चेन्नई और तमिलनाडु के अन्य जिलों में सड़कों के बार-बार निर्माण से उनकी ऊंचाई बढ़ गई है, जिससे घर जलमग्न हो रहे हैं और निवासियों को भारी नुकसान हो रहा है। अरप्पर इयाक्कम की एक रिपोर्ट ने इस गंभीर समस्या को उजागर किया है।
- चेन्नई की 42 सड़कों और अन्य जिलों की 203 सड़कों में ऊंचाई के उल्लंघन की पहचान की गई है।
- सड़कों की बढ़ती ऊंचाई के कारण घर सड़क के स्तर से नीचे चले गए हैं, जिससे बाढ़ का खतरा बढ़ गया है।
- ठेकेदार अनिवार्य 'कोल्ड मिलिंग' प्रक्रिया को दरकिनार कर रहे हैं, जिससे हर नई परत सड़क को ऊंचा कर देती है।
- निवासियों को अपने घरों के फर्श ऊंचे करने के लिए ₹40 लाख तक खर्च करने पड़ रहे हैं।
तमिलनाडु के विभिन्न हिस्सों, विशेष रूप से चेन्नई में, सड़क निर्माण की लापरवाही ने एक गंभीर संकट पैदा कर दिया है। स्थानीय निवासियों ने शिकायत की है कि नई बिछाई गई सड़कों की ऊंचाई मानक नियमों का उल्लंघन कर रही है। भ्रष्टाचार विरोधी संस्था अरप्पर इयाक्कम (Arappor Iyakkam) द्वारा प्रस्तुत एक विस्तृत रिपोर्ट के अनुसार, चेन्नई की 42 सड़कों और अन्य जिलों के 203 सड़क खंडों में ऊंचाई के गंभीर उल्लंघन पाए गए हैं।
इस समस्या का दस्तावेजीकरण करने के लिए 157 स्वयंसेवकों ने GPS-टैग वाली तस्वीरों का उपयोग किया है। रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि C.P. रामसामी रोड, T.T.K. रोड, और अशोक नगर जैसे प्रमुख इलाकों में यह समस्या सबसे अधिक है। अरप्पर इयाक्कम के संयोजक जयराम वेंकटेशन ने चेतावनी दी है कि मुगालिवाक्कम जैसे क्षेत्रों में घर अब सड़क के स्तर से एक से दो फीट नीचे चले गए हैं।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण दर्शाता है कि यह केवल बुनियादी ढांचे का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह शहरी नियोजन की एक बड़ी विफलता है। जब सड़कों की ऊंचाई बढ़ती है, तो वे एक 'फनल' (कीप) की तरह काम करती हैं, जो मानसून के दौरान बारिश के पानी और सीवेज को सीधे निचले इलाकों में स्थित घरों में भेज देती हैं। इससे न केवल संपत्ति का नुकसान होता है, बल्कि बुजुर्गों और विकलांगों के लिए भी घरों में प्रवेश करना खतरनाक हो जाता है।
सड़कों की ऊंचाई बढ़ने से स्टॉर्म वाटर ड्रेन नेटवर्क बिगड़ जाता है और घरों में बाढ़ का खतरा बढ़ जाता है।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि ठेकेदार लागत बचाने के लिए अनिवार्य 'कोल्ड मिलिंग' (पुरानी सड़क की ऊपरी परत हटाना) की प्रक्रिया को छोड़ देते हैं। इसके परिणामस्वरूप, हर नई सड़क की परत सड़क के स्तर को कृत्रिम रूप से ऊपर उठा देती है। इसके अलावा, मैनहोल और यूटिलिटी चैंबर भी सड़क के नीचे धंस जाते हैं, जिससे दोपहिया वाहन दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
शहरी क्षेत्रों में सड़क निर्माण के दौरान 'कोल्ड मिलिंग' एक मानक प्रक्रिया है ताकि नई डामर की परत जोड़ने से सड़क की मोटाई और ऊंचाई नियंत्रित रहे। यदि इस प्रक्रिया को छोड़ दिया जाता है, तो सड़क का स्तर लगातार बढ़ता रहता है, जो लंबे समय में जल निकासी व्यवस्था को पूरी तरह ध्वस्त कर देता है।
Frequently Asked Questions
1. सड़कों की ऊंचाई बढ़ने का मुख्य कारण क्या है?
मुख्य कारण ठेकेदारों द्वारा अनिवार्य 'कोल्ड मिलिंग' प्रक्रिया को न अपनाना है, जिससे हर बार नई परत सड़क को ऊंचा कर देती है।
2. इससे निवासियों को क्या नुकसान हो रहा है?
निवासियों के घर जलमग्न हो रहे हैं, संपत्ति का नुकसान हो रहा है और बुजुर्गों के लिए आवाजाही मुश्किल हो गई है।