हाईवे विभाग ने अविनाशी रोड पर 32 बस शेल्टर के लिए दिए गए ₹2.64 करोड़ के खर्च का विवरण मांगा है और बिना उपयोग की गई राशि वापस करने को कहा है।
- हाईवे विभाग ने ₹2.64 करोड़ के फंड के लिए स्थान-वार खर्च का विवरण मांगा है।
- अविनाशी रोड पर 32 बस शेल्टर की सुरक्षा और मानदंडों की जांच की जाएगी।
- सरकारी फंड से बने शेल्टर पर अवैध विज्ञापनों के खिलाफ सख्त चेतावनी जारी।
कोयंबटूर कॉर्पोरेशन वर्तमान में गंभीर जांच के घेरे में है। हाईवे विभाग के विशेष परियोजना प्रभाग ने अविनाशी रोड पर 32 बस शेल्टर के निर्माण के लिए दिए गए ₹2.64 करोड़ के उपयोग का पूरा ब्यौरा मांगा है। यह राशि मार्च 2025 में नागरिक निकाय को सार्वजनिक सुविधा और यातायात सुरक्षा बढ़ाने के उद्देश्य से सौंपी गई थी।
27 मई, 2026 के एक पत्र में, हाईवे विभाग ने कॉर्पोरेशन से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। इसमें पूर्ण हो चुके शेल्टर की स्थान-वार सूची, उनकी सटीक लोकेशन, काम शुरू होने और पूरा होने की तारीखें, तस्वीरें और खर्च का विवरण शामिल है। इसके साथ ही, विभाग ने 'पूर्णता प्रमाण पत्र' (Completion Certificate) और 'उपयोग प्रमाण पत्र' (Utilisation Certificate) भी मांगा है।
यह मामला क्यों महत्वपूर्ण है?
BozokMedia के विश्लेषण के अनुसार, यह विवाद शहरी निकायों और राज्य बुनियादी ढांचा विभागों के बीच समन्वय की कमी को दर्शाता है। जब बिना सख्त ऑडिट के फंड ट्रांसफर किए जाते हैं, तो वित्तीय अनियमितताओं की संभावना बढ़ जाती है। विभाग द्वारा बिना उपयोग की गई राशि वापस मांगने का संकेत है कि उन्हें परियोजना के पूर्ण कार्यान्वयन पर संदेह है।
यह पूरा मामला गोल्डविंस से उप्पिलिपलयम तक चलने वाले एलिवेटेड हाईवे प्रोजेक्ट के पूरा होने से जुड़ा है। चूंकि विभाग अब प्रोजेक्ट अकाउंट्स को बंद कर रहा है, इसलिए कॉर्पोरेशन द्वारा फंड के उपयोग में किसी भी तरह की विसंगति कानूनी जटिलताओं का कारण बन सकती है।
"सार्वजनिक बुनियादी ढांचे और व्यावसायिक विज्ञापनों का मेल अक्सर भ्रष्टाचार का केंद्र बन जाता है, खासकर जब सरकारी संपत्ति का उपयोग निजी लाभ के लिए किया जाता है।"
विवाद का एक मुख्य बिंदु इन शेल्टरों पर लगे विज्ञापन हैं। हाईवे विभाग ने स्पष्ट किया है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार, हाईवे के 'राइट ऑफ वे' या बस बे के भीतर किसी भी विज्ञापन पैनल, होर्डिंग या फ्लेक्स बोर्ड की अनुमति नहीं है। जिला सड़क सुरक्षा समिति के सदस्य के. काथिरमथियोन ने पहले ही इन शेल्टरों पर विज्ञापनों की मौजूदगी पर सवाल उठाए हैं।
दबाव बढ़ता देख, कॉर्पोरेशन कमिश्नर कट्टा रवि तेजा ने हाल ही में अधिकारियों के साथ इन बस शेल्टरों का निरीक्षण किया। हालांकि कॉर्पोरेशन का कहना है कि वे मौजूदा स्टॉप्स में सुधार कर रहे हैं, लेकिन उपभोक्ता निकायों द्वारा DVAC जांच की मांग यह बताती है कि जनता का भरोसा इस परियोजना की पारदर्शिता पर कम हो रहा है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: हाईवे विभाग पैसे वापस क्यों मांग रहा है?
विभाग एलिवेटेड हाईवे प्रोजेक्ट के खातों को बंद कर रहा है और यह सुनिश्चित करना चाहता है कि ₹2.64 करोड़ में से जो पैसा खर्च नहीं हुआ है, वह सरकारी खजाने में वापस आ जाए।
प्रश्न 2: इन बस शेल्टरों पर विज्ञापनों की कानूनी स्थिति क्या है?
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार, सुरक्षा कारणों से हाईवे के राइट ऑफ वे या बस बे के भीतर किसी भी व्यावसायिक विज्ञापन की अनुमति नहीं है।