एक महत्वपूर्ण अध्ययन से पता चला है कि उत्तराखंड के 219 हैंगिंग ग्लेशियर्स में से 73 अस्थिर हो चुके हैं, जिससे ग्लोबल वार्मिंग के कारण अचानक आने वाली बाढ़ (GLOF) का खतरा बढ़ गया है।

  • उत्तराखंड में 219 हैंगिंग ग्लेशियर्स हैं, जिनमें से 33% अस्थिर पाए गए हैं।
  • खड़ी ढलानों पर स्थित होने के कारण ये ग्लेशियर अधिक अस्थिर होते हैं।
  • हिमालयी क्षेत्र वैश्विक औसत की तुलना में तेजी से गर्म हो रहा है।

भारतीय हिमालय का नाजुक पारिस्थितिकी तंत्र एक अभूतपूर्व खतरे का सामना कर रहा है। नए शोध के अनुसार, उत्तराखंड के 219 'हैंगिंग ग्लेशियर्स' (लटकते ग्लेशियर)—जो घाटी के तल के बजाय खड़ी ढलानों पर स्थित होते हैं—में से लगभग एक-तिहाई को अस्थिर श्रेणी में रखा गया है। यह अस्थिरता विनाशकारी भूस्खलन और बाढ़ की संभावना को काफी बढ़ा देती है।

पारंपरिक घाटी ग्लेशियरों के विपरीत, हैंगिंग ग्लेशियर स्वाभाविक रूप से गुरुत्वाकर्षण के कारण ढहने के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं। जब ये बर्फ के द्रव्यमान तेजी से पिघलते हैं या खिसकते हैं, तो वे ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) को जन्म दे सकते हैं। ऐसी आपदाओं में पानी, मलबा और चट्टानें तीव्र गति से नीचे आती हैं, जिससे कुछ ही सेकंड में गांव और बुनियादी ढांचे तबाह हो जाते हैं। उत्तराखंड और पड़ोसी राज्य सिक्किम पहले ही तीन बड़ी GLOF आपदाओं का सामना कर चुके हैं।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि यह केवल एक भूगर्भीय विसंगति नहीं है, बल्कि त्वरित जलवायु परिवर्तन का प्रत्यक्ष लक्षण है। हिमालयी क्षेत्र वैश्विक औसत की तुलना में अधिक तेजी से गर्म हो रहा है, जिससे ग्लेशियर तेजी से पीछे हट रहे हैं और अस्थिर झीलें बन रही हैं। इन लटकते ग्लेशियरों का नाजुक संतुलन यह दर्शाता है कि एक हल्का सा झटका—चाहे वह भूकंप हो या अत्यधिक गर्मी—निचली घाटियों में आपदाओं की एक श्रृंखला शुरू कर सकता है।

हिमालयी क्षेत्रों में बढ़ता तापमान इन जमी हुई विशालताओं को नीचे रहने वाले लाखों लोगों के लिए 'टाइम बम' में बदल रहा है।

ऐतिहासिक रूप से, हिमालय को बर्फ की एक स्थायी ढाल माना जाता था, लेकिन 21वीं सदी में यह अस्थिरता में बदल गया है। खड़ी स्थलाकृति और बढ़ते तापमान का मेल ग्लेशियरों की अस्थिरता के लिए एक 'परफेक्ट स्टॉर्म' बनाता है। अब समय आ गया है कि हम केवल आपदा प्रबंधन के बजाय उपग्रह-आधारित निगरानी और प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों की ओर बढ़ें।

क्या आप जानते हैं?: हैंगिंग ग्लेशियर अक्सर 'आइस एवलांच' (बर्फ के हिमस्खलन) का मुख्य स्रोत होते हैं, जो बिना किसी पूर्व मौजूद झील के भी भीषण बाढ़ ला सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: हैंगिंग ग्लेशियर क्या होता है?
हैंगिंग ग्लेशियर वह ग्लेशियर होता है जो घाटी में बहने के बजाय किसी पहाड़ की खड़ी ढलान या चट्टान के किनारे पर स्थित होता है।

प्रश्न 2: ये घाटी ग्लेशियरों की तुलना में अधिक खतरनाक क्यों हैं?
क्योंकि ये खड़ी ढलानों पर टिके होते हैं, इसलिए इनके ढहने और तेजी से पिघलने की संभावना अधिक होती है, जिससे अचानक बाढ़ आ सकती है।