तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने डेल्टा सिंचाई के लिए मेट्टूर बांध से पानी छोड़ना शुरू कर दिया है। सरकार की योजना शुरुआती 45 दिनों तक पानी जारी रखने की है, लेकिन कम भंडारण के कारण इसकी निरंतरता पर सवाल उठ रहे हैं।

  • मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने 1 सितंबर, 2026 को मेट्टूर बांध के गेट खोले।
  • वर्तमान जल स्तर 91.56 फीट है, जबकि पूर्ण क्षमता 120 फीट है।
  • शुरुआती योजना के अनुसार 45 दिनों तक पानी छोड़ा जाएगा, लेकिन यह आने वाले मानसून और कर्नाटक से पानी की आवक पर निर्भर है।

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने मंगलवार को मेट्टूर बांध (स्टेनली जलाशय) के गेट खोलकर डेल्टा क्षेत्रों में सिंचाई के लिए पानी छोड़ना शुरू किया। यह कदम राज्य के चावल बेल्ट के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि समय पर पानी न मिलने से 'सांबा' फसल की खेती को भारी नुकसान हो सकता है। अधिकारियों का कहना है कि पानी को नदी प्रणाली के अंतिम छोर तक पहुँचने में लगभग तीन सप्ताह का समय लगता है, इसलिए इस समय रिलीज शुरू करना अनिवार्य था।

वर्तमान आंकड़ों के अनुसार, मंगलवार को बांध का जल स्तर 91.56 फीट था और कुल भंडारण लगभग 54.45 tmc फीट दर्ज किया गया। बांध की पूर्ण क्षमता 93.47 tmc फीट है और अधिकतम स्तर 120 फीट है। यदि राज्य को आगे कोई अतिरिक्त आवक नहीं मिलती है, तो पर्यावरणीय प्रवाह और पेयजल आवश्यकताओं के लिए 10 tmc फीट सुरक्षित रखने के बाद, यह भंडारण केवल डेढ़ महीने तक ही पर्याप्त होगा।

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि तमिलनाडु की कृषि अर्थव्यवस्था पूरी तरह से कावेरी जल प्रबंधन पर निर्भर है। वर्तमान में, कर्नाटक से प्राप्त पानी में भारी कमी देखी गई है। जून से अगस्त के बीच, सुप्रीम कोर्ट द्वारा निर्धारित मात्रा के मुकाबले वास्तविक प्राप्ति में 57.246 tmc फीट की भारी गिरावट दर्ज की गई है। यह कमी भविष्य में जल संकट की चेतावनी दे रही है।

माह (2026) निर्धारित मात्रा (tmc ft) प्राप्त मात्रा (tmc ft) कमी/अधिकता
जून 9.19 2.915 -6.275
जुलाई 31.24 0.7138 -30.526
अगस्त 44.4677 24.0229 -18.069

सरकार अब सितंबर महीने की संभावित आवक पर भरोसा कर रही है। पिछले 30 वर्षों के आंकड़ों के अनुसार, सितंबर में औसत 36.8 tmc फीट पानी आता है। हालांकि, कावेरी जलग्रहण क्षेत्र में मानसून की 47% कमी को देखते हुए, अनुमान है कि केवल 20 tmc फीट पानी ही मिल पाएगा। यदि ऐसा होता है, तो पानी की आपूर्ति को दो सप्ताह और बढ़ाया जा सकता है।

"समय पर जल वितरण न होने से सांबा फसल की पूरी फसल बर्बाद हो सकती है, जिससे राज्य के किसानों पर गंभीर आर्थिक संकट आ सकता है।"

ऐतिहासिक रूप से, 1974 के बाद से सबसे खराब स्थिति में भी सितंबर में कम से कम 10 tmc फीट पानी प्राप्त हुआ है (जैसे 1987 में 10.57 tmc फीट)। यह न्यूनतम स्तर सरकार के लिए एक सुरक्षा जाल की तरह काम कर रहा है, जिससे उन्हें पानी छोड़ने का निर्णय लेने का साहस मिला है। अब सबकी नजरें 20 अक्टूबर के आसपास आने वाले उत्तर-पूर्वी मानसून पर हैं।

क्या आप जानते हैं?: मेट्टूर बांध तमिलनाडु के 'चावल के कटोरे' के लिए जीवन रेखा माना जाता है और यह भारत के सबसे पुराने और महत्वपूर्ण बांधों में से एक है।

1. मेट्टूर बांध का वर्तमान जल स्तर क्या है?
1 सितंबर, 2026 तक बांध का जल स्तर 91.56 फीट है और भंडारण 54.45 tmc फीट है।

2. सांबा फसल के लिए पानी छोड़ना क्यों जरूरी है?
पानी को नदी के अंतिम छोर तक पहुँचने में 3 सप्ताह लगते हैं; यदि अब पानी नहीं छोड़ा गया, तो फसलें सूख सकती हैं।