धारवाड़ में SUCI(C) ने सामाजिक सुरक्षा पेंशन रोकने के खिलाफ बड़ा विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने सरकार पर गरीबों विरोधी नीतियों का आरोप लगाते हुए पेंशन की तत्काल बहाली की मांग की।
- SUCI(C) ने धारवाड़ में सामाजिक सुरक्षा पेंशन रोकने के खिलाफ रैली निकाली।
- 18 लाख से अधिक लाभार्थियों की पेंशन सत्यापन के नाम पर निलंबित की गई है।
- प्रदर्शनकारियों ने BPL आय सीमा को बढ़ाकर 3 लाख रुपये करने की मांग की।
- बुजुर्गों और दिव्यांगों के लिए घर पर ही सत्यापन (Doorstep Verification) की मांग की गई।
कर्नाटक के धारवाड़ में सोमवार को सोशलिस्ट यूनिटी सेंटर ऑफ इंडिया (कम्युनिस्ट) [SUCI(C)] के सदस्यों ने राज्य सरकार के खिलाफ एक व्यापक विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने काला भवन मैदान से उपायुक्त कार्यालय तक एक विशाल रैली निकाली, जिसमें उन्होंने पिछले पांच महीनों से रुकी हुई सामाजिक सुरक्षा पेंशन को तुरंत जारी करने की मांग की।
प्रदर्शनकारियों ने हाथों में तख्तियां लेकर कांग्रेस सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और जिला प्रशासन के माध्यम से मुख्यमंत्री को एक ज्ञापन सौंपा। SUCI(C) का आरोप है कि वर्तमान सरकार 'गरीब विरोधी' नीतियों को अपना रही है, जिससे समाज के सबसे कमजोर वर्ग—बुजुर्गों, विधवाओं और दिव्यांगों—को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
क्यों है यह मुद्दा गंभीर?
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह मुद्दा केवल प्रशासनिक देरी का नहीं बल्कि मानवीय संकट का है। जब लाखों लोगों की बुनियादी आय का स्रोत अचानक बंद हो जाता है, तो इसका सीधा असर उनके भोजन और स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ता है। सरकार द्वारा सत्यापन (Verification) के नाम पर पेंशन रोकना एक ऐसी प्रक्रिया बन गई है जिसने पात्र लाभार्थियों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने पर मजबूर कर दिया है।
"दस्तावेज़ सत्यापन के नाम पर पेंशन रोकना एक गरीब विरोधी कदम है; यदि अपात्र लोगों को लाभ मिला है, तो यह भ्रष्ट तंत्र की विफलता है, न कि गरीबों की गलती।"
SUCI(C) के राज्य समिति सदस्य राममंजनप्पा अल्डल्ली ने कहा कि नियमित आय के बिना ये लोग दवाइयों और बुनियादी जरूरतों के लिए पूरी तरह पेंशन पर निर्भर हैं। उन्होंने मांग की कि अधिकारियों को लाभार्थियों के घर जाकर सत्यापन करना चाहिए, न कि शारीरिक रूप से अक्षम लोगों को दफ्तर बुलाना चाहिए।
जिला सचिव लक्ष्मण जादगन्नवर ने सरकारी आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि 18 अगस्त के सरकारी आदेश के अनुसार, लगभग 23.14 लाख लाभार्थियों का पुन: सत्यापन किया गया, जिनमें से 18,06,032 लाभार्थियों की पेंशन विभिन्न कारणों से निलंबित कर दी गई है। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि सत्यापन प्रक्रिया को मानवीय बनाया जाए और गांव स्तर पर विशेष शिविर लगाए जाएं।
| वर्तमान स्थिति | SUCI(C) की मांग |
|---|---|
| दफ्तर जाकर सत्यापन | डोरस्टेप (घर पर) सत्यापन |
| कम BPL आय सीमा | BPL सीमा बढ़ाकर 3 लाख रुपये |
| लाखों पेंशन निलंबित | तत्काल बहाली और पेंशन में वृद्धि |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. SUCI(C) ने मुख्य रूप से क्या मांग की है?
उन्होंने निलंबित पेंशन की तत्काल बहाली, BPL आय सीमा को 3 लाख रुपये करने और घर पर सत्यापन की मांग की है।
2. कितने लोगों की पेंशन प्रभावित हुई है?
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, लगभग 18 लाख से अधिक लाभार्थियों की पेंशन निलंबित की गई है।