भारत निर्वाचन आयोग द्वारा मतदाता सूचियों के विशेष गहन संशोधन (SIR) के तीसरे चरण में 16 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों से 6.15 करोड़ नाम हटा दिए गए हैं, जिससे राजनीतिक विवाद बढ़ गया है।

  • 16 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों की ड्राफ्ट लिस्ट से 6.15 करोड़ (17.04%) नाम हटाए गए।
  • महाराष्ट्र में सबसे अधिक संख्या (2.06 करोड़) और दिल्ली में सबसे अधिक प्रतिशत (32.78%) कटौती हुई।
  • कर्नाटक और तेलंगाना के मुख्यमंत्रियों ने इन 'अनुचित' विलोपनों पर गंभीर चिंता जताई है।
  • अंतिम मतदाता सूचियां 6 सितंबर से प्रकाशित होनी शुरू होंगी।

भारत निर्वाचन आयोग (ECI) द्वारा मतदाता सूचियों के विशेष गहन संशोधन (SIR) का तीसरा चरण अपने समापन की ओर है, लेकिन इसके परिणामों ने देश में हलचल मचा दी है। अब तक प्रकाशित ड्राफ्ट सूचियों के अनुसार, मतदाता रजिस्ट्री से 6 करोड़ से अधिक नाम हटा दिए गए हैं। कुल 36.08 करोड़ नामों में से केवल 29.93 करोड़ को ही बरकरार रखा गया है, जबकि 6.15 करोड़ नामों को सूची से बाहर कर दिया गया है।

इस प्रक्रिया का सबसे अधिक प्रभाव महाराष्ट्र और दिल्ली में देखा गया है। महाराष्ट्र में संख्या के लिहाज से सबसे ज्यादा 2.06 करोड़ नाम हटाए गए, जो पिछली सूची का लगभग 21.15% है। वहीं, दिल्ली में प्रतिशत के मामले में सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई, जहाँ 32.78% मतदाताओं के नाम हटा दिए गए। दिल्ली में केवल 67.22% लोगों से ही गणना फॉर्म एकत्र किए गए, जिसके परिणामस्वरूप 47 लाख से अधिक नाम हटा दिए गए।

BozokMedia के विश्लेषण के अनुसार, मतदाता सूची से इतने बड़े पैमाने पर नामों का हटाया जाना चुनावी जनसांख्यिकी को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित कर सकता है। जब किसी क्षेत्र के पांचवें हिस्से के करीब मतदाताओं को ड्राफ्ट चरण में हटा दिया जाता है, तो यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया में 'वंचना' (disenfranchisement) का जोखिम पैदा करता है। विशेष रूप से दिल्ली और महाराष्ट्र जैसे राजनीतिक केंद्रों में यह बदलाव आगामी चुनावों के परिणामों को प्रभावित कर सकता है।

राज्य/केंद्र शासित प्रदेश हटाए गए नाम मुख्य विवरण
महाराष्ट्र 2.06 करोड़ सर्वाधिक संख्या
दिल्ली 47.56 लाख सर्वाधिक प्रतिशत (32.78%)
कर्नाटक 1.07 करोड़ दूसरी सबसे बड़ी संख्या
सिक्किम 37,724 सबसे कम विलोपन

इस कार्रवाई के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है। कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार और तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पत्र लिखकर इसे "बड़े पैमाने पर और अनुचित" विलोपन करार दिया है। उन्होंने मांग की है कि दावों और आपत्तियों के लिए समय सीमा बढ़ाई जाए ताकि वैध मतदाता अपना नाम वापस जोड़ सकें।

इतने बड़े पैमाने पर नामों का हटाया जाना यह संकेत देता है कि संशोधन मानदंडों को बहुत अधिक सख्ती से लागू किया गया है, जिससे वास्तविक मतदाता भी बाहर हो सकते हैं।

ऐतिहासिक रूप से, SIR का उद्देश्य मृत मतदाताओं, स्थान बदलने वालों या डुप्लिकेट प्रविष्टियों को हटाना होता है। हालांकि, विपक्षी दलों का आरोप है कि इस बार कारणों का अनुप्रयोग मनमाना रहा है। गौरतलब है कि मार्च में सुप्रीम कोर्ट ने SIR प्रक्रिया की संवैधानिक वैधता को बरकरार रखा था, जिससे चुनाव आयोग को इसे जारी रखने का कानूनी आधार मिला।

यह प्रक्रिया पहले ही पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु जैसे राज्यों में पूरी हो चुकी है। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख जैसे क्षेत्रों के लिए कार्यक्रम की घोषणा जनगणना के दूसरे चरण के बाद की जाएगी, ताकि वहां की कठिन मौसम परिस्थितियों का ध्यान रखा जा सके।

क्या आप जानते हैं?: असम में NRC (राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर) की कानूनी जटिलताओं के कारण, मानक SIR के बजाय एक "विशेष संशोधन" प्रक्रिया अपनाई जाती है।

प्रश्न 1: यदि मेरा नाम ड्राफ्ट सूची से हटा दिया गया है, तो क्या मैं इसे वापस पा सकता हूँ?
हाँ, चुनाव आयोग एक निश्चित समय अवधि प्रदान करता है जिसमें नागरिक अपना नाम फिर से जोड़ने के लिए दावे और आपत्तियां दर्ज करा सकते हैं।

प्रश्न 2: अंतिम मतदाता सूचियां सबसे पहले किन राज्यों में आएंगी?
मिजोरम, सिक्किम और मणिपुर सबसे पहले 6 सितंबर से अपनी अंतिम सूचियां प्रकाशित करेंगे।