कन्नियाकुमारी जिले में ऐतिहासिक एवीएम नहर की सफाई और गाद निकालने का काम शुरू हो गया है, जिससे दशकों पुरानी मांग पूरी हुई है। यह परियोजना तटीय पर्यटन और जल परिवहन के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकती है।

  • पर्यटन मंत्री एस. राजेश कुमार ने मंडािकाडू में नहर बहाली कार्य का उद्घाटन किया।
  • एवीएम नहर को 'राष्ट्रीय जलमार्ग-13' घोषित किया गया है।
  • प्रथम चरण में कोलाचेल और मंडािकाडू पुदुर के बीच 4.30 किमी हिस्से की सफाई की जाएगी।
  • यह परियोजना थुवनांतपुरम और कन्याकुमारी के बीच जलमार्ग को पुनर्जीवित करेगी।

तमिलनाडु के कन्नियाकुमारी जिले में दशकों से लंबित एवीएम (अनंत विक्टोरिया मार्तंडम) नहर के पुनरुद्धार का सपना आखिरकार सच होता दिख रहा है। शनिवार को पर्यटन मंत्री एस. राजेश कुमार ने मंडािकाडू में इस महत्वपूर्ण परियोजना का आधिकारिक उद्घाटन किया। इस अवसर पर जिला कलेक्टर एम. प्रताप भी उपस्थित रहे। यह कदम स्थानीय किसानों और मछुआरों की वर्षों पुरानी मांग को पूरा करता है, जो इस जलमार्ग के जीर्णोद्धार के लिए संघर्ष कर रहे थे।

ऐतिहासिक रूप से, 1860 में निर्मित इस नहर की कल्पना थुवनांतपुरम को कन्याकुमारी से जोड़ने वाले एक प्रमुख जलमार्ग के रूप में की गई थी। इसमें नीरोडी, वल्लविलाई, थूतूर, कोलाचेल और मंडािकाडू जैसे 20 से अधिक तटीय गांवों को शामिल किया जाना था। हालांकि, सड़क परिवहन के विस्तार के कारण इस महत्वाकांक्षी परियोजना का एक बड़ा हिस्सा उपेक्षित रह गया। अब, इस नहर के पुनरुद्धार से कन्याकुमारी से लेकर कसलगोड़ तक अंतर्देशीय जल परिवहन को एक नई दिशा मिलने की उम्मीद है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि एवीएम नहर का पुनरुद्धार केवल एक सफाई अभियान नहीं है, बल्कि यह दक्षिण भारत के तटीय आर्थिक ढांचे को बदलने की एक रणनीतिक पहल है। जब एक ऐतिहासिक जलमार्ग को आधुनिक परिवहन के साथ जोड़ा जाता है, तो यह न केवल रसद लागत को कम करता है बल्कि स्थानीय पर्यटन पारिस्थितिकी तंत्र को भी सशक्त बनाता है।

पूर्व मुख्यमंत्री जे जयललिता ने भी इस परियोजना के माध्यम से कोवलम और पूवार के बीच तटीय पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए एक योजना तैयार की थी, लेकिन उनके निधन के बाद यह परियोजना अधर में लटक गई थी। दशकों की सरकारी उपेक्षा के कारण यह नहर कचरे, सीवेज और जलकुंभी से भर गई थी, जिससे यह एक स्वास्थ्य संकट का कारण बन रही थी।

इस नहर का पुनरुद्धार तटीय समुदायों की आजीविका को सुरक्षित करने और भारत के समुद्री पर्यटन मानचित्र पर एक नया अध्याय जोड़ने का अवसर है।

परियोजना के कार्यान्वयन को लेकर अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि पहले चरण में अतिक्रमण हटाकर 11.30 किमी हिस्से को पूरी तरह साफ किया जाएगा। इसके बाद, शेष 15 किमी हिस्से की खुदाई की जाएगी ताकि पर्यटन उद्योग को नई ऊंचाइयां मिल सकें। वर्तमान चरण में, कोलाचेल और मंडािकाडू पुदुर के बीच के 4.30 किमी लंबे हिस्से की गाद निकाली जा रही है।

चूंकि केंद्र सरकार ने इसे 'राष्ट्रीय जलमार्ग-13' घोषित किया है, इसलिए स्थानीय समुदाय और नेता अब राज्य सरकार से केंद्र से पर्याप्त धन प्राप्त करने का आग्रह कर रहे हैं। यदि पूरी 27 किमी की लंबाई को बहाल कर दिया जाता है, तो यह कन्याकुमारी और थुवनांतपुरम के बीच एक प्रमुख व्यापारिक और पर्यटन गलियारा बन जाएगा।

Historical Background

एवीएम नहर का इतिहास 19वीं सदी के उत्तरार्ध से जुड़ा है। इसे ब्रिटिश काल के दौरान व्यापारिक सुगमता के लिए एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में देखा गया था। समय के साथ, मोटर चालित वाहनों के आगमन ने जलमार्गों की प्रासंगिकता को कम कर दिया, जिससे यह ऐतिहासिक संरचना उपेक्षा का शिकार हो गई।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: एवीएम नहर का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर: इसका उद्देश्य कन्याकुमारी और थुवनांतपुरम के बीच तटीय गांवों को जोड़ना और अंतर्देशीय जल परिवहन को बढ़ावा देना है।

प्रश्न 2: इसे राष्ट्रीय जलमार्ग के रूप में क्यों जाना जाता है?
उत्तर: केंद्र सरकार ने इसके रणनीतिक महत्व को देखते हुए इसे 'राष्ट्रीय जलमार्ग-13' का दर्जा दिया है।

Did You Know?: एवीएम नहर को यदि पूरी तरह बहाल कर दिया गया, तो यह दक्षिण भारत के सबसे महत्वपूर्ण तटीय पर्यटन गलियारों में से एक बन सकती है।