रेल मंत्रालय के आरडीएसओ (RDSO) ने सकलेशपुर-सुब्रह्मण्य रोड घाट खंड पर ट्रायल रन सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है, जिससे बेंगलुरु और तटीय कर्नाटक के बीच प्रीमियम कनेक्टिविटी का रास्ता साफ हो गया है।

  • आरडीएसओ ने 12 से 19 अगस्त तक सकलेशपुर-सुब्रह्मण्य रोड घाट खंड पर सफल परीक्षण किया।
  • पहाड़ी इलाकों में सुरक्षा के लिए ट्रेनों में 'ऑटोमैटिक इमरजेंसी ब्रेक' (AEB) सिस्टम लगाया जाएगा।
  • यात्रा में लगभग 8 घंटे का समय लगने की उम्मीद है, जो पारंपरिक ट्रेनों की तुलना में कम है।

बेंगलुरु और मंगलुरु के बीच वंदे भारत (VB) एक्सप्रेस सेवा की शुरुआत अब हकीकत के करीब है। रेल मंत्रालय के तहत अनुसंधान, डिजाइन और मानक संगठन (RDSO) ने हसन-मंगलुरु लाइन के चुनौतीपूर्ण सकलेशपुर-सुब्रह्मण्य रोड घाट खंड पर ट्रायल रन सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। 12 से 19 अगस्त के बीच किए गए ये परीक्षण भारत के सबसे कठिन रेल मार्गों में से एक पर ट्रेन की सुरक्षा और स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए अत्यंत आवश्यक थे।

इस परीक्षण में 20 कोच वाले वंदे भारत रैक का उपयोग किया गया था, जिसमें ऑटोमैटिक इमरजेंसी ब्रेक (AEB) सिस्टम लगा था। रेलवे सुरक्षा आयुक्त के आदेशानुसार यह सिस्टम अनिवार्य है, क्योंकि इस घाट खंड की ढलान 1 में 50 है। AEB सिस्टम यह सुनिश्चित करता है कि ट्रेन इस संवेदनशील क्षेत्र में 30 किमी प्रति घंटे की गति सीमा को पार न करे, जिससे पहाड़ी इलाकों में दुर्घटनाओं का जोखिम कम हो जाता है।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

BozokMedia के विश्लेषण के अनुसार, इस विशिष्ट मार्ग पर AEB तकनीक का एकीकरण केवल एक सुरक्षा उपाय नहीं है, बल्कि दक्षिण पश्चिम रेलवे (SWR) के लिए एक रणनीतिक आवश्यकता है। घाटों में गति नियंत्रण को स्वचालित करके, रेलवे यात्री सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए एक सुसंगत समय सारणी बनाए रख सकता है। यह कदम तटीय कर्नाटक को राज्य की राजधानी से जोड़ने की पुरानी मांग को पूरा करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

पश्चिमी घाटों में AEB-युक्त रैक की सफल तैनाती पहाड़ी गलियारों में सेमी-हाई-स्पीड रेल संचालन के लिए एक नया सुरक्षा मानक स्थापित करती है।

मैसूर मंडल के रेल प्रबंधक मुदित मित्तल के अनुसार, दक्षिण पश्चिम रेलवे अब चेन्नई स्थित इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (ICF) से AEB सिस्टम से लैस 16-कोच वाले रैक का इंतजार कर रहा है। परीक्षण के लिए उपयोग किया गया रैक केवल टेस्टिंग के लिए था, जबकि वास्तविक परिचालन रैक को इस मार्ग की विशिष्ट आवश्यकताओं के अनुसार तैयार किया जाएगा।

तकनीकी सफलता के बावजूद, रेल मंत्रालय ने अभी तक अंतिम मार्ग, समय और ठहराव (halts) की घोषणा नहीं की है। अनुमान है कि इस यात्रा में लगभग आठ घंटे लगेंगे। इसमें बेंगलुरु से सकलेशपुर तक 3.5 घंटे, घाट खंड के लिए 2.5 घंटे और सुब्रह्मण्य रोड से मंगलुरु तक 2 घंटे शामिल हैं। यह पारंपरिक एक्सप्रेस ट्रेनों द्वारा लिए जाने वाले 9.5 घंटों की तुलना में काफी कम है।

सेवा के अंतिम गंतव्य को लेकर भी चर्चाएं जारी हैं। जहां कुछ यात्री बेंगलुरु-मंगलुरु सीधी सेवा की मांग कर रहे हैं, वहीं कुछ का सुझाव है कि इसे करवार या मडगाँव तक विस्तारित किया जाए ताकि पूरे तटीय कर्नाटक को कवर किया जा सके। ऐसी भी चर्चा है कि मौजूदा मंगलुरु सेंट्रल-मडगाँव वंदे भारत एक्सप्रेस को इस प्रस्तावित ट्रेन के साथ मर्ज किया जा सकता है।

क्या आप जानते हैं?: सकलेशपुर-सुब्रह्मण्य रोड खंड भारत के सबसे सुंदर लेकिन कठिन रेलवे मार्गों में से एक है, जिसमें कई सुरंगें और गहरी घाटियों को पार करने वाले पुल हैं।
विशेषता पारंपरिक ट्रेनें प्रस्तावित वंदे भारत
अनुमानित यात्रा समय ~9.5 घंटे ~8 घंटे
घाट सुरक्षा तकनीक मैनुअल स्पीड कंट्रोल ऑटोमैटिक इमरजेंसी ब्रेक (AEB)
सुविधा स्तर मानक प्रीमियम / सेमी-हाई स्पीड

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: बेंगलुरु-मंगलुरु वंदे भारत का संचालन कब शुरू होगा?
ट्रायल रन पूरा हो चुका है, लेकिन आधिकारिक तारीख ICF चेन्नई से रैक के आने और रेल मंत्रालय द्वारा समय सारणी की घोषणा के बाद तय होगी।

प्रश्न 2: क्या ट्रेन सभी प्रमुख स्टेशनों पर रुकेगी?
ठहराव की अंतिम सूची अभी घोषित नहीं हुई है, लेकिन उम्मीद है कि यह बेंगलुरु और मंगलुरु के बीच के प्रमुख केंद्रों को कवर करेगी।