पटना में गंगा का जलस्तर बढ़ने से जेपी गंगा पथ पर स्थित 500 से अधिक दुकानें पानी में डूब गई हैं। स्थानीय दुकानदारों ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और नगर निगम पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए भारी नुकसान की आशंका जताई है।

  • गंगा का जलस्तर बढ़ने से जेपी गंगा पथ के फूड हब में आई बाढ़।
  • 500 से अधिक दुकानों का सामान पानी में डूबा, आजीविका पर संकट।
  • दुकानदारों ने नगर निगम और राज्य सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा।
  • वेंडिंग जोन में सुविधाओं के अभाव और बदबू से ग्राहक नहीं आ रहे।

बिहार की राजधानी पटना में गंगा नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने के कारण जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। दीघा घाट के पास गंगा का पानी अब तट से महज आधा किलोमीटर की दूरी पर है, जिसके चलते शहर का सबसे बड़ा फूड हब, जेपी गंगा पथ, जलमग्न होने की कगार पर है। स्थिति इतनी गंभीर है कि लगभग 500 से अधिक दुकानों तक पानी पहुंच चुका है, जिससे छोटे व्यापारियों का भारी आर्थिक नुकसान हुआ है।

स्थानीय दुकानदारों का आरोप है कि प्रशासन ने उन्हें वैकल्पिक व्यवस्था का आश्वासन तो दिया, लेकिन धरातल पर कुछ नहीं हुआ। चाट विक्रेता नंदकिशोर दास ने बताया कि जब वे जेपी गंगा पथ के ऊपर दुकान लगाने गए, तो नगर निगम के कर्मचारियों ने उन्हें डरा-धमकाकर वहां से हटा दिया। वर्तमान में, गंदगी और बदबू के बीच नीचे की ओर दुकान लगाने को मजबूर दुकानदार अब अपनी रोजी-रोटी के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows कि पटना का जेपी गंगा पथ न केवल पर्यटन बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। जलस्तर बढ़ने से न केवल छोटे वेंडर्स का पूंजीगत नुकसान हो रहा है, बल्कि यह शहरी नियोजन और आपदा प्रबंधन की विफलता को भी दर्शाता है। यदि समय रहते वेंडिंग जोन में बुनियादी सुविधाएं (लाइट, साफ-सफाई) नहीं दी गईं, तो यह संकट एक बड़े सामाजिक असंतोष में बदल सकता है।

"सरकार और प्रशासन की अनदेखी के कारण गरीब वेंडर अब अपने ही राज्य में असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।"

बटाटापुरी के दुकानदार मुन्ना महतो ने अपना दर्द साझा करते हुए कहा कि पुलिस और प्रशासन की सख्ती के कारण वे कहीं भी दुकान नहीं लगा पा रहे हैं। अटल पथ के पास प्रस्तावित वेंडिंग जोन में न तो रोशनी की व्यवस्था है और न ही स्वच्छता की। नाले में पड़े कचरे और सड़ते हुए जानवरों की बदबू के कारण ग्राहक वहां जाने से कतरा रहे हैं।

पाव भाजी विक्रेता भोला शर्मा ने बताया कि पिछले 45 दिनों से वे केवल आश्वासन सुन रहे हैं। उनका काफी सामान पानी में डूब चुका है और वे पहले से ही कर्ज के बोझ तले दबे हुए हैं। वहीं, लिट्टी चोखा दुकानदार प्रमोद साव ने बताया कि पानी के बहाव के साथ बहकर आई पत्थर-गिट्टी दुकानों के पास जमा हो रही है, जिससे काम करना दूभर हो गया है।

Did You Know?: पटना का जेपी गंगा पथ (मरीन ड्राइव) बिहार के सबसे आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में से एक है, जो पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए बनाया गया था।

Frequently Asked Questions

1. गंगा पथ पर कितने दुकानदारों को नुकसान हुआ है?
रिपोर्ट्स के अनुसार, लगभग 500 से अधिक दुकानों तक पानी पहुंच गया है और कई दुकानदारों का सामान डूब गया है।

2. नगर निगम का इस मामले पर क्या कहना है?
नगर निगम का कहना है कि अभी तक कोई गंभीर संकट की स्थिति नहीं आई है और फिलहाल दुकानदारों को हटाया या बसाया नहीं जा रहा है।

समस्यादुकानदारों का अनुभव
वैकल्पिक स्थानलाइट और सफाई का अभाव
प्रशासनिक कार्रवाईनगर निगम द्वारा हटाने का डर
आर्थिक स्थितिसामान डूबने से भारी नुकसान