नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद, सिक्किम के एक प्रमुख समुदाय ने केंद्र सरकार से राज्य में सभी नई जलविद्युत परियोजनाओं को तुरंत रोकने और मौजूदा परियोजनाओं की जांच करने का आग्रह किया है।
- नेपाल में तिब्बत से आए हिमस्खलन के कारण 13 जलविद्युत परियोजनाएं क्षतिग्रस्त हुईं।
- सिक्किम भूटिया लेपचा एपेक्स कमेटी (SIBLAC) ने पीएम मोदी से हस्तक्षेप की मांग की है।
- समूह ने सिक्किम की नदियों पर नई परियोजनाओं पर रोक लगाने और मौजूदा परियोजनाओं की स्वतंत्र जांच की मांग की है।
नेपाल में हाल ही में आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड (अचानक आई बाढ़) ने हिमालयी क्षेत्र की संवेदनशीलता को एक बार फिर उजागर कर दिया है। इस आपदा के बाद, सिक्किम के दो प्रमुख जातीय समुदायों के एक समूह ने केंद्र सरकार को सलाह दी है कि वह नेपाल की इस त्रासदी से सबक ले और सिक्किम में प्रस्तावित सभी नई जलविद्युत परियोजनाओं को रद्द कर दे।
नेपाल विद्युत प्राधिकरण के अनुसार, तिब्बत में आए भूकंप-प्रेरित हिमस्खलन और चट्टानों के गिरने के कारण भोटेकोषी और त्रिशूली नदी गलियारों के साथ कम से कम 13 जलविद्युत परियोजनाएं भारी नुकसान झेल रही हैं। इनमें 111 मेगावाट का रासुवागढ़ी जलविद्युत संयंत्र भी शामिल है। यह आपदा तिब्बत के गयिरोंग पोर्ट से टकराकर नेपाल में प्रवेश कर गई, जिससे तेज गति वाली बाढ़ आई और सड़कों, बिजली परियोजनाओं और गांवों को पूरी तरह से तबाह कर दिया।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण दर्शाता है कि हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र में विकास और सुरक्षा के बीच का संतुलन बिगड़ रहा है। नेपाल की घटना यह चेतावनी देती है कि बड़े पैमाने पर बुनियादी ढांचे का निर्माण प्राकृतिक आपदाओं की तीव्रता को बढ़ा सकता है, जिससे न केवल आर्थिक बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा को भी खतरा हो सकता है।
नेपाल की आपदा हिमालयी क्षेत्र की संवेदनशीलता को उजागर करती है, जिसके लिए विकास गतिविधियों के नए सिरे से मूल्यांकन की आवश्यकता है।
सिक्किम भूटिया लेपचा एपेक्स कमेटी (SIBLAC) के संयोजक त्सेतन तास्की भूटिया ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से आग्रह किया है कि वे राज्य में नई जलविद्युत परियोजनाओं पर रोक लगाएं और मौजूदा परियोजनाओं की समयबद्ध, स्वतंत्र जांच का आदेश दें। उन्होंने पर्यावरण, भूगर्भीय, भूकंपीय, सामाजिक और राष्ट्रीय सुरक्षा प्रभावों पर एक 'श्वेत पत्र' (White Paper) प्रकाशित करने की भी मांग की है।
गौरतलब है कि सिक्किम पहले भी जलविद्युत परियोजनाओं से जुड़ी प्राकृतिक आपदाओं का सामना कर चुका है। अक्टूबर 2023 में हुई ग्लेशियर झील फटने की घटना ने तेस्ता-III जलविद्युत परियोजना को भारी नुकसान पहुँचाया था, जिससे नीचे के क्षेत्रों में व्यापक तबाही हुई थी।
Historical Background
हिमालयी क्षेत्र दुनिया के सबसे भूगर्भीय रूप से सक्रिय क्षेत्रों में से एक है। पिछले दशक में, ग्लेशियरों के पिघलने और अनियंत्रित निर्माण के कारण सिक्किम और उत्तराखंड जैसे राज्यों में 'ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड' (GLOF) की घटनाओं में वृद्धि देखी गई है, जो पारिस्थितिक तंत्र के लिए एक गंभीर खतरा है।
Frequently Asked Questions
1. SIBLAC की मुख्य मांग क्या है?
SIBLAC ने सिक्किम में नई जलविद्युत परियोजनाओं को रोकने और मौजूदा परियोजनाओं की पर्यावरणीय और सुरक्षा जांच की मांग की है।
2. नेपाल में क्या हुआ था?
तिब्बत में आए हिमस्खलन के कारण नेपाल की नदियों में अचानक बाढ़ आ गई, जिससे कई पावर प्लांट और बुनियादी ढांचा नष्ट हो गया।