने हाल ही में नई दिल्ली में केंद्रीय कोयला मंत्री जी. किशन रेड्डी से मुलाकात की थी। इस बैठक में उन्होंने विशेष रूप से खनन पट्टों (Mining Leases) के लिए निर्धारित न्यूनतम 100 हेक्टेयर के क्षेत्र की समस्या को उठाया। छोटे खनिकों के पास इतने बड़े भूखंड नहीं हैं, जिससे वे कानूनी दायरे में नहीं आ पा रहे हैं।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
मेघालय में खनन का इतिहास काफी जटिल रहा है। अप्रैल 2014 में, नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने खतरनाक 'रैट-होल' खनन पद्धति पर प्रतिबंध लगा दिया था। हालांकि, 2019 में सर्वोच्च न्यायालय ने MMDR अधिनियम और पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के अनुपालन के साथ वैज्ञानिक खनन की अनुमति दी थी।
वर्तमान में, पूर्वी जयंतिया हिल्स जिले में लगभग 22,000 कोयला खदानें हैं, जो नियामक अधिकारियों के लिए निगरानी करना एक बड़ी चुनौती बना देती है। राज्य सरकार का लक्ष्य अवैध गतिविधियों पर नकेल कसते हुए खनन को एक कानूनी ढांचे के भीतर लाना है।
Frequently Asked Questions
1. मेघालय में वैज्ञानिक खनन क्यों कठिन है?
खड़ी ढलान वाली जमीन और पारंपरिक भूमि स्वामित्व के कारण वैज्ञानिक खनन लागू करना मुश्किल है।
2. मुख्यमंत्री ने केंद्र से क्या मांग की है?
मुख्यमंत्री ने न्यूनतम खनन क्षेत्र की सीमा को 100 हेक्टेयर से कम करने और राज्य को अधिक शक्तियां देने की मांग की है।