जयपुर के पास रामपुरा-कंवरपुरा में सरकारी प्राथमिक विद्यालय की जर्जर स्थिति और बच्चों को पशुओं के बीच बैठने को मजबूर करने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। अब सरकार ने ₹18 लाख के सुधार का वादा किया है।

  • सरकारी प्राथमिक विद्यालय रामपुरा-कंवरपुरा की इमारत असुरक्षित घोषित होने के बाद से जर्जर है।
  • छात्रों को एक निजी कमरे में स्थानांतरित किया गया है, जहां पशुओं का भी बसेरा है।
  • राज्य सरकार ने स्कूल के पुनर्निर्माण के लिए ₹18 लाख की राशि मंजूर की है।
  • ग्रामीणों का कहना है कि निजी स्कूलों की भारी फीस के कारण वे सरकारी स्कूल के अलावा कुछ नहीं कर सकते।

जयपुर के बाहरी इलाके में स्थित रामपुरा-कंवरपुरा का सरकारी प्राथमिक विद्यालय वर्तमान में शिक्षा और बुनियादी ढांचे के अभाव की एक दर्दनाक कहानी बयां कर रहा है। जिस स्कूल को बच्चों के भविष्य को संवारना चाहिए था, वह खुद अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है। पिछले कुछ दिनों से, इस स्कूल ने गणित का एक कड़वा सबक सीखा है: जब व्यवस्था में कमी आती है, तो समस्याओं का गुणा हो जाता है।

हाल ही में 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के विरोध प्रदर्शन के बाद, इस स्कूल की बदहाली पूरी दुनिया के सामने आ गई। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, छात्र ऐसी जगह कक्षाएं ले रहे थे जहां पास में ही मवेशी बंधे हुए थे। इस स्थिति के बाद, छात्रों को एक स्थानीय ग्रामीण द्वारा दिए गए कमरे में स्थानांतरित कर दिया गया। हालांकि, सरकारी आदेशों और शिक्षकों के कड़े रुख के कारण मीडिया और बाहरी लोगों का वहां पहुंचना मुश्किल हो गया है।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows कि यह मामला केवल एक स्कूल की मरम्मत का नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण भारत में शिक्षा की पहुंच और सुरक्षा के गंभीर संकट को दर्शाता है। जब सरकारी बुनियादी ढांचा ढह जाता है, तो सबसे अधिक मार गरीब परिवारों पर पड़ती है, जिनके पास निजी स्कूलों की महंगी फीस चुकाने की क्षमता नहीं होती।

ग्रामीणों का कहना है कि हमारे बच्चों के पास कोई और विकल्प नहीं है, क्योंकि निजी स्कूल बहुत महंगे हैं।

ग्रामीण महिला धोरी बैरवा, जो एक दिहाड़ी मजदूर हैं, अपने बच्चों को इसी स्कूल में भेजती हैं। उनका कहना है कि निजी स्कूल कम से कम ₹1,000 प्रति माह लेते हैं, जो उनके जैसे परिवारों के लिए संभव नहीं है। वहीं, स्कूल की पुरानी इमारत अब पूरी तरह से परित्यक्त है, जिसकी दीवारें और रंगीन चित्र समय के साथ फीके पड़ चुके हैं।

जिला शिक्षा अधिकारी गिरिराज पारीक ने आरोपों पर सफाई देते हुए कहा कि छात्रों को 'गौशाला' में नहीं रखा गया है, बल्कि ग्रामीण परिवेश में घर के एक हिस्से में पशुओं के लिए जगह होती है। उन्होंने आश्वासन दिया कि नए भवन के लिए ₹12 लाख स्वीकृत किए गए हैं और स्थानीय विधायक कैलाश वर्मा की ओर से ₹6 लाख की अतिरिक्त राशि (MLALADS) प्रदान की गई है।

राजस्थान की भजन लाल शर्मा सरकार ने अब राज्य भर के सरकारी स्कूलों के लिए ₹12,500 करोड़ का एक विशाल रोडमैप पेश किया है। इसमें नए भवनों, कक्षाओं और शौचालयों के निर्माण के लिए भारी निवेश का प्रावधान है। हालांकि, CJP नेता आशुतोष रंका का कहना है कि यह जीत महत्वपूर्ण है, लेकिन सरकार की पिछली प्रतिबद्धताओं पर सवाल अभी भी बने हुए हैं।

Did You Know?: राजस्थान सरकार ने सरकारी स्कूलों के कायाकल्प के लिए तीन साल का एक व्यापक रोडमैप तैयार किया है जिसमें हजारों करोड़ रुपये का निवेश शामिल है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: रामपुरा-कंवरपुरा स्कूल की वर्तमान स्थिति क्या है?
उत्तर: स्कूल की पुरानी इमारत असुरक्षित होने के कारण बंद है और छात्र फिलहाल एक अस्थायी कमरे में पढ़ रहे हैं।

प्रश्न 2: सरकार ने सुधार के लिए कितनी राशि आवंटित की है?
उत्तर: सरकार ने ₹12 लाख और स्थानीय विधायक की ओर से ₹6 लाख, यानी कुल ₹18 लाख स्वीकृत किए हैं।