सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार को याद दिलाया है कि मंत्री कुंवर विजय शाह के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी अब तक लंबित है। मामला कर्नल सोफिया कुरैशी के खिलाफ की गई अपमानजनक टिप्पणियों से जुड़ा है।
- मंत्री कुंवर विजय शाह पर महिला सैन्य अधिकारी के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी का आरोप है।
- जांच पूरी हो चुकी है, लेकिन मुकदमा चलाने की मंजूरी राज्यपाल स्तर पर लंबित है।
- सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को अपने पिछले आदेशों का पालन करने का निर्देश दिया है।
नई दिल्ली: उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को यह दर्ज किया कि मध्य प्रदेश सरकार ने अपने मंत्री कुंवर विजय शाह को मुकदमा चलाने की मंजूरी अभी तक नहीं दी है। मंत्री पर 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान मीडिया को ब्रीफ करने वाली भारतीय सेना की अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करने का आरोप है।
अदालत के समक्ष राज्य के डीआईजी इंटेलिजेंस ने उपस्थित होकर सूचित किया कि मंत्री के खिलाफ जांच पूरी हो चुकी है और रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में जमा कर दी गई है। हालांकि, कानूनी कार्यवाही शुरू करने के लिए आवश्यक सरकारी मंजूरी अब भी प्रतीक्षित है। राज्य सरकार ने अदालत को बताया कि मंजूरी से जुड़ी फाइल वर्तमान में राज्यपाल स्तर पर निर्णय के लिए लंबित है। उल्लेखनीय है कि यह अनुरोध अगस्त 2025 में किया गया था।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows that this delay highlights a critical tension between political immunity and judicial accountability. When a sitting minister is accused of derogatory remarks against a decorated military officer, the delay in prosecution can be perceived as institutional shielding, potentially undermining the morale of women in the armed forces.
इस मामले की पिछली सुनवाई के दौरान, अदालत ने मंत्री के व्यवहार को "दुर्भाग्यपूर्ण" बताया था। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने राज्य की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से तीखे सवाल करते हुए कहा था कि यदि मंत्री वास्तव में माफी मांगना चाहते थे, तो उन्हें यह तुरंत करना चाहिए था।
राजनीतिक पदों पर बैठे व्यक्तियों के लिए कानून की समानता सुनिश्चित करना लोकतंत्र की मजबूती के लिए अनिवार्य है।
मंत्री कुंवर विजय शाह की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मनिंदर सिंह ने तर्क दिया कि मंत्री ने सार्वजनिक रूप से माफी मांग ली है, इसलिए इस मामले को समाप्त कर देना चाहिए। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय पीठ ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार को 19 जनवरी के आदेशों का पालन करना होगा, जिसमें मुकदमा चलाने की मंजूरी पर निर्णय लेना शामिल है।
ऐतिहासिक संदर्भ: भारतीय कानून के तहत, लोक सेवकों या मंत्रियों के खिलाफ आपराधिक मुकदमा चलाने के लिए सरकार की औपचारिक मंजूरी (Sanction for Prosecution) आवश्यक होती है। इस प्रक्रिया का अक्सर उपयोग राजनीतिक ढाल के रूप में किया जाता रहा है, जिससे मामलों में अत्यधिक देरी होती है।
Frequently Asked Questions
1. कर्नल सोफिया कुरैशी कौन हैं?
वह भारतीय सेना की एक अधिकारी हैं जिन्होंने 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान मीडिया को ब्रीफ किया था।
2. मुकदमा चलाने के लिए मंजूरी क्यों जरूरी है?
कानूनी प्रावधानों के अनुसार, सरकारी पदों पर बैठे व्यक्तियों को उनके आधिकारिक कार्यों या पदों से जुड़े मामलों में सुरक्षा मिलती है, जिसके लिए अभियोजन से पहले सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी अनिवार्य है।