आंध्र प्रदेश की वेलीगोंडा परियोजना को लेकर पूर्व सीएम जगन मोहन रेड्डी और आईटी मंत्री नारा लोकेश के बीच श्रेय लेने की होड़ मच गई है। जहाँ जगन ने इसे अपने पिता की उपलब्धि बताया, वहीं लोकेश ने इसे 'बिना पानी का उद्घाटन' करार दिया।
- वेलीगोंडा परियोजना के निर्माण श्रेय को लेकर YSRCP और TDP के बीच विवाद।
- जगन का दावा: 37.5 किमी की सुरंगों का बड़ा हिस्सा YS राजशेखर रेड्डी के समय बना।
- नारा लोकेश का आरोप: मार्च 2024 का उद्घाटन केवल एक दिखावा था क्योंकि उसमें पानी नहीं था।
- परियोजना से 4.47 लाख एकड़ भूमि की सिंचाई और 15.25 लाख लोगों को पेयजल मिलने की उम्मीद।
आंध्र प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर श्रेय लेने की जंग तेज हो गई है। वेलीगोंडा परियोजना, जो राज्य के कई जिलों के लिए जीवन रेखा मानी जा रही है, अब YSR कांग्रेस पार्टी (YSRCP) और तेलुगु देशम पार्टी (TDP) के बीच राजनीतिक युद्ध का मैदान बन गई है। पूर्व मुख्यमंत्री YS जगन मोहन रेड्डी ने सोशल मीडिया के माध्यम से दावा किया कि इस परियोजना की वास्तविक नींव और निर्माण का श्रेय उनके पिता, दिवंगत YS राजशेखर रेड्डी को जाता है।
जगन मोहन रेड्डी ने विस्तार से बताते हुए कहा कि हालांकि इसकी आधारशिला चंद्रबाबू नायडू ने रखी थी, लेकिन वास्तविक संकल्प और व्यापक निर्माण YS राजशेखर रेड्डी के कार्यकाल में हुआ। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि 37.587 किमी की जुड़वां सुरंगों में से 20.333 किमी की खुदाई 2004 से 2014 के बीच हुई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि 1996 में आधारशिला रखने के बाद नायडू ने परियोजना को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया था।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that this dispute is not merely about a dam, but about establishing a legacy of 'development' ahead of future electoral battles. In Andhra Pradesh, irrigation projects are the most potent political currency. By claiming the Veligonda project, Jagan seeks to cement the image of his father as the 'architect of rural prosperity,' while Nara Lokesh aims to portray the previous regime as one of 'symbolic gestures' without actual delivery.
दूसरी ओर, आईटी मंत्री नारा लोकेश ने जगन के दावों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने मार्च 2024 के उद्घाटन समारोह के वीडियो साझा करते हुए तंज कसा कि जगन ने इतिहास रच दिया क्योंकि उन्होंने एक ऐसी सिंचाई परियोजना का उद्घाटन किया जिसमें एक बूंद पानी नहीं था। लोकेश ने इसे 'फेक इनॉग्रेशन' (नकली उद्घाटन) बताते हुए कहा कि ऐसा केवल YSRCP ही कर सकती है।
"The Veligonda conflict highlights a recurring pattern in regional politics where infrastructure becomes a tool for legacy-building rather than just public utility."
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि की बात करें तो, वेलीगोंडा परियोजना का उद्देश्य कृष्णा नदी के पानी को प्रకాశम, कडपा और नेल्लोर जैसे सूखाग्रस्त जिलों तक पहुँचाना है। यह परियोजना विशेष रूप से उन क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण है जो फ्लोरोसिस जैसी बीमारियों से जूझ रहे हैं। जगन ने सवाल उठाया कि यदि सुरंगें जनवरी 2024 तक तैयार थीं, तो पिछले 26 महीनों से नल्लामाला सागर में पानी क्यों नहीं पहुँचाया गया।
| कालखंड (Period) | खुदाई की लंबाई (Tunnel Excavation) | दावा करने वाला पक्ष |
|---|---|---|
| 2004 - 2014 | 20.333 किमी | YS राजशेखर रेड्डी (YSRCP) |
| 2014 - 2019 | 6.686 किमी | चंद्रबाबू नायडू (TDP) |
| 2019 - 2024 | 10.568 किमी | YS जगन मोहन रेड्डी (YSRCP) |
अंत में, जगन ने पुनर्वास पैकेज के लंबित भुगतानों और पेद्दादोरनाला सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के अधूरे काम का मुद्दा उठाकर वर्तमान सरकार को घेरने की कोशिश की है। यह विवाद अब केवल तकनीकी नहीं, बल्कि पूरी तरह से भावनात्मक और राजनीतिक हो चुका है।
Frequently Asked Questions
1. वेलीगोंडा परियोजना का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इसका उद्देश्य कृष्णा नदी के पानी को सूखाग्रस्त क्षेत्रों में पहुँचाकर 4.47 लाख एकड़ भूमि की सिंचाई करना और 15.25 लाख लोगों को पेयजल उपलब्ध कराना है।
2. जगन और लोकेश के बीच विवाद का मुख्य कारण क्या है?
विवाद इस बात पर है कि परियोजना के निर्माण का वास्तविक श्रेय किसे मिलना चाहिए—जगन के पिता YS राजशेखर रेड्डी को या चंद्रबाबू नायडू और उनकी टीम को।