आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने पूला सुब्बैया वेलीगोंडा सिंचाई परियोजना के पहले चरण का उद्घाटन किया है, जिसकी आधारशिला उन्होंने 30 साल पहले रखी थी। इस परियोजना से कृष्णा नदी का 10.70 टीएमसी फीट पानी जारी किया जाएगा, जिससे सूखाग्रस्त जिलों में 1.19 लाख एकड़ भूमि की सिंचाई और 4 लाख लोगों को पीने का पानी मिलेगा।
- मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने आधारशिला रखने के ठीक तीन दशक बाद वेलीगोंडा परियोजना के चरण-1 का उद्घाटन किया।
- परियोजना के पहले चरण से सूखाग्रस्त जिलों को 10.70 टीएमसी फीट कृष्णा पानी की आपूर्ति होगी।
- सरकार ने विस्थापित परिवारों को 48 दिनों के भीतर ₹768 करोड़ का मुआवजा देकर परियोजना को तेजी से पूरा किया।
आंध्र प्रदेश के इतिहास में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर स्थापित करते हुए, मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने पूला सुब्बैया वेलीगोंडा सिंचाई परियोजना के पहले चरण का औपचारिक उद्घाटन किया। यह क्षण इसलिए भी बेहद खास है क्योंकि श्री नायडू ने ही 5 मार्च 1996 को अविभाजित आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में इस महत्वाकांक्षी परियोजना की आधारशिला रखी थी। ठीक तीस साल बाद, उन्होंने ही इसके पहले चरण को राष्ट्र को समर्पित किया है।
यह परियोजना मार्कपुरम, प्रकाशम, नेल्लूर और कड़पा जैसे गंभीर सूखाग्रस्त और फ्लोराइड प्रभावित क्षेत्रों के लिए एक जीवनदायिनी साबित होगी। उद्घाटन समारोह को राज्य सरकार द्वारा 'वेलीगोंडा जला सिरुलु - अभिवृद्धि की रेकलु' (वेलीगोंडा जल - विकास के पंख) थीम के तहत बेहद भव्य पैमाने पर आयोजित किया गया। इस ऐतिहासिक अवसर पर मुख्यमंत्री ने परियोजना के फाटकों को खोलकर कृष्णा नदी के पानी को नल्लामला सागर में प्रवाहित किया।
कृष्णा नदी के पानी का मार्ग और तकनीकी संरचना
वेलीगोंडा परियोजना को कृष्णा नदी के पानी को श्रीशैलम जलाशय से गुरुत्वाकर्षण (ग्रेविटी) के माध्यम से मोड़ने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इस पानी को नल्लामला सागर में संग्रहित किया जाएगा और फिर मुख्य नहरों के माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों में भेजा जाएगा। दशकों से कम बारिश, गिरते भूजल स्तर और फ्लोराइड संदूषण से जूझ रहे इस क्षेत्र के लिए यह प्रणाली गेम-चेंजर साबित होने वाली है।
परियोजना के पूरी तरह से चालू होने पर, यह प्रकाशम, नेल्लूर और कड़पा जिलों के 30 मंडलों में फैले 4.47 लाख एकड़ क्षेत्र को सिंचाई की सुविधा प्रदान करेगी। इसके अतिरिक्त, फ्लोराइड प्रभावित क्षेत्रों सहित लगभग 23 लाख लोगों को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराया जाएगा। पहले चरण के तहत, 10.70 टीएमसी फीट पानी जारी किया जा रहा है जो तत्काल राहत प्रदान करेगा।
| विशेषता / पैरामीटर | चरण I (उद्घाटन) | पूर्ण परियोजना (लक्ष्य) |
|---|---|---|
| जल विमोचन (Water Release) | 10.70 टीएमसी फीट | पूर्ण क्षमता विचलन |
| सिंचाई कवरेज (Irrigation) | 1.19 लाख एकड़ | 4.47 लाख एकड़ |
| पेयजल लाभार्थी (Drinking Water) | 4 लाख लोग | 23 लाख लोग |
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि वेलीगोंडा परियोजना का समय पर पूरा होना आंध्र प्रदेश के कृषि परिदृश्य को पूरी तरह से बदल देगा। सिंचाई की सुरक्षा मिलने से किसानों की अनिश्चितता कम होगी और वे फसल विविधीकरण (Crop Diversification) की ओर बढ़ सकेंगे। भूजल पर निर्भरता कम होने से बागवानी, कृषि-प्रसंस्करण और खाद्य-प्रसंस्करण उद्योगों के विकास के नए रास्ते खुलेंगे, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर पैदा होंगे और पलायन पर रोक लगेगी।
"वेलीगोंडा परियोजना के पहले चरण का पूरा होना एक ऐतिहासिक इंजीनियरिंग उपलब्धि है जो आंध्र प्रदेश के सबसे शुष्क क्षेत्रों के सामाजिक-आर्थिक परिदृश्य को स्थायी रूप से बदल देगी।"
चुनौतियों का समाधान और पुनर्वास कार्य
1996 में अपनी स्थापना के बाद से ही इस परियोजना को कई तकनीकी, वित्तीय और निर्माण संबंधी बाधाओं का सामना करना पड़ा। नल्लामला पहाड़ियों के कठिन भूभाग में सुरंग निर्माण, फीडर नहरें, हेड रेगुलेटर और भूमि अधिग्रहण जैसी जटिल समस्याओं के कारण परियोजना में लंबा विलंब हुआ। हालांकि, 2024 में सत्ता में आने के बाद गठबंधन सरकार ने इसे सर्वोच्च प्राथमिकता दी।
परियोजना में तेजी लाने के लिए सरकार ने विस्थापित परिवारों को केवल 48 दिनों के भीतर ₹768 करोड़ का मुआवजा वितरित किया। इसके अलावा, जिन परिवारों के नाम राजपत्र में शामिल नहीं थे, उनके लिए ₹169 करोड़ की अतिरिक्त सहायता और 2019 के बाद 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले युवाओं के लिए ₹2 लाख प्रति व्यक्ति मुआवजे की घोषणा की गई, जिससे परियोजना के मार्ग की सभी बाधाएं दूर हो गईं।
Frequently Asked Questions
1. वेलीगोंडा परियोजना के पहले चरण से किन जिलों को लाभ होगा?
पहले चरण से मुख्य रूप से आंध्र प्रदेश के प्रकाशम, मार्कपुरम, नेल्लूर और कड़पा जिलों के सूखाग्रस्त क्षेत्रों को लाभ होगा, जिससे 1.19 लाख एकड़ कृषि भूमि को पानी मिलेगा।
2. इस परियोजना के लिए पानी का मुख्य स्रोत क्या है?
इस परियोजना के लिए मुख्य जल स्रोत कृष्णा नदी है, जिसके पानी को श्रीशैलम जलाशय से गुरुत्वाकर्षण के माध्यम से मोड़कर नल्लामला सागर में संग्रहित किया जाता है।