संसदीय पैनल की रिपोर्ट ने सरकार की मुफ्त कोचिंग योजना की खराब स्थिति उजागर की है। पिछले तीन वर्षों में 10,500 के लक्ष्य के मुकाबले केवल 2,790 छात्र ही इस योजना का लाभ उठा पाए हैं।
- पिछले तीन वर्षों में केवल 26% नामांकन लक्ष्य प्राप्त हुआ।
- आय सीमा (8 लाख रुपये) को लेकर समिति ने सुधार की सिफारिश की है।
- बजट का एक बड़ा हिस्सा उपयोग नहीं हो पाया है।
- कोचिंग केवल 14 केंद्रीय विश्वविद्यालयों तक सीमित है।
नई दिल्ली में पेश की गई एक संसदीय स्थायी समिति की रिपोर्ट ने केंद्र सरकार की मुफ्त कोचिंग योजना के कार्यान्वयन में गंभीर खामियों को उजागर किया है। रिपोर्ट के अनुसार, आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों के लिए बनाई गई इस महत्वाकांक्षी योजना का लाभ उठाने में सरकार बुरी तरह विफल रही है। पिछले तीन वर्षों में, सरकार ने 10,500 छात्रों को नामांकित करने का लक्ष्य रखा था, लेकिन वास्तव में केवल 2,790 छात्र ही इस योजना से जुड़ सके, जो लक्ष्य का मात्र 26% है।
बजट और नामांकन का गणित
रिपोर्ट में वित्तीय अनियमितताओं और कम उपयोग पर भी चिंता जताई गई है। वर्ष 2023-24 में, 47 करोड़ रुपये के अनुमानित बजट के मुकाबले केवल 7.76 करोड़ रुपये ही खर्च किए गए। इसी तरह, 2024-25 में बजट 35 करोड़ रुपये था, लेकिन खर्च केवल 17.68 करोड़ रुपये हुआ। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि योजना न केवल पहुंच में कम है, बल्कि इसके लिए आवंटित धन का भी कुशलतापूर्वक उपयोग नहीं किया जा रहा है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह मुद्दा?
BozokMedia विश्लेषण दिखाता है कि यह विफलता उस समय हो रही है जब देश में प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता को लेकर भारी आक्रोश है। हाल ही में NEET-UG पेपर लीक के बाद हुए जन-आंदोलनों के बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के भाषण में सभी छात्रों के लिए "मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग" का वादा किया था। हालांकि, वर्तमान जमीनी हकीकत और भविष्य की योजना का रोडमैप अभी भी स्पष्ट नहीं है।
कोचिंग की बढ़ती लागत गरीब छात्रों के लिए सफलता के दरवाजे बंद कर रही है, और सरकारी योजनाओं का कमजोर क्रियान्वयन इस खाई को और गहरा कर रहा है।
प्रमुख बाधाएं और चुनौतियां
संसदीय समिति ने पाया कि योजना की सफलता में सबसे बड़ी बाधा 8 लाख रुपये की वार्षिक पारिवारिक आय सीमा है। समिति का मानना है कि इस सीमा को बढ़ाया जाना चाहिए ताकि अधिक योग्य छात्र इसका लाभ उठा सकें। इसके अलावा, वर्तमान में यह सेवा केवल 14 केंद्रीय विश्वविद्यालयों तक ही सीमित है, जिससे ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों के छात्रों की पहुंच बहुत कम हो गई है।
| वर्ष | लक्ष्य (छात्र) | वास्तविक नामांकन | बजट (करोड़ ₹) |
|---|---|---|---|
| 2023-24 | 3,500 | 223 | 47 |
| 2024-25 | 3,500 | 2,136 | 35 |
| 2025-26 | 3,500 | 431 | 20 |
Frequently Asked Questions
1. इस योजना का लाभ कौन उठा सकता है?
यह योजना मुख्य रूप से अनुसूचित जाति (SC), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और PM CARES फॉर चिल्ड्रन योजना के लाभार्थियों के लिए है।
2. समिति ने क्या मुख्य सिफारिश की है?
समिति ने आय सीमा को बढ़ाने और योजना को राज्य विश्वविद्यालयों तक विस्तारित करने की सिफारिश की है।