चुनाव आयोग के विशेष गहन संशोधन (SIR) अभियान के परिणामस्वरूप देश भर की मतदाता सूचियों से 13 करोड़ से अधिक नाम हटा दिए गए हैं। दिल्ली और महाराष्ट्र जैसे बड़े राज्यों में भारी गिरावट देखी गई है, जिससे आगामी चुनावों की मतदाता संख्या पर गहरा असर पड़ सकता है।

  • देश भर की ड्राफ्ट रोल से 13.37 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं।
  • दिल्ली में सबसे अधिक 32.8% और महाराष्ट्र में 21.1% की कटौती दर्ज की गई है।
  • नाम हटाने के मुख्य कारणों में स्थायी स्थानांतरण, मृत्यु और डुप्लीकेट प्रविष्टियाँ शामिल हैं।
  • गलत तरीके से हटाए गए मतदाता एक महीने के भीतर पुनः आवेदन कर सकते हैं।

भारतीय चुनाव आयोग (EC) द्वारा शुरू किए गए विशेष गहन संशोधन (Special Intensive Revision - SIR) ने देश की चुनावी राजनीति में एक बड़ा बदलाव किया है। जून पिछले वर्ष से शुरू हुए इस अभियान के तहत अब तक 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की ड्राफ्ट रोल से 13 करोड़ से अधिक नाम हटा दिए गए हैं। हाल ही में सोमवार को प्रकाशित दिल्ली और महाराष्ट्र की ड्राफ्ट रोल ने चौंकाने वाले आंकड़े पेश किए हैं, जहां क्रमशः 32.8% और 21.1% मतदाताओं की कटौती हुई है।

आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली में मतदाताओं की संख्या 1.45 करोड़ से घटकर 97.53 लाख रह गई है, जबकि महाराष्ट्र में यह 9.78 करोड़ से गिरकर 7.71 करोड़ पर आ गई है। इस तीसरे चरण के संशोधन में अब तक 17 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में कुल 6.15 करोड़ नाम हटाए जा चुके हैं। चुनाव आयोग ने इस प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए एक सख्त समय सीमा तय की है, जिसके तहत गलत तरीके से हटाए गए लोग अगले एक महीने में पुनः शामिल होने के लिए आवेदन कर सकते हैं।

नाम हटाने के मुख्य कारण

महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) कार्यालय के अनुसार, 3.56% मतदाता मृत पाए गए, 15.78% स्थायी रूप से स्थानांतरित या अनुपस्थित थे, और 1.81% मतदाता एक से अधिक स्थानों पर पंजीकृत थे। वहीं दिल्ली में, लगभग एक तिहाई (29.86%) मतदाताओं को अनुपस्थित या स्थानांतरित चिह्नित किया गया, जबकि 1.95% मृत और 0.98% डुप्लीकेट प्रविष्टियों के कारण हटाए गए।

BozokMedia के विश्लेषण के अनुसार, यह संशोधन केवल डेटा की सफाई नहीं है, बल्कि यह चुनावी आधार को पूरी तरह से बदलने की प्रक्रिया है। पिछले दो दशकों से चुनाव आयोग केवल वार्षिक सारांश संशोधन (Summary Revision) कर रहा था, लेकिन अब 'गहन संशोधन' (Intensive Revision) की वापसी यह दर्शाती है कि आयोग मतदाता सूची की शुद्धता को लेकर अत्यंत गंभीर है। यह कदम 'वन नेशन वन इलेक्शन' जैसी भविष्य की योजनाओं के लिए एक मजबूत आधार तैयार करने की कोशिश हो सकता है।

"मतदाता सूची का शुद्धिकरण लोकतंत्र की नींव को मजबूत करता है, लेकिन बड़े पैमाने पर विलोपन यह सुनिश्चित करने की चुनौती भी पेश करता है कि कोई भी वैध मतदाता अपने मताधिकार से वंचित न रह जाए।"

यह प्रक्रिया बिहार से शुरू हुई थी और दूसरे चरण में नौ राज्यों को कवर किया गया। तीसरे चरण में लगभग पूरा देश शामिल है, सिवाय हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर (जनगणना और मौसम के कारण) और असम (NRC प्रक्रिया लंबित होने के कारण) के।

राज्य/UT कटौती का प्रतिशत (%) मुख्य कारण
दिल्ली 32.80% अनुपस्थित/स्थानांतरित
महाराष्ट्र 21.10% स्थानांतरण/मृत्यु
तेलंगाना 21.70% विविध कारण
अंडमान और निकोबार 20.60% विविध कारण

इस पूरी प्रक्रिया को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी, लेकिन मई इस साल अदालत ने चुनाव आयोग के आदेश को बरकरार रखा, जिससे इस गहन संशोधन प्रक्रिया को कानूनी वैधता मिल गई है।

क्या आप जानते हैं?: गहन संशोधन (Intensive Revision) में मतदाता सूची को पूरी तरह से नए सिरे से तैयार किया जाता है, जबकि सामान्य सारांश संशोधन में केवल मौजूदा सूची में बदलाव किए जाते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: यदि मेरा नाम मतदाता सूची से गलती से हट गया है तो मैं क्या करूँ?
उत्तर: आप चुनाव आयोग के निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार अगले एक महीने के भीतर अंतिम रोल में शामिल होने के लिए आवेदन कर सकते हैं।

प्रश्न 2: असम और जम्मू-कश्मीर में यह प्रक्रिया क्यों नहीं हुई?
उत्तर: जम्मू-कश्मीर और हिमाचल में जनगणना और खराब मौसम के कारण इसे स्थगित किया गया है, जबकि असम में NRC की प्रतीक्षा की जा रही है।