ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के करीब आने के साथ ही भारत की रणनीतिक स्थिति चर्चा में है। भारत अमेरिका के साथ अपने संबंधों को संतुलित रखते हुए चीन और रूस के साथ जटिल कूटनीतिक चुनौतियों का सामना कर रहा है, जिसमें ईरान एक महत्वपूर्ण कारक बनकर उभरा है।

  • भारत ब्रिक्स में अपनी भूमिका निभाते हुए अमेरिका के साथ संबंधों को प्राथमिकता देगा।
  • ईरान के साथ संबंधों को लेकर चीन और रूस के साथ भारत के बीच तनाव बढ़ सकता है।
  • 2026 में शी जिनपिंग की भारत यात्रा और पीएम मोदी से मुलाकात की संभावना है।
  • दिल्ली में सम्मेलन की तैयारी के लिए NDMC और ट्रैफिक पुलिस ने व्यापक योजना बनाई है।

आगामी ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन केवल एक आर्थिक मंच नहीं, बल्कि वैश्विक भू-राजनीति का एक बड़ा अखाड़ा बनने जा रहा है। भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वह एक तरफ रूस और चीन जैसे देशों के साथ एक ब्लॉक का हिस्सा है, वहीं दूसरी ओर अमेरिका के साथ उसके रणनीतिक और रक्षा संबंध गहरे होते जा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत किसी भी हाल में वाशिंगटन को नाराज करने का जोखिम नहीं उठाएगा।

इस कूटनीतिक खींचतान के केंद्र में ईरान है। ईरान के साथ भारत के पुराने संबंध और बुनियादी ढांचा परियोजनाएं हैं, लेकिन अमेरिका द्वारा ईरान पर लगाए गए कड़े प्रतिबंधों के कारण भारत को बहुत सावधानी से कदम उठाने पड़ रहे हैं। यदि भारत ब्रिक्स के मंच पर ईरान का अधिक समर्थन करता है, तो अमेरिका के साथ तनाव बढ़ सकता है, जबकि यदि वह दूरी बनाता है, तो रूस और चीन के साथ उसके संबंधों में खटास आ सकती है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, भारत की 'रणनीतिक स्वायत्तता' (Strategic Autonomy) की नीति अब एक कठिन परीक्षा के दौर से गुजर रही है। भारत चाहता है कि वह ग्लोबल साउथ की आवाज बने, लेकिन उसे यह सुनिश्चित करना होगा कि उसकी यह महत्वाकांक्षा पश्चिमी देशों के साथ उसके व्यापारिक और सुरक्षा समझौतों में बाधा न बने। यह संतुलन ही भारत की वैश्विक साख तय करेगा।

"भारत की कूटनीति अब 'सबके साथ, लेकिन अपनी शर्तों पर' के सिद्धांत पर आधारित है, जो उसे एक अद्वितीय वैश्विक मध्यस्थ बनाता है।"

वहीं, 2026 के शिखर सम्मेलन को लेकर एक बड़ी खबर यह है कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग सात साल बाद भारत आ सकते हैं। यदि पीएम मोदी और शी जिनपिंग की मुलाकात होती है, तो यह सीमा विवाद के बाद दोनों देशों के बीच संबंधों को सामान्य करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम होगा।

तैयारियों की बात करें तो, राजधानी दिल्ली में NDMC ने 41 प्रमुख मार्गों के सौंदर्यीकरण और मरम्मत पर ध्यान केंद्रित किया है। सुरक्षा कारणों से 22 स्थानों पर ट्रैफिक डायवर्जन लागू किया जाएगा, ताकि वैश्विक नेताओं के आवागमन में कोई बाधा न आए और शहर की एक आधुनिक छवि पेश की जा सके।

क्या आप जानते हैं?: ब्रिक्स की स्थापना 2006 में हुई थी और हाल ही में इसका विस्तार कर इसमें नए सदस्य देशों को जोड़ा गया है, जिससे यह दुनिया की एक बड़ी आर्थिक शक्ति बन गया है।

Frequently Asked Questions

1. ब्रिक्स में भारत की मुख्य चुनौती क्या है?
भारत की मुख्य चुनौती अमेरिका के साथ अपने रणनीतिक संबंधों को बनाए रखते हुए रूस और चीन के साथ संतुलन बनाना है।

2. क्या शी जिनपिंग 2026 में भारत आएंगे?
संभावनाएं हैं कि 2026 ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान शी जिनपिंग भारत का दौरा कर सकते हैं और पीएम मोदी से मिल सकते हैं।