संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) 1 से 7 सितंबर तक चंडीगढ़ और मोहाली में एक सप्ताह लंबे धरने की तैयारी कर रहा है। किसानों की मुख्य मांगों में कानूनी MSP की गारंटी और नदी जल समझौतों को रद्द करना शामिल है।

  • विरोध प्रदर्शन 1 सितंबर से 7 सितंबर तक चंडीगढ़/मोहाली के सेक्टर 48-C में होगा।
  • मुख्य मांगों में सभी फसलों के लिए कानूनी MSP और नदी जल समझौतों को समाप्त करना शामिल है।
  • जालंधर, लुधियाना, सरहिंद और राजपुरा से आने वाले किसानों के लिए विस्तृत रूट प्लान जारी।
  • BKU उग्रान इस धरने का हिस्सा नहीं होगा, बल्कि गांव स्तर पर अलग कार्यक्रम चलाएगा।

संयुक्त किसान मोर्चा (SKM), जिसमें 32 किसान संगठन शामिल हैं, ने चंडीगढ़ और मोहाली के ट्राई-सिटी क्षेत्र में एक सप्ताह लंबे विरोध प्रदर्शन की घोषणा की है। 1 सितंबर से 7 सितंबर तक चलने वाला यह धरना सरकार पर कृषि और क्षेत्रीय मुद्दों पर दबाव बनाने के लिए आयोजित किया जा रहा है। यह प्रदर्शन ऐसे समय में हो रहा है जब पंजाब सरकार पहले से ही कर्मचारी यूनियनों के आंदोलन से जूझ रही है।

SKM की राष्ट्रीय समन्वय समिति के सदस्य रमिंदर सिंह पटियाला के अनुसार, प्रशासन ने सेक्टर 48-C में विरोध स्थल को मंजूरी दे दी है। यह क्षेत्र IISER टी-पॉइंट से ट्रिब्यून चौक की ओर जाने वाली सड़क पर स्थित है। व्यवस्था बनाए रखने के लिए, SKM ने एक विस्तृत रूट मैप जारी किया है। जालंधर और लुधियाना की ओर से आने वाले किसानों को गोपाल स्वीट्स चौक से एयरपोर्ट रोड लेने को कहा गया है, जबकि सरहिंद से आने वाले किसान लानड्रान चौक और गुरुद्वारा सोहना साहिब के रास्ते आएंगे।

तैयारियां बड़े पैमाने पर की जा रही हैं, जिसमें राशन और आवश्यक सामग्री ले जाने के लिए सैकड़ों ट्रैक्टर-ट्रॉली और ट्रकों को जुटाया जा रहा है। पार्किंग के लिए बेस्टेक स्क्वायर मॉल चौराहे के आगे बाईं ओर की तीन लेन वाली सड़क का उपयोग किया जाएगा। अतिरिक्त वाहनों के लिए बावा लाइट हाउस रोड (नया एयरपोर्ट रोड) और मोहाली गोल्फ क्लब जैसे स्थानों की पहचान की गई है।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि यह विरोध प्रदर्शन केवल फसल की कीमतों के बारे में नहीं है, बल्कि यह क्षेत्रीय पहचान और आर्थिक अस्तित्व का एक जटिल मिश्रण है। भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (BBMB) में पंजाब के प्रतिनिधित्व की मांग और नदी जल समझौतों को रद्द करने की जिद यह दर्शाती है कि किसान अब अपने प्राकृतिक संसाधनों पर पूर्ण नियंत्रण चाहते हैं। स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के आधार पर कानूनी MSP की मांग यह संकेत देती है कि किसान अब अस्थायी राहत के बजाय व्यवस्थागत बदलाव चाहते हैं।

कृषि संकट और क्षेत्रीय जल विवादों का मिलन एक ऐसा राजनीतिक माहौल बनाता है जो राज्य प्रशासन की स्थिरता को चुनौती दे सकता है।

मांगों में केवल खेती ही नहीं, बल्कि विधायी बदलाव भी शामिल हैं। SKM ने बांध सुरक्षा अधिनियम को निरस्त करने, आपदा प्रबंधन अधिनियम 2024 को वापस लेने और बिजली एवं बीज विधेयक 2025 को रद्द करने की मांग की है। इसके अलावा, संघ ने अमेरिका और यूरोपीय देशों के साथ किए जा रहे मुक्त व्यापार समझौतों का कड़ा विरोध किया है, क्योंकि उन्हें डर है कि इससे स्थानीय बाजार में सस्ते आयात बढ़ेंगे और कीमतें गिरेंगी।

हालांकि अधिकांश संगठन एकजुट हैं, लेकिन सहयोगी सदस्य BKU उग्रान ने एक अलग रास्ता चुना है। वे मुख्य धरने में शामिल होने के बजाय गांव स्तर पर स्वतंत्र कार्यक्रम आयोजित करेंगे। यह विभाजन किसान आंदोलन के भीतर केंद्रीकृत विरोध बनाम जमीनी लामबंदी की प्रभावशीलता पर एक आंतरिक वैचारिक मतभेद को दर्शाता है।

क्या आप जानते हैं?: स्वामीनाथन आयोग ने सिफारिश की थी कि MSP उत्पादन की औसत लागत से कम से कम 50% अधिक होनी चाहिए ताकि किसानों को उचित लाभ मिल सके।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: विरोध प्रदर्शन स्थल वास्तव में कहाँ स्थित है?
विरोध प्रदर्शन सेक्टर 48-C में, IISER टी-पॉइंट से ट्रिब्यून चौक की ओर जाने वाली सड़क पर केंद्रित है, जिसका कुछ हिस्सा मोहाली में आता है।

प्रश्न 2: SKM की मुख्य आर्थिक मांगें क्या हैं?
मुख्य मांगों में सभी फसलों के लिए कानूनी MSP की गारंटी, गन्ने का मूल्य 500 रुपये प्रति क्विंटल और ग्रामीण श्रमिकों के लिए 10,000 रुपये मासिक वृद्धावस्था पेंशन शामिल है।