ओडिशा में विधायकों के वेतन वृद्धि को लेकर एक बार फिर चर्चा शुरू हो गई है। एक संयुक्त संसदीय समिति ने वर्तमान और पूर्व विधायकों के वेतन और भत्तों के पुनरीक्षण का समर्थन किया है।
- संयुक्त संसदीय समिति ने ओडिशा के विधायकों और पूर्व विधायकों के वेतन ढांचे में बदलाव का समर्थन किया है।
- इससे पहले सरकार ने जनता के भारी विरोध के बाद वेतन में तीन गुना वृद्धि के प्रस्ताव को वापस ले लिया था।
- ओडिशा के विधायकों का वेतन वर्तमान में देश के अन्य राज्यों की तुलना में काफी कम (24वें स्थान पर) बताया गया है।
ओडिशा सरकार ने रविवार को घोषणा की कि एक संयुक्त संसदीय समिति (Joint Parliamentary Committee) ने राज्य के विधायकों के वेतन और भत्तों के पुनरीक्षण के पक्ष में अपनी राय दी है। यह निर्णय उस समय आया है जब राज्य सरकार ने कुछ महीने पहले ही वेतन में भारी वृद्धि के प्रस्ताव को वापस लिया था।
गौरतलब है कि पिछले साल दिसंबर में विधानसभा द्वारा पारित चार बिलों के माध्यम से वेतन, भत्तों और पेंशन में तीन गुना वृद्धि का प्रस्ताव रखा गया था। इन बिलों के तहत विधायकों का मासिक वेतन 1.11 लाख रुपये से बढ़ाकर 3.45 लाख रुपये करने की योजना थी। हालांकि, जनता के तीव्र आक्रोश और राजनीतिक दबाव के कारण 26 मार्च को भाजपा सरकार ने इन बिलों को वापस ले लिया था।
यह मामला क्यों महत्वपूर्ण है?
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह मुद्दा केवल वित्तीय लाभ का नहीं, बल्कि राजनीतिक संतुलन का है। एक तरफ सरकार अपनी छवि को 'जन-हितैषी' बनाए रखना चाहती है, वहीं दूसरी तरफ विधायकों और पूर्व विधायकों की मांगों को नजरअंदाज करना आंतरिक असंतोष पैदा कर सकता है। वेतन संरचना में सुधार की मांग को अन्य राज्यों के साथ तुलना करके जायज ठहराया जा रहा है।
संसदीय कार्य विभाग के अनुसार, समिति ने अन्य राज्य विधानसभाओं और संसद के वेतन ढांचे का गहन अध्ययन किया। दस्तावेजों के विश्लेषण के बाद समिति इस निष्कर्ष पर पहुंची कि ओडिशा के वर्तमान वेतन ढांचे में संशोधन की तत्काल आवश्यकता है।
"विधायकों के वेतन में वृद्धि और पूर्व विधायकों की पेंशन का मुद्दा मानवीय और प्रशासनिक दोनों पहलुओं से महत्वपूर्ण है, विशेषकर जब वे अन्य राज्यों की तुलना में काफी पीछे हों।"
बीजेडी विधायक गनेश्वर बेहेरा ने इस कदम का समर्थन करते हुए कहा कि ओडिशा की स्थिति देश की विधानसभाओं की सूची में 24वें स्थान पर है। उन्होंने विशेष रूप से पूर्व विधायकों की दयनीय स्थिति का उल्लेख किया, जिन्हें वर्तमान में केवल 30,000 रुपये मासिक पेंशन मिलती है, जो चिकित्सा खर्चों के लिए भी अपर्याप्त है।
| विवरण | वर्तमान स्थिति | प्रस्तावित (वापस लिया गया) |
|---|---|---|
| विधायक मासिक वेतन | ₹1.11 लाख | ₹3.45 लाख |
| पूर्व विधायक पेंशन | ₹30,000 | तीन गुना वृद्धि प्रस्तावित थी |
| राष्ट्रीय रैंकिंग | 24वां स्थान | शीर्ष पैकेज की योजना थी |
इस समिति का नेतृत्व सांसद बिरेन्द्र प्रसाद बैश्या कर रहे हैं, जिसमें सांसद विजय कुमार दुबे, बीना देवी और विधानसभा अध्यक्ष सुरमा पाढ़ी जैसे प्रमुख सदस्य शामिल हैं। अब सबकी नजरें सरकार के अगले कदम पर हैं कि वह जनता के विरोध और समिति की सिफारिशों के बीच कैसे संतुलन बनाती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. समिति ने वेतन वृद्धि का समर्थन क्यों किया?
समिति ने पाया कि अन्य राज्यों और संसद की तुलना में ओडिशा के विधायकों और पूर्व विधायकों का वेतन काफी कम है।
2. सरकार ने पहले बिल क्यों वापस लिए थे?
वेतन में तीन गुना वृद्धि के प्रस्ताव के बाद जनता के बीच भारी आक्रोश था, जिसके कारण सरकार को पीछे हटना पड़ा था।