मुख्यमंत्री विजय ने मद्रास उच्च न्यायालय में एक मजबूत जवाबी हलफनामा दायर किया है, जिसमें पांच निर्वाचन क्षेत्रों में उपचुनावों पर लगी रोक को हटाने की मांग की गई है। उन्होंने इस जनहित याचिका को दुर्भावनापूर्ण और निराधार बताया है।

  • सीएम विजय ने पांच प्रमुख निर्वाचन क्षेत्रों में उपचुनावों पर रोक को चुनौती दी है।
  • रोक शुरू में लंबित चुनाव याचिकाओं के कारण लगाई गई थी।
  • विजय का तर्क है कि उनका इस्तीफा कानूनी चुनौती से पहले हुआ था, जिससे याचिका अमान्य हो जाती है।
  • चुनाव आयोग ने फिलहाल तारीखों की घोषणा करने की कोई तत्काल योजना नहीं जताई है।

तमिलनाडु का राजनीतिक परिदृश्य तब नाटकीय मोड़ पर आ गया जब मुख्यमंत्री विजय ने पांच महत्वपूर्ण निर्वाचन क्षेत्रों में उपचुनावों पर लगी रोक को चुनौती देने के लिए मद्रास उच्च न्यायालय का रुख किया। विवाद तब शुरू हुआ जब विजय ने त्रिची ईस्ट निर्वाचन क्षेत्र से अपनी सीट से इस्तीफा दे दिया, जिससे नए जनादेश की आवश्यकता पैदा हुई। यह स्थिति तब और जटिल हो गई जब कई AIADMK विधायकों ने TVK पार्टी में शामिल होने के लिए अपने पदों से इस्तीफा दे दिया।

हालांकि, तिरुनेलवेली के वेंकटचलम नामक व्यक्ति द्वारा दायर एक जनहित याचिका (PIL) में चुनाव आयोग से त्रिची ईस्ट, करूर, विरलीमलई, पेरुंदुरई और अंबसामुद्रम में उपचुनाव घोषित करने पर रोक लगाने की मांग की गई थी। याचिकाकर्ता का तर्क था कि चूंकि पिछली चुनावों के परिणामों को चुनौती देने वाली याचिकाएं अभी भी अदालत में लंबित हैं, इसलिए नए चुनाव नहीं कराए जाने चाहिए।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह कानूनी लड़ाई केवल प्रशासनिक प्रक्रिया के बारे में नहीं है, बल्कि राजनीतिक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए एक रणनीतिक कदम है। उपचुनावों में देरी के कारण लाखों नागरिक बिना विधायी आवाज के रह गए हैं, जिससे इन क्षेत्रों में शासन का शून्य पैदा हो गया है।

अपने विस्तृत जवाबी हलफनामे में, मुख्यमंत्री विजय ने याचिकाकर्ता के तर्क में एक गंभीर कालानुक्रमिक त्रुटि की ओर इशारा किया। उन्होंने कहा कि जबकि चुनाव याचिका 17 जून को दायर की गई थी, उन्होंने 10 मई को ही अपने पद से इस्तीफा दे दिया था, और अध्यक्ष ने इस्तीफा स्वीकार कर लिया था। इसलिए, उनका तर्क है कि ऐसी सीट के लिए कोई वैध चुनाव याचिका मौजूद नहीं हो सकती जो पहले से ही खाली हो।

एक बार जब इस्तीफे के माध्यम से सीट खाली हो जाती है, तो चुनाव याचिका की कानूनी वैधता समाप्त हो जाती है, जिससे उपचुनावों पर वर्तमान रोक एक प्रक्रियात्मक विसंगति बन जाती है।

इसके अलावा, सीएम की कानूनी टीम ने तर्क दिया कि याचिकाकर्ता न तो निर्वाचन क्षेत्र का मतदाता है और न ही वह व्यक्ति जिसने मूल चुनाव याचिका दायर की थी, जिससे संकेत मिलता है कि यह PIL लोकतांत्रिक प्रक्रिया को बाधित करने के गुप्त उद्देश्यों से प्रेरित है। उन्होंने अदालत से आग्रह किया कि न केवल रोक हटाई जाए, बल्कि जनहित के खिलाफ फर्जी मामला दायर करने के लिए याचिकाकर्ता पर जुर्माना भी लगाया जाए।

चुनाव आयोग ने पहले अदालत को सूचित किया था कि वर्तमान में उपचुनावों की घोषणा करने की कोई तत्काल योजना नहीं है, और अदालत ने रोक को 8 सितंबर तक बढ़ा दिया है। अब अंतिम निर्णय इस बात पर निर्भर करता है कि अदालत विजय के इस तर्क को स्वीकार करती है या नहीं कि जन प्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत रिक्त सीटों को तुरंत भरा जाना चाहिए।

क्या आप जानते हैं?: जन प्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत, विधानसभा में खाली हुई सीट को आमतौर पर रिक्ति की तारीख से छह महीने के भीतर भरा जाना चाहिए।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: उपचुनावों पर रोक से कौन से निर्वाचन क्षेत्र प्रभावित हैं?
यह रोक त्रिची ईस्ट, करूर, विरलीमलई, पेरुंदुरई और अंबसामुद्रम को प्रभावित करती है।

प्रश्न 2: सीएम विजय ने त्रिची ईस्ट सीट से इस्तीफा क्यों दिया?
हालांकि विशिष्ट राजनीतिक रणनीति आंतरिक है, लेकिन इस इस्तीफे ने उपचुनाव प्रक्रिया पर वर्तमान कानूनी लड़ाई को जन्म दिया है।