कर्नाटक ने सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया है कि वह तमिलनाडु को 9,000 क्यूसेक पानी छोड़ने के CWMA के आदेश का पालन कर रहा है, हालांकि पुराने बकाया पानी को लेकर विवाद अभी भी जारी है।

  • कर्नाटक ने CWMA के आदेश से अधिक 9,000 क्यूसेक से ज्यादा पानी छोड़ा है।
  • तमिलनाडु पिछले बकाया को पूरा करने के लिए अतिरिक्त 17.604 TMC फीट पानी की मांग कर रहा है।
  • सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु को CWMA के निर्णय को उचित फोरम में चुनौती देने की सलाह दी है।

अंतर-राज्यीय जल विवाद के एक महत्वपूर्ण कानूनी घटनाक्रम में, कर्नाटक सरकार ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि वह कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (CWMA) द्वारा जारी निर्देशों का सख्ती से पालन कर रहा है। प्राधिकरण ने पहले तमिलनाडु को 15 दिनों की अवधि के लिए 9,000 क्यूसेक पानी के प्रवाह को सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था।

कर्नाटक की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दिवान ने अदालत को विशिष्ट आंकड़े प्रदान करते हुए कहा कि राज्य ने 30 अगस्त को 9,888 क्यूसेक पानी छोड़ा, और 31 अगस्त की सुबह तक यह प्रवाह बढ़कर 11,000 क्यूसेक से अधिक हो गया। दिवान ने जोर देकर कहा कि कर्नाटक पड़ोसी राज्य की जरूरतों को पूरा करने के लिए आवश्यक प्रवाह बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि हालांकि वर्तमान प्रवाह का पालन किया जा रहा है, लेकिन संघर्ष का मुख्य केंद्र अब दैनिक कोटा से हटकर 'संचित कमी' (accumulated deficits) पर आ गया है। यह अंतर महत्वपूर्ण है क्योंकि तमिलनाडु का तर्क है कि केवल दैनिक अनुपालन पिछले संकट काल के दौरान खोए हुए पानी की भरपाई नहीं करता है, जिससे हजारों एकड़ डेल्टा सिंचाई खतरे में पड़ सकती है।

हालांकि, तमिलनाडु के वरिष्ठ अधिवक्ता सी.एस. वैद्यनाथन ने तर्क दिया कि वर्तमान रिलीज पुराने बकाया को संबोधित नहीं करती है। उन्होंने बताया कि तमिलनाडु में लगभग 24,700 एकड़ कृषि भूमि पानी की कमी से जूझ रही है और सीमा पर स्थित बिलिगुंडलु गांव में प्रवाह की भारी कमी की ओर इशारा किया। तमिलनाडु 17.604 TMC फीट पानी छोड़ने की मांग कर रहा है।

दैनिक रिलीज से हटकर बकाया पानी के विवाद की ओर बढ़ना यह दर्शाता है कि अंतर-राज्यीय जल विवाद अधिनियम, 1956 की व्याख्या को लेकर कानूनी लड़ाई गहरी हो रही है।

सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने टिप्पणी की कि यदि तमिलनाडु CWMA के विशिष्ट निर्देशों से अधिक पानी चाहता है, तो उसे उचित वैधानिक माध्यमों से उस निर्णय को चुनौती देनी होगी। अदालत ने कहा कि कावेरी जल विनियमन समिति (CWRC) हर 15 दिन में बैठक करती है, जिससे यह शिकायतों के लिए प्राथमिक मंच बन जाता है।

ऐतिहासिक रूप से, कावेरी विवाद भारत के सबसे विवादास्पद जल संघर्षों में से एक रहा है, जिसमें वर्षा, जलाशय स्तर और कृषि मांग की जटिल गणनाएं शामिल हैं। संकट के वर्षों में 'प्रो-राटा' (pro-rata) फॉर्मूले का उपयोग बोझ को समान रूप से साझा करने के लिए किया जाता है, लेकिन इसका कार्यान्वयन हमेशा तनाव का कारण रहा है।

क्या आप जानते हैं?: कावेरी नदी को अक्सर 'दक्षिण की गंगा' कहा जाता है और यह कर्नाटक और तमिलनाडु दोनों राज्यों के लाखों किसानों के लिए जीवन रेखा है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: वर्तमान में जल रिलीज की आवश्यकता क्या है?
CWMA ने कर्नाटक को तमिलनाडु के लिए प्रतिदिन 9,000 क्यूसेक पानी का प्रवाह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।

प्रश्न 2: रिलीज के बावजूद तमिलनाडु असंतुष्ट क्यों है?
तमिलनाडु का दावा है कि 17.604 TMC फीट पानी का पुराना बकाया है, जिसे वर्तमान दैनिक प्रवाह से पूरा नहीं किया गया है।