पश्चिम बंगाल स्कूल सर्विस कमीशन (SSC) ने शिक्षक भर्ती प्रक्रिया पूरी करने के लिए सुप्रीम कोर्ट से अगले साल मई तक का समय मांगा है। आयोग ने लाखों शिकायतों और ओबीसी आरक्षण विवाद का हवाला देते हुए देरी का कारण बताया है।
- पश्चिम बंगाल SSC ने शिक्षक भर्ती प्रक्रिया पूरी करने के लिए 31 मई 2025 तक का समय मांगा है।
- परीक्षा के 'आंसर की' पर 1,29,000 से अधिक विषयवार शिकायतें दर्ज की गई हैं।
- ओबीसी आरक्षण और प्रमाणपत्रों की वैधता को लेकर कानूनी पेच फंसा हुआ है।
- सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को न्यायमूर्ति संजय कुमार और न्यायमूर्ति सचिन सचदेव की पीठ सुनवाई करेगी।
पश्चिम बंगाल में 26,000 शिक्षकों की नियुक्ति का मामला एक बार फिर कानूनी गलियारों में गर्मा गया है। स्कूल सर्विस कमीशन (SSC) ने सुप्रीम कोर्ट से भर्ती प्रक्रिया को अंतिम रूप देने के लिए अतिरिक्त समय की मांग की है। आयोग का कहना है कि वर्तमान समयसीमा सोमवार को समाप्त हो रही है, लेकिन प्रक्रिया को सुचारू रूप से पूरा करने के लिए उन्हें 31 मई 2025 तक का समय चाहिए।
लाखों शिकायतों का अंबार और तकनीकी चुनौतियां
कमीशन के अनुसार, पिछले साल आयोजित की गई शिक्षक भर्ती परीक्षा के 'आंसर की' (उत्तर कुंजी) को लेकर भारी विवाद खड़ा हो गया है। अब तक 1,29,000 से अधिक विषयवार शिकायतें प्राप्त हुई हैं, जिनकी जांच के लिए एक विशेष रिव्यू कमेटी का गठन किया गया है। इसके अलावा, आयोग ने तकनीकी समस्याओं का भी जिक्र किया है, जिसमें 5 लाख से अधिक OMR शीट को तीन बार स्कैन करना पड़ा, जिससे प्रक्रिया में और देरी हुई।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows कि यह मामला केवल शिक्षकों की नियुक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह राज्य की प्रशासनिक स्थिरता और भर्ती प्रक्रियाओं की पारदर्शिता पर भी गहरा सवाल खड़ा करता है। पूर्ववर्ती तृणमूल सरकार के दौरान हुए बड़े भ्रष्टाचार कांड के बाद, सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में यह प्रक्रिया चल रही है, जिससे लाखों युवाओं का भविष्य दांव पर लगा है।
भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और कानूनी जटिलताओं के बीच संतुलन बनाना आयोग के लिए सबसे बड़ी चुनौती है।
भर्ती में देरी का एक अन्य बड़ा कारण प्रशासनिक बदलाव भी है। आयोग ने बताया कि विधानसभा चुनाव के बाद पूर्व चेयरमैन और पांच ज़ोन के अधिकारियों के इस्तीफे के कारण काम प्रभावित हुआ है।
ओबीसी आरक्षण का कानूनी पेच
एक और महत्वपूर्ण मुद्दा ओबीसी आरक्षण से जुड़ा है। कोलकाता हाई कोर्ट ने हाल ही में पूर्ववर्ती सरकार के नियमों के तहत जारी ओबीसी प्रमाणपत्रों की वैधता पर सवाल उठाए हैं। अदालत ने स्पष्ट किया है कि ओबीसी-ए और ओबीसी-बी का विभाजन अब मान्य नहीं है, जिससे कई उम्मीदवारों के वर्गीकरण पर संकट आ गया है। आयोग अब राज्य सरकार से इस संबंध में स्पष्ट दिशा-निर्देशों का इंतजार कर रहा है।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: आयोग ने सुप्रीम कोर्ट से कितना समय मांगा है?
उत्तर: आयोग ने भर्ती प्रक्रिया पूरी करने के लिए अगले वर्ष 31 मई 2025 तक का समय मांगा है।
प्रश्न 2: भर्ती प्रक्रिया में देरी का मुख्य कारण क्या है?
उत्तर: मुख्य कारणों में 1.29 लाख शिकायतें, OMR स्कैनिंग की समस्या और ओबीसी आरक्षण से जुड़े कानूनी विवाद शामिल हैं।