एनिमल एंड नेचर एथिक्स कम्युनिटी (ANEC) ने वलयार-कंजिकोड रेल मार्ग पर हाथियों की लगातार हो रही मौतों को रोकने के लिए केरल सरकार को कानूनी नोटिस भेजा है और AI-आधारित चेतावनी प्रणाली की मांग की है।
- ANEC ट्रस्ट ने 12 अगस्त को एक हथिनी और उसके बच्चे की मौत के बाद केरल सरकार को कानूनी नोटिस भेजा।
- तमिलनाडु की तर्ज पर AI-आधारित एलीफेंट डिटेक्शन और अर्ली-वार्निंग सिस्टम को पूरी तरह लागू करने की मांग।
- वन्यजीव संरक्षण के लिए आवंटित ₹221.38 करोड़ में से केवल ₹73.55 करोड़ के उपयोग का आरोप।
- IIT पलक्कड़ और खनन परियोजनाओं के कारण हाथियों के आवास के विखंडन पर चिंता।
कोच्चि स्थित वन्यजीव संरक्षण संगठन एनिमल एंड नेचर एथिक्स कम्युनिटी (ANEC) ट्रस्ट ने वलयार-कंजिकोड रेलवे कॉरिडोर पर हाथियों की recurring मौतों को लेकर राज्य सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। ट्रस्ट ने सरकार को एक कानूनी नोटिस भेजकर वन्यजीवों की रक्षा करने के संवैधानिक और वैधानिक कर्तव्य की याद दिलाई है।
यह कानूनी कदम 12 अगस्त को 'विश्व हाथी दिवस' के दिन हुई एक दुखद घटना के बाद उठाया गया है, जब मंगलुरु-चेन्नई सुपरफास्ट एक्सप्रेस की चपेट में आने से एक हथिनी और उसके बच्चे की मौत हो गई। ANEC के अनुसार, पिछले दो दशकों में इस विशेष रेल खंड पर ट्रेन दुर्घटनाओं में 35 हाथियों की जान जा चुकी है, जिससे यह क्षेत्र वन्यजीव मृत्यु का एक 'हॉटस्पॉट' बन गया है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि यह केवल एक तकनीकी विफलता नहीं, बल्कि प्रशासनिक लापरवाही है। जहाँ तमिलनाडु ने AI-आधारित प्रणाली के माध्यम से 9,000 से अधिक हाथियों को सुरक्षित पार कराया है, वहीं केरल में यह प्रणाली अभी भी 'परीक्षण' (testing) चरण में है। यह स्पष्ट करता है कि राज्य सरकार और रेलवे के बीच समन्वय की भारी कमी है।
AI चेतावनी प्रणालियों को 'परीक्षण' से 'परिचालन' मोड में न लाना वन्यजीवों के लिए मृत्युदंड के समान है।
नोटिस में केवल रेल दुर्घटनाओं का ही जिक्र नहीं है, बल्कि औद्योगिक विकास के खतरों पर भी प्रकाश डाला गया है। ANEC ने मालाबार सीमेंट्स की पंडराथु चूना पत्थर खदानों और धोनी वन क्षेत्र के पास ग्रेनाइट खदानों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। साथ ही, IIT पलक्कड़ और प्रस्तावित ग्रीनफील्ड हाईवे के लिए वन भूमि के डायवर्जन का विरोध किया गया है, क्योंकि इससे हाथियों के प्राकृतिक गलियारे नष्ट हो रहे हैं।
वित्तीय अनियमितताओं पर सवाल उठाते हुए, ट्रस्ट ने नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) के ऑडिट का हवाला दिया। आंकड़ों के अनुसार, 2020 से 2025 के बीच केंद्र सरकार से वन्यजीव आवासों और प्रोजेक्ट टाइगर/एलीफेंट के लिए लगभग ₹221.38 करोड़ प्राप्त हुए, लेकिन इसमें से केवल ₹73.55 करोड़ ही खर्च किए गए। ANEC ने इस शेष राशि के उपयोग न होने पर स्पष्टीकरण मांगा है।
| विशेषता | तमिलनाडु प्रणाली | केरल (वलयार) प्रणाली |
|---|---|---|
| स्थिति | पूरी तरह कार्यात्मक | परीक्षण के अधीन |
| प्रभाव | 9,481 सुरक्षित क्रॉसिंग | लगातार मौतें |
| मृत्यु दर | शून्य मौतें | 35 मौतें (20 वर्ष) |
ट्रस्ट ने मांग की है कि जब तक स्थायी चेतावनी प्रणाली चालू नहीं हो जाती, तब तक रात में गश्त, वास्तविक समय संचार और ट्रेनों की गति पर नियंत्रण जैसे अंतरिम उपाय लागू किए जाएं। ANEC ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने त्वरित कार्रवाई नहीं की, तो वह केरल उच्च न्यायालय और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) का दरवाजा खटखटाएगा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: AI-आधारित एलीफेंट डिटेक्शन सिस्टम क्या है?
यह एक ऐसी तकनीक है जो सेंसर और AI का उपयोग कर पटरियों के पास हाथियों की पहचान करती है और रेलवे अधिकारियों को तुरंत चेतावनी भेजती है।
प्रश्न 2: वलयार में आवास हानि के मुख्य कारण क्या हैं?
पंडराथु चूना पत्थर खनन, धोनी वन की खदानें और IIT पलक्कड़ के लिए वन भूमि का उपयोग मुख्य कारण बताए गए हैं।