भारत और ब्रिटेन जल्द ही नौसेना के लिए उन्नत इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन सिस्टम और भारतीय सेना के लिए मिसाइल प्रणालियों के विकास हेतु एक महत्वपूर्ण अंतर-सरकारी समझौते पर हस्ताक्षर करने जा रहे हैं।
- भारत और यूके नौसेना के लिए इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन सिस्टम विकसित करने हेतु समझौता करेंगे।
- भारतीय सेना के लिए ब्रिटिश 'लाइटवेट मल्टीरोल मिसाइल' (LMM) की खरीद भी जल्द होगी।
- GE Vernova और BHEL भारत में पहला समुद्री लैंड-बेस्ड टेस्टिंग फैसिलिटी स्थापित करेंगे।
नई दिल्ली: भारत और यूनाइटेड किंगडम के बीच रक्षा संबंधों में एक नया युग शुरू होने जा रहा है। ब्रिटिश अधिकारियों के अनुसार, दोनों देश बहुत जल्द एक अंतर-सरकारी समझौते (IGA) पर हस्ताक्षर करने के लिए तैयार हैं, जिसका उद्देश्य भारतीय नौसेना के चार लैंडिंग प्लेटफॉर्म डॉक्स (LPDs) के लिए उन्नत मैरीटाइम इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन सिस्टम विकसित करना है।
यह सहयोग न केवल भारत की समुद्री शक्ति को बढ़ाएगा, बल्कि रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में भी एक बड़ा कदम होगा। इस साझेदारी के हिस्से के रूप में, GE Vernova और भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (BHEL) मिलकर भारत में पहला 'मैरीटाइम लैंड-बेस्ड टेस्टिंग फैसिलिटी' स्थापित करेंगे। यह सुविधा 'इंटीग्रेटेड फुल इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन' (IFEP) सिस्टम के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
तकनीकी बदलाव और महत्व
वर्तमान में, भारतीय युद्धपोत मुख्य रूप से डीजल इंजन, गैस टर्बाइन या स्टीम टर्बाइन द्वारा संचालित होते हैं। इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन तकनीक की ओर संक्रमण नौसेना के बेड़े के आधुनिकीकरण के लिए क्रांतिकारी साबित होगा। यूके की रॉयल नेवी के 'क्वीन एलिजाबेथ-क्लास' विमानवाहक पोत इसी तरह की एकीकृत पूर्ण इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन तकनीक का उपयोग करते हैं।
यह समझौता भारतीय नौसेना को वैश्विक स्तर पर अत्याधुनिक युद्धपोत क्षमताओं से लैस करने की दिशा में एक रणनीतिक मोड़ है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह गठबंधन केवल तकनीक के हस्तांतरण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत की सुरक्षा स्थिति को मजबूत करने के लिए एक रणनीतिक कदम है। इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन से बड़े युद्धपोतों (6,000 टन से अधिक विस्थापन) की दक्षता और संचालन क्षमता में भारी वृद्धि होगी।
मिसाइल सौदे का विस्तार
इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन के अलावा, एक दूसरा महत्वपूर्ण समझौता भारतीय सेना के लिए ब्रिटिश लाइटवेट मल्टीरोल मिसाइल (LMM) की खरीद से संबंधित है। यह मिसाइलें हल्के बख्तरबंद वाहनों, हवाई प्लेटफार्मों और यूएएस (UAS) जैसे खतरों से निपटने में सक्षम हैं। थलेस यूके के अनुसार, इन मिसाइलों की मारक क्षमता 6 किमी से अधिक है और इनकी गति मैक 1.5 है।
| विशेषता | वर्तमान तकनीक (डीजल/गैस) | नई इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन तकनीक |
|---|---|---|
| ईंधन दक्षता | कम | अत्यधिक उच्च |
| शोर का स्तर | अधिक | न्यूनतम (Stealth के लिए बेहतर) |
| परिचालन क्षमता | सीमित | अधिक उन्नत और एकीकृत |
Frequently Asked Questions
1. यह समझौता भारतीय नौसेना को कैसे लाभ पहुँचाएगा?
यह तकनीक युद्धपोतों को अधिक कुशल, शांत और आधुनिक बनाएगी, जिससे उनकी युद्ध क्षमता बढ़ेगी।
2. LMM मिसाइल क्या है?
यह एक बहुउद्देश्यीय मिसाइल है जो जमीनी वाहनों और हवाई खतरों दोनों को नष्ट करने में सक्षम है।