कमजोर मानसून के कारण इस साल सलेम के ऐतिहासिक मेट्टूर बांध से पानी छोड़े जाने में देरी हुई है। मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय 1 सितंबर, 2026 को आधिकारिक तौर पर बांध के गेट खोलेंगे, जिससे तमिलनाडु के डेल्टा जिलों के किसानों को बड़ी राहत मिलेगी।

  • कमजोर मानसून के कारण मेट्टूर बांध से पानी छोड़े जाने की तारीख 12 जून से टलकर 1 सितंबर 2026 हो गई है।
  • वर्तमान में बांध का जलस्तर लगभग 90 फीट है, और धान की फसल को बचाने के लिए 45 दिनों तक पानी छोड़ा जाएगा।
  • तमिलनाडु के 12 डेल्टा जिलों की लगभग 16.05 लाख एकड़ कृषि भूमि इस ऐतिहासिक जलाशय पर निर्भर है।

तमिलनाडु के सलेम जिले में स्थित ऐतिहासिक मेट्टूर बांध से पानी छोड़े जाने में इस वर्ष मानसून की बेरुखी के कारण काफी देरी हुई है। हर साल पारंपरिक रूप से डेल्टा जिलों में धान की खेती के लिए 12 जून को पानी छोड़ा जाता है, लेकिन इस बार कम बारिश के चलते इस कार्यक्रम को आगे बढ़ाना पड़ा। अब राज्य के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय मंगलवार, 1 सितंबर 2026 को आधिकारिक रूप से बांध के गेट खोलेंगे।

वर्तमान में मेट्टूर बांध का जलस्तर लगभग 90 फीट तक पहुंच गया है। इस पानी को लगभग 45 दिनों तक छोड़ा जाएगा, जो डेल्टा क्षेत्र में धान की कुरुवई फसल को बचाने के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पानी की कमी के कारण इस साल किसान बेहद चिंतित थे, लेकिन इस घोषणा के बाद उन्हें बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

मेट्टूर बांध का गौरवशाली इतिहास

मेट्टूर बांध का निर्माण कार्य वर्ष 1925 में शुरू हुआ था और इसे 1934 में पूरा किया गया। इस विशाल परियोजना के निर्माण में लगभग 17,000 मजदूरों ने अपना योगदान दिया था। बांध के निर्माण के लिए तत्कालीन नयामबाडी और आसपास के गांवों के निवासियों को विस्थापित किया गया था। आज भी जब बांध का जलस्तर काफी नीचे चला जाता है, तो पानी में डूबा हुआ नयामबाडी का पुराना ईसाई चर्च और जलकंडेश्वरर मंदिर की नंदी मूर्ति साफ दिखाई देने लगती है।

इस बांध की परिकल्पना लगभग एक सदी पहले सर आर्थर कॉटन ने की थी, जबकि इसका डिजाइन कर्नल डब्ल्यू. एम. एलिस द्वारा तैयार किया गया था। इसका निर्माण कार्य आयरिश इंजीनियर विंसेंट हार्ट की देखरेख में हुआ था। बांध के पास स्थित सार्वजनिक पार्क का नाम कर्नल एलिस के सम्मान में 'एलिस पार्क' रखा गया है।

Why This Matters

BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि मेट्टूर बांध से पानी छोड़े जाने में देरी तमिलनाडु के कृषि क्षेत्र के लिए एक गंभीर चुनौती है। डेल्टा क्षेत्र के 12 जिले अपनी सिंचाई के लिए पूरी तरह से कावेरी के पानी पर निर्भर हैं। पानी मिलने में देरी के कारण किसानों को महंगे बोरवेल और भूजल पर निर्भर रहना पड़ रहा है, जिससे खेती की लागत बढ़ गई है और फसलों के नुकसान का खतरा भी बढ़ गया है।

मेट्टूर बांध की अधिकतम ऊंचाई 214 फीट और चौड़ाई 171 फीट है, जबकि इसकी कुल लंबाई 1,700 मीटर है। इसकी कुल भंडारण क्षमता 93.47 TMCFT (हजार मिलियन क्यूबिक फीट) है। इस बांध को मुख्य रूप से कर्नाटक में स्थित काबिनी और कृष्ण राज सागर (KRS) बांधों से पानी प्राप्त होता है।

पैरामीटरमानक समय-सारणीवर्ष 2026 की वास्तविक स्थिति
डेल्टा सिंचाई के लिए पानी छोड़ने की तिथि12 जून1 सितंबर, 2026
नहर सिंचाई के लिए पानी छोड़ने की तिथि1 अगस्तदेरी / लंबित
पानी छोड़ने के समय जलस्तरसामान्यतः 100+ फीटलगभग 90 फीट
आपूर्ति की अवधि230 दिन~45 दिन (महत्वपूर्ण अवधि)

इस बांध के पानी से तिरुचि, तंजावुर, तिरुवारुर, कुड्डालोर, नागापट्टिनम, इरोड, पुदुक्कोट्टई, अरियालुर, पेरम्बलुर, करूर, मयिलादुथुरै और नमक्कल सहित 12 जिलों की लगभग 16.05 लाख एकड़ कृषि भूमि को सीधा लाभ पहुंचता है।

"मेट्टूर बांध से पानी छोड़े जाने में देरी किसानों के लिए एक बड़ी परीक्षा है। सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि कुरुवई फसलों को बचाने के लिए कृषि क्षेत्रों में निर्बाध थ्री-फेस बिजली आपूर्ति प्रदान की जाए ताकि किसान बोरवेल का उपयोग कर सकें," तमिल मानिला कांग्रेस (मूपनार) के किसान विंग के अध्यक्ष सी. वरदराज ने कहा।

मेट्टूर अधिशेष जल योजना (Mettur Surplus Water Scheme)

इस पानी की समस्या के स्थायी समाधान के लिए, पूर्व मुख्यमंत्री एडप्पादी के. पलानीस्वामी ने अप्रैल 2020 में 565 करोड़ रुपये की कावेरी अधिशेष जल योजना की नींव रखी थी। इसका मुख्य उद्देश्य मेट्टूर, ओमालुर, एडप्पादी और संकरी विधानसभा क्षेत्रों के तालाबों और झीलों को बांध के अतिरिक्त पानी से भरना था। 2021 में सत्ता में आई द्रमुक (DMK) सरकार ने भी इस परियोजना को आगे बढ़ाते हुए 2023 में 108 करोड़ रुपये आवंटित किए, जिससे 2025 तक 60 झीलों में पानी पहुंचाया जा चुका है।

Did You Know?: क्या आप जानते हैं? जब मेट्टूर बांध का जलस्तर घटता है, तो पानी के भीतर डूबा हुआ ऐतिहासिक नयामबाडी चर्च और जलकंडेश्वरर मंदिर का नंदी फिर से सतह पर दिखाई देने लगते हैं, जो पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनते हैं।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: 2026 में मेट्टूर बांध से पानी छोड़े जाने में देरी क्यों हुई?
उत्तर 1: कमजोर मानसून के कारण कर्नाटक और तमिलनाडु के जलग्रहण क्षेत्रों से बांध में पानी की आवक बेहद कम रही, जिसके कारण पानी छोड़ने में देरी हुई।

प्रश्न 2: मेट्टूर बांध के पानी से कितने जिलों को लाभ मिलता है?
उत्तर 2: तमिलनाडु के कुल 12 जिलों की लगभग 16.05 lakh एकड़ कृषि भूमि को इस बांध के पानी से सीधा लाभ पहुंचता है।