जल संसाधन विभाग (WRD) ने तिरुचि में उय्याकोन्दन नहर के 14 किमी लंबे हिस्से से जलकुंभी साफ करने का अभियान शुरू किया है। ₹60 लाख से अधिक की लागत वाला यह कार्य सिंचाई व्यवस्था को सुचारू बनाने के लिए किया जा रहा है।

  • उय्याकोन्दन नहर के 14 किमी हिस्से की सफाई के लिए ₹60 लाख का बजट आवंटित।
  • अझवर्त्थोपू-अलाथुर खंड पर काम शुरू, दो सप्ताह में पूरा होने की उम्मीद।
  • चोल काल की 1,000 साल पुरानी नहर का पुनरुद्धार।

तिरुचि: मेट्टूर स्थित स्टेनली जलाशय को जल्द ही सिंचाई के लिए खोलने की तैयारी के साथ, जल संसाधन विभाग (WRD) ने तिरुचि शहर के क्षेत्र में स्थित उय्याकोन्दन नहर पर जमी घनी जलकुंभी को हटाने का काम युद्धस्तर पर शुरू कर दिया है। विभाग के सूत्रों के अनुसार, लगभग 14 किलोमीटर की लंबाई में इस खरपतवार को हटाने के लिए ₹60 लाख से अधिक का खर्च किया जा रहा है।

यह सफाई अभियान गुरुवार को अझवर्त्थोपू-अलाथुर खंड से शुरू हुआ। अधिकारियों ने बताया कि इस पहल के तहत विभिन्न खंडों पर खरपतवार हटाने के लिए छह अलग-अलग कार्य शुरू किए जा रहे हैं, जिन्हें अगले दो सप्ताह के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। शहर के कई हिस्सों में जलकुंभी की एक मोटी परत ने नहर को ढक रखा है, जिससे जल प्रवाह बाधित हो रहा है।

क्यों महत्वपूर्ण है यह कदम?

बोज़ोकमीडिया (BozokMedia) विश्लेषण से पता चलता है कि यह सफाई अभियान केवल स्वच्छता के लिए नहीं, बल्कि कृषि अर्थव्यवस्था के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। किसानों और नागरिक कार्यकर्ताओं की शिकायतों के बाद, जिला कलेक्टर प्रतीक तायल ने स्वयं नहर का निरीक्षण किया था। जलकुंभी के कारण होने वाला प्रदूषण और अवरुद्ध जल प्रवाह सिंचाई के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया था।

ऐतिहासिक नहरों का रखरखाव केवल इंजीनियरिंग का काम नहीं, बल्कि कृषि विरासत को बचाने का प्रयास है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: उय्याकोन्दन नहर का इतिहास अत्यंत गौरवशाली है। लगभग 1,000 साल पुरानी यह नहर राजा राजा चोल द्वारा निर्मित की गई थी और बाद में कुलोत्तुंग चोल द्वारा इसका नवीनीकरण किया गया था। यह नहर 32,000 एकड़ क्षेत्र को कवर करती है और 36 टैंकों को पानी की आपूर्ति करती है। यह तिरुचि जिले में पेट्टवैथलाई से लेकर वझावंथनकोट्टई टैंक तक लगभग 71 किमी की दूरी तय करती है।

हालांकि, नहर के शहरी खंडों, विशेष रूप से पुथुर वियर और अरियामंगलम के बीच, सीवेज के सीधे बहाव ने समस्या को और गंभीर बना दिया है। नहर के किनारे सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) स्थापित करने की योजना अभी भी कागजों पर ही सिमटी हुई है, जो इस ऐतिहासिक जलमार्ग के लिए एक बड़ी चिंता का विषय है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. उय्याकोन्दन नहर का निर्माण किसने करवाया था?
इसका निर्माण महान चोल सम्राट राजा राजा चोल द्वारा किया गया था।

2. सफाई अभियान का मुख्य उद्देश्य क्या है?
मुख्य उद्देश्य जलकुंभी को हटाकर सिंचाई के लिए पानी के प्रवाह को सुचारू बनाना और प्रदूषण को कम करना है।

क्या आप जानते हैं?: उय्याकोन्दन नहर का जाल इतना विस्तृत है कि यह तंजावुर जिले तक जाकर कई महत्वपूर्ण सिंचाई टैंकों को जीवित रखता है।