नेटफ्लिक्स डॉक्यूमेंट्री 'द लास्ट सैल्यूट' में पूर्व वायु प्रमुख बीएस धनोआ ने 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान मिग-21 विमानों के साथ किए गए बेहद खतरनाक और चुनौतीपूर्ण हवाई मिशनों के बारे में चौंकाने वाले खुलासे किए हैं।
- पूर्व वायु प्रमुख बीएस धनोआ ने कारगिल युद्ध के दौरान 15,000 फीट की ऊंचाई पर मिग-21 उड़ाने के अनुभवों को साझा किया।
- युद्ध के दौरान पायलटों ने ऊंचाइयों पर हथियारों की सटीकता बनाए रखने के लिए 'जुगाड़' का सहारा लिया।
- एक पायलट ने गलती से तोपों के गर्म खोल (shells) को सिगरेट के टुकड़े समझ लिया था।
- मिग-21 का उपयोग केवल हमले के लिए नहीं, बल्कि फोटो रिकॉनिसेंस और हवाई रक्षा के लिए भी किया गया था।
नेटफ्लिक्स की नई डॉक्यूमेंट्री 'द लास्ट सैल्यूट' (The Last Salute) भारतीय वायु सेना के प्रतिष्ठित लड़ाकू विमान मिग-21 (MiG-21) की 62 वर्षों की यात्रा पर एक भावुक और गौरवशाली नज़र डालती है। इस डॉक्यूमेंट्री में युद्ध के अनुभवी दिग्गजों ने 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान 'ऑपरेशन सफेद सागर' में अपनी भूमिकाओं को जीवंत कर दिया है।
पूर्व वायु प्रमुख मार्शल बीएस धनोआ (BS Dhanoa), जिन्होंने युद्ध के दौरान 'गोल्डन एरोस' स्क्वाड्रन का नेतृत्व किया था, ने बताया कि उस समय की चुनौतियां कितनी कठिन थीं। उन्होंने साझा किया कि 14,000 से 15,000 फीट की अत्यधिक ऊंचाई पर हवा बहुत विरल होती है, जिससे विमान और उसके हथियारों का व्यवहार बदल जाता है। इन चुनौतियों से निपटने के लिए पायलटों और ग्राउंड क्रू को तकनीकी 'जुगाड़' का उपयोग करना पड़ा ताकि बमबारी सटीक हो सके।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह डॉक्यूमेंट्री केवल एक विमान के बारे में नहीं है, बल्कि उन मानवीय क्षमताओं के बारे में है जो प्रतिकूल परिस्थितियों में भी असंभव को संभव बनाती हैं। मिग-21 का कारगिल में प्रदर्शन भारतीय वायु सेना की अनुकूलन क्षमता का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।
कोकपिट के भीतर की शांति और नीचे हो रहे विनाश के बीच का विरोधाभास केवल एक युद्ध पायलट ही समझ सकता है।
एक अविस्मरणीय किस्सा साझा करते हुए धनोआ ने बताया कि कैसे एक मिशन के दौरान उनके साथी पायलट ने नीचे गिरते हुए लाल चमकते हुए तोपों के खोलों को 'सिगरेट के टुकड़े' समझ लिया था। धनोआ ने स्पष्ट किया कि वे वास्तव में गर्म तोप के गोले थे जो हवा में चमक रहे थे।
विंग कमांडर जयदीप सिंह ने बताया कि मिग-21 ने ऑपरेशन सफेद सागर में बहुआयामी भूमिका निभाई। यह केवल स्ट्राइक मिशनों तक सीमित नहीं था, बल्कि इसका उपयोग फोटो रिकॉनिसेंस (तस्वीरें लेने) और हवाई रक्षा (Air Defence) के लिए भी किया गया था। वायु सेना के इन अभियानों का इतना गहरा प्रभाव था कि पाकिस्तानी सेना के रसद और गोला-बारूद की कमी का पता रेडियो संदेशों से चल गया था।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
1999 का कारगिल युद्ध भारत और पाकिस्तान के बीच एक उच्च-ऊंचाई वाला संघर्ष था। भारतीय वायु सेना ने 'ऑपरेशन सफेद सागर' के माध्यम से दुश्मन के ठिकानों को नष्ट करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसमें मिग-21 जैसे विमानों ने दुर्गम पहाड़ी इलाकों में अपनी ताकत का प्रदर्शन किया।
Frequently Asked Questions
1. ऑपरेशन सफेद सागर क्या था?
यह 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान भारतीय वायु सेना द्वारा चलाया गया एक महत्वपूर्ण हवाई अभियान था।
2. 'द लास्ट सैल्यूट' कहाँ देख सकते हैं?
यह डॉक्यूमेंट्री वर्तमान में नेटफ्लिक्स (Netflix) पर उपलब्ध है।