कोट्टायम और इडुक्की के हाई रेंज को जोड़ने वाला पाला का महत्वाकांक्षी ग्रीन टूरिज्म कॉम्प्लेक्स प्रशासनिक लापरवाही के कारण खंडहर में तब्दील हो गया है। अक्टूबर 2020 में उद्घाटन के बावजूद, यह प्रोजेक्ट आज भी कागजों तक सीमित है।
- पाला का ग्रीन टूरिज्म कॉम्प्लेक्स अक्टूबर 2020 में उद्घाटन के बाद से ही बंद पड़ा है।
- इसका उद्देश्य वागामोन, इलावीज़पूनचिरा और विभिन्न तीर्थ केंद्रों को एक सर्किट से जोड़ना था।
- राजस्व, पर्यटन और सिंचाई विभागों के बीच समन्वय की कमी इस विफलता का मुख्य कारण है।
क्षेत्रीय पर्यटन के लिए एक क्रांतिकारी कदम के रूप में प्रचारित ग्रीन टूरिज्म कॉम्प्लेक्स, उद्घाटन के छह साल बाद प्रशासनिक विफलता का प्रतीक बन गया है। अक्टूबर 2020 में तत्कालीन मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन द्वारा उद्घाटित यह परियोजना कोट्टायम और इडुक्की के पहाड़ी क्षेत्रों को जोड़ने वाले एक व्यापक पर्यटन सर्किट के केंद्र के रूप में सोची गई थी। हालांकि, आज की वास्तविकता यह है कि पूरा परिसर झाड़ियों से ढका हुआ है और बुनियादी सुविधाएं नष्ट हो रही हैं।
इस कॉम्प्लेक्स की वास्तुकला बेहद महत्वाकांक्षी थी, जिसमें पेरिस के लूव्र संग्रहालय की तर्ज पर एक ग्लास-रूफ संरचना और लंदन ब्रिज से प्रेरित एक लोहे का पुल बनाया गया था। इस साइट पर एक एमिनिटी सेंटर, पार्क, वॉकवे और मीनाचिल और लालम नदियों के संगम का शानदार दृश्य देखने के लिए एक व्यू-पॉइंट भी शामिल था।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि यह विफलता केवल एक इमारत की नहीं, बल्कि अंतर-विभागीय समन्वय की पूरी तरह से विफलता है। जब एक परियोजना नगर पालिका, सिंचाई और पर्यटन विभागों के बीच बंटी होती है, तो जवाबदेही अक्सर गायब हो जाती है। इसका आर्थिक नुकसान दोहरा है: एक तरफ शुरुआती पूंजी का बर्बाद होना और दूसरी तरफ पाला-वागामोन-मरमला बेल्ट में पर्यटन से होने वाली संभावित आय का नुकसान।
पाला नगर पालिका ने इस सुविधा को पुनर्जीवित करने के लिए पार्क और एमिनिटी सेंटर के रखरखाव की जिम्मेदारी लेने की इच्छा जताई है। इसके बावजूद, पर्यटन विभाग ने अब तक इस प्रस्ताव पर कोई ठोस प्रतिक्रिया नहीं दी है। एक नगर पालिका अधिकारी ने बताया कि परियोजना वर्तमान में संयुक्त स्वामित्व में है, और स्वामित्व प्राप्त करने के प्रयास जारी हैं।
एक 'दूरदर्शी परियोजना' को 'कार्यात्मक संपत्ति' में बदलना प्रशासनिक चपलता की मांग करता है, जिसकी पाला पर्यटन पहल में स्पष्ट कमी है।
इस समस्या में एक कानूनी पेच भी है। कोट्टायम में पर्यटन विभाग की उप निदेशक रूबी जैकब ने खुलासा किया कि जिस जमीन पर यह प्रोजेक्ट स्थित है, उसे अभी तक राजस्व विभाग से आवश्यक अनुमति (Permissive Sanction) नहीं मिली है। जब तक यह मंजूरी नहीं मिलती, विभाग यह तय नहीं कर पाएगा कि इसे खुद चलाया जाए या किसी अन्य एजेंसी को सौंपा जाए।
ऐतिहासिक रूप से, मीनाचिल नदी क्षेत्र तीर्थयात्रा और प्रकृति पर्यटन का केंद्र रहा है। इस हब को सक्रिय करने में विफल रहकर, राज्य ने भरनंगनम और रामपुरम जैसे तीर्थ केंद्रों को एक टिकाऊ पर्यटन पैकेज में एकीकृत करने का अवसर खो दिया है, जिससे स्थानीय विक्रेताओं और होटल व्यवसायियों को लाभ हो सकता था।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: ग्रीन टूरिज्म कॉम्प्लेक्स जनता के लिए क्यों नहीं खुला है?
यह प्रोजेक्ट राजस्व विभाग से अनुमति न मिलने और पर्यटन एवं सिंचाई विभागों के बीच समन्वय की कमी के कारण रुका हुआ है।
प्रश्न 2: यह कॉम्प्लेक्स किन स्थलों को जोड़ने के लिए बनाया गया था?
इसका उद्देश्य वागामोन, इलावीज़पूनचिरा, इल्लिकल कल्लू, मरमाला और कई महत्वपूर्ण तीर्थ स्थलों को एक सर्किट में जोड़ना था।