फोरम फॉर गुड गवर्नेंस (FGG) ने मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी से अवैध निर्माणों पर लगाम लगाने के लिए टाउन प्लानिंग और बिल्डिंग ट्रिब्यूनल को तत्काल कार्यात्मक बनाने की मांग की है।

  • FGG ने तेलंगाना सरकार से टाउन प्लानिंग ट्रिब्यूनल के सदस्यों की नियुक्ति करने का आग्रह किया।
  • 2016 में ट्रिब्यूनल का गठन हुआ था, लेकिन अभी तक कोई अध्यक्ष नियुक्त नहीं किया गया है।
  • अवैध निर्माणों के कारण अग्नि सुरक्षा और शहरी नियोजन के नियमों का उल्लंघन हो रहा है।
  • हाई कोर्ट के आदेश के बावजूद सरकार ने अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया है।

हैदराबाद: फोरम फॉर गुड गवर्नेंस (FGG) ने तेलंगाना सरकार से नगर पालिकाओं में अवैध निर्माणों और भवन संबंधी अन्य उल्लंघनों से निपटने के लिए एक कार्यात्मक टाउन प्लानिंग और बिल्डिंग ट्रिब्यूनल को तत्काल स्थापित करने का आग्रह किया है। FGG के अध्यक्ष एम. पद्मनाभ रेड्डी ने मंगलवार को मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी को एक ज्ञापन सौंपकर इस गंभीर मुद्दे की ओर ध्यान आकर्षित किया।

FGG के अनुसार, अवैध निर्माण न केवल नियोजित विकास को बाधित कर रहे हैं, बल्कि जनता के लिए कई गंभीर समस्याएं भी पैदा कर रहे हैं। वर्तमान में, जब नगर पालिका अधिकारी अवैध संरचनाओं को गिराने के नोटिस जारी करते हैं, तो बिल्डर अदालतों का दरवाजा खटखटाते हैं और स्टे ऑर्डर प्राप्त कर लेते हैं। इससे उन्हें भवन और अग्नि सुरक्षा मानदंडों का उल्लंघन करते हुए निर्माण जारी रखने का मौका मिल जाता है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि एक सक्रिय ट्रिब्यूनल की अनुपस्थिति बिल्डरों को नियमों की धज्जियां उड़ाने के लिए प्रोत्साहित करती है। जब न्यायिक प्रक्रिया धीमी होती है, तो अवैध निर्माण एक संगठित समस्या बन जाती है, जो भविष्य में शहरी आपदाओं का कारण बन सकती है।

अवैध निर्माणों पर त्वरित कार्रवाई के बिना, शहरों का सुनियोजित विकास केवल कागजों तक ही सीमित रह जाएगा।

श्री रेड्डी ने बताया कि इन उल्लंघनों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई और भवन संबंधी मामलों के तेजी से निपटान को सुनिश्चित करने के लिए 2016 में एक ट्रिब्यूनल का गठन किया गया था। हालांकि, विडंबना यह है कि इतने वर्षों के बाद भी अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति नहीं की गई है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

इस मामले में कानूनी संघर्ष लंबा रहा है। FGG ने पहले तेलंगाना उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका (PIL) दायर की थी। 27 अप्रैल, 2022 को, उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को चार सप्ताह के भीतर ट्रिब्यूनल के गठन की प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया था। लेकिन, लगभग 10 वर्षों के इंतजार के बाद भी, जमीनी स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है।

Did You Know?: अनियोजित शहरीकरण से शहरों में जल निकासी और अग्नि सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त हो सकती है।

Frequently Asked Questions

1. ट्रिब्यूनल का गठन कब हुआ था?
टाउन प्लानिंग और बिल्डिंग ट्रिब्यूनल का गठन वर्ष 2016 में किया गया था।

2. उच्च न्यायालय ने क्या निर्देश दिया था?
उच्च न्यायालय ने सरकार को चार सप्ताह के भीतर ट्रिब्यूनल के सदस्यों की नियुक्ति करने का आदेश दिया था।