सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि नेपाल की विनाशकारी बाढ़ के बाद 17 करोड़ साल पुराना एक विशाल शालिग्राम मिला है। फैक्ट चेक में खुलासा हुआ है कि यह कोई प्राकृतिक खोज नहीं बल्कि मानव निर्मित मूर्तिकला है।

  • वायरल वीडियो में दिख रहा पत्थर प्राकृतिक शालिग्राम नहीं, बल्कि एक तराशी हुई मूर्ति है।
  • इसे अप्रैल-मई 2026 में जोमसोम, नेपाल में एक कार्यशाला के दौरान बनाया गया था।
  • इसका नेपाल की हालिया बाढ़ या किसी प्राकृतिक आपदा से कोई संबंध नहीं है।

हाल ही में नेपाल में आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन ने भारी तबाही मचाई है, जिसमें 900 से अधिक लोगों की जान चली गई। इस त्रासदी के बीच, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ, जिसमें एक विशाल जीवाश्म (fossil) को दिखाया गया है। दावा किया गया कि यह 31 टन वजनी और 17 करोड़ साल पुराना एक शालिग्राम है, जो आपदा के बाद सतह पर आया है।

शालिग्राम, जो वास्तव में अमोनोइड जीवाश्म (ammonite fossils) होते हैं, नेपाल के मुस्तांग में स्थित कालीगंडकी नदी घाटी से प्राप्त होते हैं। हिंदू और बौद्ध धर्म दोनों में इनका गहरा धार्मिक महत्व है, जिसके कारण इस खबर ने लोगों के बीच उत्सुकता और श्रद्धा जगा दी।

तथ्यों की जांच: क्या है सच्चाई?

जब इस दावे की गहन जांच की गई, तो पाया गया कि यह पूरी तरह भ्रामक है। नेपाली समाचार आउटलेट Himalaya Times की रिपोर्ट के अनुसार, यह विशाल पत्थर कालीगंडकी नदी के किनारे स्थित था, जिसे 20 अप्रैल से 4 मई 2026 के बीच एक 15 दिवसीय कार्यशाला के दौरान तराशा गया था। इस कार्यशाला में नेपाल एकेडमी ऑफ फाइन आर्ट्स के 36 से अधिक मूर्तिकारों ने भाग लिया था।

रिपोर्ट्स के अनुसार, इस कार्यशाला का आयोजन घारपझोंग ग्रामीण नगरपालिका द्वारा किया गया था। मूर्तिकारों ने न केवल इस विशाल शालिग्राम को आकार दिया, बल्कि नदी किनारे मौजूद पत्थरों से भगवान शिव, पार्वती, विष्णु, बुद्ध, हिमालयी हिम तेंदुए और हिमालयी भेड़ की मूर्तियां भी बनाई थीं।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows that in times of national tragedy, misinformation often blends religious sentiment with natural disasters to gain viral traction. The blending of a real geological phenomenon (Shaligrams of the Kaligandaki) with a man-made sculpture created a perfect storm for this fake news to spread, potentially misleading thousands of devotees and tourists.

"The intersection of faith and disaster often creates a fertile ground for misinformation, where man-made art is mistaken for divine miracles."

इस विशाल शालिग्राम का उद्घाटन कर्नाटक के श्रृंगेरी शारदा पीठ के जगद्गुरु शंकराचार्य महास्वामी विदुशेखर भारती महाराज द्वारा किया गया था। इसका मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देना था, न कि किसी प्राकृतिक आपदा का परिणाम होना।

क्या आप जानते हैं?: शालिग्राम वास्तव में प्राचीन समुद्री जीवों के जीवाश्म हैं, जिन्हें विज्ञान की भाषा में 'अमोनोइड्स' कहा जाता है और ये केवल कालीगंडकी नदी के आसपास पाए जाते हैं।
दावा (Claim) सच्चाई (Fact)
बाढ़ के बाद मिला 17 करोड़ साल पुराना पत्थर 2026 में तराशी गई मानव निर्मित मूर्ति
प्राकृतिक रूप से सतह पर आया मूर्तिकारों द्वारा 15 दिन की कार्यशाला में निर्मित
आपदा से जुड़ाव धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने का प्रयास

Frequently Asked Questions

1. क्या यह शालिग्राम वास्तव में प्राचीन है?
नहीं, यह पत्थर प्राचीन हो सकता है, लेकिन इसे शालिग्राम का आकार 2026 में मूर्तिकारों द्वारा दिया गया है।

2. यह मूर्ति कहाँ स्थित है?
यह मूर्ति नेपाल के जोमसोम में कालीगंडकी नदी के तट पर स्थित है।