आंध्र प्रदेश सरकार ने शहरी विकास को गति देने के लिए भवन निर्माण और ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट की प्रक्रिया को सरल बनाने हेतु एक नई तीन-स्तरीय प्रणाली पेश की है। इसका उद्देश्य प्रशासनिक देरी को कम करना और जवाबदेही तय करना है।

  • भवन निर्माण मंजूरी के लिए अब केवल तीन स्तरों का पालन किया जाएगा।
  • नगर पंचायतों से लेकर शहरी विकास प्राधिकरणों तक समान प्रक्रिया लागू होगी।
  • प्रक्रिया का उद्देश्य फाइलों की आवाजाही को कम करना और समय सीमा के भीतर काम पूरा करना है।

आंध्र प्रदेश सरकार ने शहरी बुनियादी ढांचे के विकास को गति देने के उद्देश्य से एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। नगर प्रशासन और शहरी विकास विभाग (MA&UD) के प्रधान सचिव एस. सुरेश कुमार के अनुसार, अब नगर पंचायतों, नगर पालिकाओं, नगर निगमों और शहरी विकास प्राधिकरणों (UDAs) में भवन निर्माण की निगरानी और ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट (OC) जारी करने के लिए एक समान तीन-स्तरीय तंत्र लागू किया गया है।

इस नए सुधार का मुख्य लक्ष्य प्रशासनिक देरी को समाप्त करना, फाइलों की आवाजाही को सुव्यवस्थित करना और अधिकारियों की जवाबदेही तय करना है। पुराने सिस्टम में, साइट के आकार के आधार पर फाइलें टाउन प्लानिंग अधिकारियों के कई स्तरों से होकर गुजरती थीं, जिससे निरीक्षण और सर्टिफिकेट जारी करने में अत्यधिक समय लगता था।

प्रणाली की कार्यप्रणाली

संशोधित ढांचे के तहत, प्रक्रिया को अब केवल तीन स्तरों तक सीमित कर दिया गया है, जिसमें 'लेवल-3' अधिकारी अंतिम पुष्टि करने वाला अधिकारी (Confirming Authority) होगा। यह प्रणाली 100 वर्ग मीटर से लेकर 4,000 वर्ग मीटर से अधिक के निर्माण स्थलों को कवर करती है (हाई-राइज इमारतों को छोड़कर)।

सभी श्रेणियों में वार्ड प्लानिंग एंड रेगुलेटरी सेक्रेटरी 'लेवल-1' अधिकारी के रूप में कार्य करेंगे। साइट के आकार के आधार पर लेवल-2 और लेवल-3 के अधिकारियों की वरिष्ठता अलग-अलग होगी। यदि कोई निर्धारित अधिकारी उपलब्ध नहीं होता है, तो अगला उच्च पदस्थ अधिकारी इन शक्तियों का प्रयोग करेगा।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि इस तरह के प्रशासनिक सुधार सीधे तौर पर रियल एस्टेट क्षेत्र में निवेश और शहरी विकास की गति को प्रभावित करते हैं। जटिल नौकरशाही प्रक्रियाओं को कम करके, सरकार न केवल भ्रष्टाचार की गुंजाइश कम करती है, बल्कि नागरिकों के लिए 'ईज ऑफ लिविंग' को भी बढ़ावा देती है।

यह सुधार शहरी प्रशासन में पारदर्शिता लाने और फाइलों के अनावश्यक चक्र को तोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।

इस तंत्र के माध्यम से सरकार को उम्मीद है कि निरीक्षणों का तेजी से समापन होगा और ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट प्राप्त करने की प्रक्रिया में लगने वाला समय काफी कम हो जाएगा। यह कदम पूरे राज्य में शहरी स्थानीय निकायों (ULBs) के बीच एक समान कार्यप्रणाली स्थापित करेगा।

Did You Know?: ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट (OC) वह कानूनी दस्तावेज है जो यह प्रमाणित करता है कि इमारत निर्माण नियमों के अनुसार बनी है और रहने के लिए सुरक्षित है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: क्या यह नियम ऊंची इमारतों (High-rise buildings) पर भी लागू होता है?
उत्तर: नहीं, वर्तमान में यह तंत्र 4,000 वर्ग मीटर तक के निर्माण को कवर करता है, जिसमें हाई-राइज इमारतों को शामिल नहीं किया गया है।

प्रश्न 2: इस नई प्रणाली का मुख्य लाभ क्या है?
उत्तर: इसका मुख्य लाभ फाइलों के अनावश्यक मूवमेंट को कम करना और निर्माण मंजूरी की प्रक्रिया को समयबद्ध बनाना है।