दिल्ली उच्च न्यायालय ने प्रधानमंत्री आवास के पास स्थित तीन झुग्गी बस्तियों को छह सप्ताह के भीतर खाली करने का निर्देश दिया है। अदालत ने सरकार को यह सुनिश्चित करने का आदेश दिया है कि निवासियों को सावदा घेवरा में उचित पुनर्वास और सुविधाएं प्रदान की जाएं।
- पीएम आवास के पास स्थित भाई राम कैंप, मस्जिद कैंप और DID कॉलोनी को 6 सप्ताह में खाली करना होगा।
- निवासियों को सावदा घेवरा स्थित DUSIB कॉलोनी में स्थानांतरित किया जाएगा।
- पुनर्वास की निगरानी के लिए सेवानिवृत्त न्यायाधीश मन मोहन शर्मा की अध्यक्षता में एक निगरानी समिति गठित की गई है।
- अदालत ने मानवीय गरिमा के साथ जीवन जीने के अधिकार (अनुच्छेद 21) पर जोर दिया है।
दिल्ली उच्च न्यायालय ने मंगलवार को एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए प्रधानमंत्री के आधिकारिक निवास (लोक कल्याण मार्ग क्षेत्र) के पास स्थित तीन झुग्गी बस्तियों के निवासियों को छह सप्ताह के भीतर अपने घरों को खाली करने और वैकल्पिक आवास में स्थानांतरित होने का निर्देश दिया है।
मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ ने स्पष्ट आदेश दिया कि भाई राम कैंप, मस्जिद कैंप और DID कॉलोनी के निवासी निर्धारित समय सीमा के भीतर अपने निवास स्थान छोड़ दें। यदि आवश्यक हुआ, तो सरकार पुलिस की सहायता से भूमि खाली करने के लिए उन्हें बेदखल कर सकती है।
पुनर्वास और निगरानी तंत्र
अदालत ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि छह सप्ताह की अवधि के भीतर निवासियों को दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड (DUSIB) की सावदा घेवरा कॉलोनी में आवंटित आवासों में बसाया जाए। इस पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए, अदालत ने सेवानिवृत्त न्यायाधीश मन मोहन शर्मा की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय निगरानी समिति का गठन किया है।
इस समिति में केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय, DUSIB, दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA), दिल्ली जल बोर्ड (DJB), शिक्षा निदेशालय और स्वास्थ्य विभाग के उच्चाधिकारी शामिल होंगे। यह समिति छह महीने की अवधि के लिए काम करेगी, जिसे आवश्यकतानुसार बढ़ाया जा सकता है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि पुनर्वास केवल स्थान परिवर्तन नहीं, बल्कि मानवीय गरिमा के साथ जीवन जीने के अधिकार का सम्मान होना चाहिए।
सुरक्षा और कानूनी तर्क
केंद्र सरकार ने इन झुग्गियों को हटाने की मांग करते हुए तर्क दिया था कि ये बस्तियां एक संरक्षित क्षेत्र में स्थित हैं, जो एक सक्रिय वायु सेना स्टेशन के बिल्कुल बगल में है। सरकार के अनुसार, रक्षा बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और सुरक्षा उद्देश्यों की पूर्ति के लिए अनाधिकृत निर्माण को हटाना आवश्यक है।
अदालत ने निवासियों के उस दावे को खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि यह बेदखली 'दिल्ली झुग्गी-झोपड़ी पुनर्वास और स्थानांतरण नीति, 2015' का उल्लंघन करती है। अदालत ने अधिकारियों को सावदा घेवरा में बिजली, स्कूल, एलपीजी कनेक्शन और डिस्पेंसरी जैसी सभी बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित करने का सख्त निर्देश दिया है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह मामला शहरी विकास और राष्ट्रीय सुरक्षा के बीच संतुलन का एक महत्वपूर्ण उदाहरण है। जहाँ एक ओर सुरक्षा कारणों से संवेदनशील क्षेत्रों को खाली करना अनिवार्य है, वहीं दूसरी ओर अनुच्छेद 21 के तहत नागरिकों के पुनर्वास की जिम्मेदारी राज्य की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
Frequently Asked Questions
1. निवासियों को कहाँ स्थानांतरित किया जा रहा है?
निवासियों को सावदा घेवरा स्थित DUSIB कॉलोनी में स्थानांतरित किया जा रहा है।
2. बेदखली का मुख्य कारण क्या है?
मुख्य कारण प्रधानमंत्री आवास के पास सुरक्षा क्षेत्र और वायु सेना स्टेशन की निकटता है।