दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने ड्राफ्ट मतदाता सूची प्रकाशित की है, जिसमें 47.7 लाख मतदाताओं के नाम शामिल नहीं हैं। प्रभावित नागरिक 30 सितंबर तक फॉर्म 6 के माध्यम से अपना नाम वापस जोड़ने के लिए दावा कर सकते हैं।

  • दिल्ली की ड्राफ्ट मतदाता सूची में 97.5 लाख मतदाता शामिल हैं।
  • कुल 1.45 करोड़ मतदाताओं में से 47.7 लाख नाम हटा दिए गए हैं।
  • नाम जोड़ने के लिए आवेदन की अंतिम तिथि 30 सितंबर है।
  • अंतिम मतदाता सूची 4 नवंबर को जारी की जाएगी।

दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने सोमवार (31 अगस्त, 2026) को शहर की ड्राफ्ट मतदाता सूची प्रकाशित की। इस प्रक्रिया के बाद यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि शहर के कुल 1.45 करोड़ मतदाताओं में से लगभग 47.7 लाख मतदाताओं को सूची से बाहर कर दिया गया है। यह कदम विशेष गहन संशोधन (Special Intensive Revision - SIR) के बाद उठाया गया है।

निर्वाचन आयोग के अनुसार, यह संशोधन प्रक्रिया 30 जून से शुरू होकर 17 अगस्त तक चली, जिसमें घर-घर जाकर मतदाताओं का विवरण एकत्र किया गया। इस कवायद के दौरान लगभग 97.5 लाख मतदाताओं के फॉर्म प्राप्त हुए और उन्हें डिजिटल किया गया, जो कुल मतदाता आधार का लगभग 67.18% है।

यह क्यों महत्वपूर्ण है?

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, मतदाता सूची से इतनी बड़ी संख्या में नामों का हटना लोकतांत्रिक भागीदारी के लिए एक गंभीर चुनौती हो सकती है। विशेष रूप से शहरी गरीबों और बेघर लोगों के लिए, जिनके पास पते के पुख्ता दस्तावेज नहीं होते, यह प्रक्रिया उनके मताधिकार को खतरे में डाल सकती है। यह डेटा शुद्धिकरण की एक बड़ी कवायद है, लेकिन यदि समय रहते सुधार नहीं किया गया, तो लाखों नागरिक मतदान से वंचित रह सकते हैं।

"मतदाता सूची का शुद्धिकरण अनिवार्य है, लेकिन यह सुनिश्चित करना भी जरूरी है कि कोई भी पात्र नागरिक तकनीकी कारणों से अपने लोकतांत्रिक अधिकार से वंचित न रहे।"

जिन मतदाताओं के नाम सूची से गायब हैं, उन्हें 'ASDDO' (Absent, Shifted, Dead, Duplicate, and Others) श्रेणी के तहत वर्गीकृत किया गया है। निर्वाचन अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि ऐसे व्यक्ति 30 सितंबर तक आवश्यक सहायक दस्तावेजों के साथ फॉर्म 6 भरकर अपना दावा पेश कर सकते हैं। दावों और आपत्तियों की जांच 29 अक्टूबर तक चलेगी।

शहर के विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों में डिजिटलीकरण की दर में भारी अंतर देखा गया है। जहाँ रोहिणी ने 83.43% के साथ उच्चतम डिजिटलीकरण दर दर्ज की, वहीं तुगलकाबाद सबसे निचले पायदान पर रहा, जहाँ केवल 52.15% फॉर्म डिजिटल हो पाए।

क्षेत्र (Constituency) डिजिटलीकरण दर (%) स्थिति
रोहिणी 83.43% उच्चतम
तुगलकाबाद 52.15% न्यूनतम
क्या आप जानते हैं?: भारत में मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (SIR) का उद्देश्य फर्जी नामों को हटाना और नए पात्र मतदाताओं को जोड़कर चुनावी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाना होता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: यदि मेरा नाम मतदाता सूची से कट गया है तो मुझे क्या करना चाहिए?
उत्तर: आपको 30 सितंबर तक सहायक दस्तावेजों के साथ फॉर्म 6 भरकर अपना दावा प्रस्तुत करना होगा।

प्रश्न 2: अंतिम मतदाता सूची कब प्रकाशित होगी?
उत्तर: सभी दावों और आपत्तियों के निपटान के बाद अंतिम सूची 4 नवंबर को जारी की जाएगी।