यूपी कैडर की चर्चित आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल ने 11 साल की सेवा के बाद इस्तीफा दे दिया है। अपने भावुक विदाई संदेश में उन्होंने 8 जिलों के कार्यकाल के बावजूद केवल देवरिया और मिर्जापुर को याद किया, जिससे कई सवाल खड़े हो गए हैं।
- दिव्या मित्तल ने 11 साल की प्रशासनिक सेवा के बाद अपने पद से इस्तीफा दिया।
- अपने करियर में उन्होंने मेरठ, गोंडा, कानपुर, बरेली, संत कबीर नगर, मिर्जापुर, लखनऊ और देवरिया जैसे 8 महत्वपूर्ण स्थानों पर कार्य किया।
- इस्तीफे के संदेश में उन्होंने विशेष रूप से मिर्जापुर और देवरिया के अनुभवों को साझा किया।
उत्तर प्रदेश कैडर की चर्चित IAS दिव्या मित्तल का इस्तीफा इस समय प्रशासनिक गलियारों और सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। 11 वर्षों तक राज्य के विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर अपनी सेवाएं देने के बाद, दिव्या मित्तल ने एक ऐसा विदाई संदेश लिखा जिसने सबको सोचने पर मजबूर कर दिया है। उनके करियर का ग्राफ काफी प्रभावशाली रहा, लेकिन उनके विदाई संदेश की चयनात्मकता (selectivity) ने एक नई बहस छेड़ दी है।
दिव्या मित्तल की प्रशासनिक यात्रा 27 नवंबर 2015 को मेरठ में ज्वाइंट मजिस्ट्रेट के रूप में शुरू हुई थी। इसके बाद उन्होंने गोंडा में CDO, कानपुर नगर में UPSIDC की जिम्मेदारी और बरेली विकास प्राधिकरण में उपाध्यक्ष के रूप में कार्य किया। उन्होंने संत कबीर नगर की जिलाधिकारी (DM) के रूप में भी अपनी पहचान बनाई। हालांकि, उनके पूरे करियर के रिकॉर्ड को देखें तो उन्होंने 8 अलग-अलग जिलों और विभागों में काम किया, लेकिन उनके अंतिम संदेश में केवल दो जिलों का उल्लेख था।
मिर्जापुर और देवरिया का विशेष उल्लेख
मिर्जापुर के कार्यकाल (सितंबर 2022 - सितंबर 2023) के बारे में दिव्या मित्तल ने लिखा कि इस जिले ने उन्हें सिखाया कि 'असंभव' कोई तथ्य नहीं, बल्कि केवल एक राय है। उन्होंने मां विंध्यवासिनी के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हुए कहा कि असली शक्ति पद से नहीं, बल्कि लोगों के विश्वास से आती है। उन्होंने लहुरियादह की एक बुजुर्ग महिला का जिक्र किया, जिसका आशीर्वाद उनके लिए किसी भी सरकारी उपलब्धि से बड़ा था।
वहीं, देवरिया के बारे में उन्होंने लिखा कि इस जिले ने उन्हें सिखाया कि 'सही के साथ खड़ा होना विकल्प नहीं, बल्कि कर्तव्य है'। यह बयान प्रशासनिक ईमानदारी और नैतिक साहस की ओर इशारा करता है, जिसने सोशल मीडिया पर लोगों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि क्या उनके इस्तीफे के पीछे कोई गहरे प्रशासनिक या राजनीतिक कारण हैं।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, एक उच्च रैंकिंग अधिकारी द्वारा अपने पूरे करियर के बजाय केवल कुछ विशिष्ट स्थानों और अनुभवों को याद करना यह दर्शाता है कि उन स्थानों पर उन्हें या तो सबसे अधिक मानसिक संतुष्टि मिली या फिर सबसे कठिन चुनौतियों का सामना करना पड़ा। यह घटना नौकरशाही में 'नैतिक संघर्ष' और 'व्यक्तिगत मूल्यों' के टकराव को उजागर करती है।
"जब एक अधिकारी अपने विदाई संदेश में 'कर्तव्य' और 'सही के साथ खड़े होने' की बात करता है, तो यह अक्सर व्यवस्था के भीतर के दबावों का एक सूक्ष्म संकेत होता है।"
दिव्या मित्तल की आखिरी तैनाती राजस्व विभाग (Revenue Department) में विशेष सचिव के रूप में लखनऊ में थी। उनके इस अचानक फैसले ने न केवल उनके सहकर्मियों को, बल्कि राजनीतिक हलकों में भी हलचल मचा दी है।
| शहर | सीखा गया सबक/अनुभव |
|---|---|
| मिर्जापुर | 'असंभव' केवल एक राय है; जन-विश्वास की शक्ति। |
| देवरिया | सही का साथ देना एक अनिवार्य कर्तव्य है। |
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: दिव्या मित्तल ने अपने इस्तीफे में किन जिलों का जिक्र किया?
उत्तर: उन्होंने विशेष रूप से मिर्जापुर और देवरिया जिलों का जिक्र किया।
प्रश्न 2: दिव्या मित्तल की पहली पोस्टिंग कहाँ हुई थी?
उत्तर: उनकी पहली पोस्टिंग मेरठ में ज्वाइंट मजिस्ट्रेट के पद पर हुई थी।