मद्रास उच्च न्यायालय ने पूर्व भाजपा तमिलनाडु अध्यक्ष के. अन्नामलाई की उस याचिका पर अपना आदेश सुरक्षित रख लिया है, जिसमें उन्होंने मुथुरमलिंगन थेवर से जुड़ी विवादित टिप्पणियों के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले को रद्द करने की मांग की थी।
- मद्रास उच्च न्यायालय ने के. अन्नामलाई की केस रद्द करने की याचिका पर फैसला सुरक्षित रखा।
- विवाद 2023 में मुथुरमलिंगन थेवर द्वारा 'रक्त अभिषेक' की चेतावनी के दावे को लेकर शुरू हुआ।
- याचिकाकर्ता का तर्क है कि उन्होंने केवल एक ऐतिहासिक घटना का उल्लेख किया था।
- शिकायतकर्ता का आरोप है कि बयान का उद्देश्य सांप्रदायिक वैमनस्य फैलाना था।
चेन्नई: मद्रास उच्च न्यायालय ने सोमवार (31 अगस्त, 2026) को 'वी द लीडर्स' के संस्थापक और भाजपा के पूर्व तमिलनाडु इकाई अध्यक्ष के. अन्नामलाई की उस याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है, जिसमें उन्होंने अपने खिलाफ लंबित एक आपराधिक मामले को रद्द करने की मांग की थी। यह मामला 2023 में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दिए गए उस बयान से जुड़ा है, जिसमें अन्नामलाई ने दावा किया था कि 1956 में पसुम्पोन मुथुरमलिंगन थेवर ने चेतावनी दी थी कि यदि नास्तिक लोग आस्तिकों का अपमान करना जारी रखते हैं, तो वे मदुरै मीनाक्षी अम्मन मंदिर में 'रक्त अभिषेक' करेंगे।
न्यायमूर्ति जी.के. इलंतरायण ने इस मामले में याचिकाकर्ता के वकील अरुण सी. मोहन और शिकायतकर्ता पीयूष मानुश के वकील वी. सुरेश की दलीलों को सुनने के बाद अपना निर्णय सुरक्षित रखा। उल्लेखनीय है कि সালেम के एक सामाजिक कार्यकर्ता पीयूष मानुश ने नवंबर 2023 में সালেम की एक न्यायिक मजिस्ट्रेट अदालत में अन्नामलाई के खिलाफ निजी शिकायत दर्ज कराई थी।
ऐतिहासिक संदर्भ और कानूनी विवाद
इस मामले की जड़ें 1956 की एक घटना में हैं, जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री सी.एन. अन्नादुरई और मुथुरमलिंगन थेवर के बीच वैचारिक मतभेद थे। अन्नामलाई के वकील ने अदालत में तर्क दिया कि उनके मुवक्किल ने केवल उस ऐतिहासिक घटना का संदर्भ दिया था जब अन्नादुरई ने एक मंदिर कार्यक्रम को संबोधित किया था और थेवर ने उनके भाषण से असहमति जताई थी। बचाव पक्ष का कहना है कि यह बयान तत्कालीन डीएमके नेता उधयनidhi स्टालिन द्वारा सनातन धर्म पर की गई टिप्पणियों के जवाब में दिया गया था।
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह मामला केवल एक राजनीतिक बयान का नहीं, बल्कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सांप्रदायिक सद्भाव के बीच की कानूनी सीमा का है। तमिलनाडु की राजनीति में मुथुरमलिंगन थेवर एक अत्यंत सम्मानित और प्रभावशाली व्यक्तित्व हैं, इसलिए उनके नाम से जुड़ी किसी भी टिप्पणी का सामाजिक और राजनीतिक प्रभाव गहरा होता है। यह फैसला तय करेगा कि ऐतिहासिक संदर्भों का उपयोग 'उकसावे' की श्रेणी में आता है या 'तथ्यात्मक चर्चा' की श्रेणी में।
ऐतिहासिक तथ्यों का राजनीतिक संदर्भ में उपयोग अक्सर कानूनी विवादों को जन्म देता है, खासकर जब वे धार्मिक भावनाओं से जुड़े हों।
दूसरी ओर, शिकायतकर्ता के वकील वी. सुरेश ने दलील दी कि मजिस्ट्रेट ने सही तरीके से संज्ञान लिया क्योंकि बयान उकसाने वाला था और इसका उद्देश्य समाज में सांप्रदायिक विभाजन पैदा करना था। उन्होंने आरोप लगाया कि अन्नामलाई अक्सर इस तरह के भाषण देते रहे हैं। अभियोजन पक्ष ने भारतीय दंड संहिता की धारा 153A (धर्म, जाति आदि के आधार पर समूहों के बीच शत्रुता को बढ़ावा देना) और 505(1)(c) के तहत मामला चलाने की मांग की है।
1. के. अन्नामलाई ने अदालत से क्या मांग की है?
अन्नामलाई ने अपने खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले को पूरी तरह से रद्द (Quash) करने की मांग की है।
2. यह पूरा विवाद किस बयान पर शुरू हुआ?
यह विवाद 1956 में मुथुरमलिंगन थेवर द्वारा मदुरै मीनाक्षी मंदिर में 'रक्त अभिषेक' की कथित चेतावनी के संदर्भ में दिए गए बयान पर शुरू हुआ।