जोधपुर स्थित राजस्थान उच्च न्यायालय के वकीलों ने कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करते हुए 6 सितंबर तक काम न करने का फैसला किया है।
- जोधपुर में वकील 6 सितंबर, 2026 तक काम से दूर रहेंगे।
- कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा को हटाने और स्थायी मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति की मांग।
- जस्टिस संदीप मेहता द्वारा 'शक्तियों के दुरुपयोग' के आरोपों के बाद विरोध शुरू हुआ।
जोधपुर स्थित राजस्थान उच्च न्यायालय की मुख्य पीठ पर कानूनी समुदाय में भारी आक्रोश है। दो प्रमुख वकील संघों ने 6 सितंबर तक न्यायिक कार्यों का बहिष्कार करने का निर्णय लिया है। यह कदम कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा के प्रशासन और उनकी कार्यप्रणाली के खिलाफ बढ़ते असंतोष का परिणाम है।
इस विवाद की जड़ जस्टिस संदीप मेहता द्वारा भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) को लिखे गए पत्र हैं, जो सार्वजनिक हो गए हैं। इन पत्रों में जस्टिस मेहता ने "शक्तियों के दुरुपयोग", पक्षपात और भाई-भतीजावाद जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। इन खुलासों ने बार और बेंच के बीच के विश्वास को पूरी तरह हिलाकर रख दिया है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
BozokMedia के विश्लेषण के अनुसार, यह केवल एक प्रशासनिक विवाद नहीं है, बल्कि न्यायिक स्वतंत्रता पर एक बड़ा प्रश्नचिह्न है। जब न्यायपालिका के भीतर ही—जैसे जस्टिस मेहता—प्रशासनिक खामियों का आरोप लगाते हैं, तो यह न्याय प्रणाली की निष्पक्षता पर जनता के भरोसे को कमजोर करता है। स्थायी मुख्य न्यायाधीश की मांग यह दर्शाती है कि वर्तमान अंतरिम नेतृत्व में अस्थिरता है, जो न्याय वितरण में बाधा बन रही है।
जयपुर बेंच पर स्थिति और भी तनावपूर्ण हो गई, जहां वकीलों ने जस्टिस शर्मा की अदालत के बाहर नारेबाजी की, जिसके बाद पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा। हाई कोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन और हाई कोर्ट लॉयर्स एसोसिएशन का कहना है कि यह संघर्ष न्यायपालिका की "गरिमा और स्वतंत्रता" को बचाने के लिए है।
उच्च न्यायालय की स्थिरता बार और बेंच के बीच सहजीवी संबंध पर टिकी होती है; एक बार जब भाई-भतीजावाद के आरोपों से विश्वास टूट जाता है, तो केवल एक पारदर्शी और समयबद्ध जांच ही व्यवस्था को बहाल कर सकती है।
वकीलों के तीन सूत्रीय मांग पत्र में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि: पहला, कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा को उनके न्यायिक और प्रशासनिक जिम्मेदारियों से मुक्त किया जाए; दूसरा, एक स्थायी मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति हो; और तीसरा, "टारगेटेड फाइल सिस्टम" को तुरंत बंद किया जाए, जिससे केसों के आवंटन में पक्षपात का आरोप है।
इस बीच, जयपुर बार एसोसिएशन ने इस मामले को सर्वोच्च स्तर पर ले जाने का निर्णय लिया है। वे CJI सूर्यकांत को एक कड़ा ज्ञापन भेजेंगे, जिसमें इस पूरी जांच को एक निश्चित समय सीमा में पूरा करने और उसकी रिपोर्ट को सार्वजनिक करने की मांग की जाएगी।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: राजस्थान उच्च न्यायालय के वकील हड़ताल पर क्यों हैं?
वकील जस्टिस संदीप मेहता द्वारा लगाए गए शक्तियों के दुरुपयोग और भाई-भतीजावाद के आरोपों के बाद कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा के खिलाफ विरोध कर रहे हैं।
प्रश्न 2: वकील संघों की मुख्य मांगें क्या हैं?
मुख्य मांगों में कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश को हटाना, स्थायी मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति और 'टारगेटेड फाइल सिस्टम' को समाप्त करना शामिल है।