मानसून के दौरान भूस्खलन और पत्थरों के गिरने की घटनाओं को कम करने के लिए सेंट्रल रेलवे 'वेटिवर घास' का उपयोग करेगा। यह बायो-इंजीनियरिंग समाधान बीहोर और थाल घाट जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में ट्रेनों के सुरक्षित संचालन को सुनिश्चित करेगा।
- सेंट्रल रेलवे बीहोर और थाल घाट क्षेत्रों में मिट्टी के कटाव को रोकने के लिए वेटिवर घास का उपयोग करेगा।
- वेटिवर घास की जड़ें 3-4 मीटर गहरी होती हैं, जो मिट्टी को मजबूती से पकड़कर भूस्खलन को रोकती हैं।
- यह प्रकृति-आधारित समाधान पारंपरिक कंक्रीट संरचनाओं की तुलना में कम खर्चीला और अधिक प्रभावी है।
भारतीय रेलवे के सेंट्रल रेलवे जोन ने मानसून के दौरान होने वाली गंभीर समस्याओं, जैसे कि भूस्खलन और ट्रैक पर पत्थरों के गिरने की घटनाओं को रोकने के लिए एक अभिनव दृष्टिकोण अपनाया है। रेलवे प्रशासन अब घाट क्षेत्रों में वेटिवर घास (Chrysopogon zizanioides) के बड़े पैमाने पर रोपण की योजना बना रहा है।
सेंट्रल रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी स्वप्निल निला ने बताया कि बीहोर घाट (कर्जत-लोनावला) और थाल घाट (कसार-इगतपुरी) जैसे क्षेत्र भारी बारिश के दौरान मिट्टी के कटाव और सतही बहाव के प्रति अत्यधिक संवेदनशील होते हैं। ये घटनाएं न केवल ट्रेनों के समय पर संचालन में बाधा डालती हैं, बल्कि यात्रियों की सुरक्षा के लिए भी बड़ा खतरा पैदा करती हैं।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि रेलवे का यह कदम 'इंजीनियरिंग' से 'बायो-इंजीनियरिंग' की ओर एक महत्वपूर्ण बदलाव है। पारंपरिक कंक्रीट की दीवारों के बजाय जीवित पौधों का उपयोग करना न केवल पर्यावरण के अनुकूल है, बल्कि यह समय के साथ और अधिक मजबूत होता जाता है। यह दृष्टिकोण बुनियादी ढांचे के रखरखाव की लागत को कम करने और पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में मदद करेगा।
वेटिवर घास अपनी गहरी और घनी रेशेदार जड़ों के लिए जानी जाती है, जो 12 से 24 महीनों के भीतर 3 से 4 मीटर की गहराई तक जा सकती हैं। यह प्राकृतिक सुदृढीकरण मिट्टी की कतरनी प्रतिरोध (shear resistance) को लगभग 30% से 40% तक बढ़ा देता है, जिससे ढलानों के खिसकने का जोखिम काफी कम हो जाता है।
वेटिवर प्रणाली केवल एक वृक्षारोपण नहीं है, बल्कि एक जीवित इंजीनियरिंग संरचना है जो मिट्टी को बांधकर रखती है और पानी के बहाव को नियंत्रित करती है।
रेलवे ने पहले ही कुछ पायलट प्रोजेक्ट्स शुरू किए हैं। दक्षिण-पूर्वी घाट खंड में खंडाला-मंकी हिल सेक्शन में 1,050 वर्ग मीटर और ठाकुरवाड़ी केबिन-पलासधारी सेक्शन में 4,250 वर्ग मीटर क्षेत्र में यह घास लगाई गई है। इन क्षेत्रों में घास को कंटूर लाइनों में लगाया गया है ताकि पानी के बहाव को धीमा किया जा सके और गाद (silt) को रोका जा सके।
अधिकारियों के अनुसार, समय के साथ यह जमा हुआ अवसाद प्राकृतिक छतों (terraces) का निर्माण करता है, जिससे ढलानें और अधिक स्थिर हो जाती हैं। इससे न केवल ट्रैक पर मलबा गिरना कम होगा, बल्कि मानसून के दौरान ट्रेनों की समयबद्धता (punctuality) में भी सुधार होगा।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: वेटिवर घास अन्य पौधों से कैसे अलग है?
उत्तर: इसकी जड़ें अन्य घासों की तुलना में बहुत अधिक गहरी (3-4 मीटर) और घनी होती हैं, जो इसे मिट्टी के स्थिरीकरण के लिए आदर्श बनाती हैं।
प्रश्न 2: इससे यात्रियों को क्या लाभ होगा?
उत्तर: भूस्खलन और पत्थरों के गिरने की घटनाओं में कमी आएगी, जिससे मानसून में ट्रेनें अधिक सुरक्षित और समय पर चल सकेंगी।