उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने अरनमुला उथ्रट्टति नौका दौड़ का उद्घाटन करते हुए केरल की परंपराओं और कलाओं के संरक्षण पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि यह उत्सव देश की सांस्कृतिक एकता का एक सशक्त माध्यम है।

  • अरनमुला उथ्रट्टति नौका दौड़ केरल की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान का अभिन्न अंग है।
  • उपराष्ट्रपति ने पारंपरिक कलाओं और शिल्प (जैसे अरनमुला कण्णाडी) को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया।
  • उन्होंने कहा कि परंपरा और आधुनिकता एक साथ सह-अस्तित्व में रह सकते हैं।

कोल्लम/पतनमथिट्टा: केरल की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और अटूट परंपराओं के प्रतीक, अरनमुला उथ्रट्टति नौका दौड़ का रविवार को भव्य उद्घाटन किया गया। इस अवसर पर बोलते हुए, उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने कहा कि यह आयोजन न केवल एक खेल प्रतियोगिता है, बल्कि यह केरल की गहरी भक्ति और सांस्कृतिक जड़ों का प्रतिबिंब है।

उपराष्ट्रपति ने अरनमुला के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इस शहर का नाम प्राचीन पार्थसारथी मंदिर के नाम पर रखा गया है, जिसका इतिहास लगभग 1,800 वर्ष पुराना है। उन्होंने इस बात पर भी गर्व व्यक्त किया कि यह क्षेत्र जीआई-टैग प्राप्त प्रसिद्ध 'अरनमुला कण्णाडी' (धातु के दर्पण) का जन्मस्थान है।

सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण

सांस्कृतिक विरासत को सुरक्षित रखने की आवश्यकता पर जोर देते हुए, उपराष्ट्रपति ने पारंपरिक कला और शिल्प को बढ़ावा देने की वकालत की। उन्होंने पल्लियोडम (पारंपरिक नौकाओं) की सुंदरता और उनमें सवार सौ से अधिक नाविकों के अद्भुत समन्वय की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि इन नौकाओं का संचालन शारीरिक सहनशक्ति और असाधारण शिल्प कौशल का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।

परंपरा और आधुनिकता परस्पर विरोधी नहीं हैं, बल्कि वे स्तंभ हैं जो एक साथ मिलकर समाज को मजबूती प्रदान कर सकते हैं।

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, इस प्रकार के आयोजन न केवल स्थानीय पर्यटन को बढ़ावा देते हैं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भारत की 'सॉफ्ट पावर' को भी सुदृढ़ करते हैं। उपराष्ट्रपति ने कहा कि अरनमुला की इस दौड़ ने सदियों से दुनिया भर के पर्यटकों को आकर्षित किया है, जिससे यह क्षेत्र वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर अपनी विशिष्ट पहचान बनाए हुए है।

राष्ट्रीय एकता का सूत्र

उपराष्ट्रपति ने उल्लेख किया कि त्योहार लोगों को एकजुट करने और सामाजिक संबंधों को मजबूत करने का कार्य करते हैं। उन्होंने भौगोलिक और भाषाई विविधताओं के बावजूद एक साझा संस्कृति के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने उदाहरण दिया कि जहाँ केरल में ओणम मनाया जाता है, वहीं ओडिशा में पुरी की रथ यात्रा आयोजित की जाती है, जो भारत की विविधता में एकता को दर्शाती है।

अंत में, उन्होंने राज्यसभा के उस ऐतिहासिक सत्र का भी उल्लेख किया जिसमें राज्य का नाम आधिकारिक रूप से बदलकर 'केरलम' करने के विधेयक को सफलतापूर्वक पारित किया गया था, जो राज्य की पहचान को और अधिक सशक्त बनाता है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

अरनमुला उथ्रट्टति नौका दौड़ पम्पा नदी में आयोजित की जाती है और यह ओणम उत्सव का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह केवल एक दौड़ नहीं है, बल्कि भगवान के प्रति समर्पण का एक अनुष्ठान है, जहाँ प्रत्येक नाव को एक पवित्र इकाई माना जाता है।

Did You Know?: अरनमुला कण्णाडी एक विशेष धातु मिश्रण से बना दर्पण है, जो अपनी अद्वितीय चमक और स्थायित्व के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है।

Frequently Asked Questions

1. अरनमुला उथ्रट्टति नौका दौड़ कहाँ आयोजित की जाती है?
यह केरल के पतनमथिट्टा जिले में पम्पा नदी पर आयोजित की जाती है।

2. अरनमुला कण्णाडी क्या है?
यह एक पारंपरिक धातु का दर्पण है जिसे भौगोलिक संकेत (GI) टैग प्राप्त है।